आल-इमरान · 14/200
अनुवाद उच्चारण — आल-इमरान
زُيِّنَ لِلنَّاسِ حُبُّ الشَّهَوَاتِ مِنَ النِّسَاءِ وَالْبَنِينَ وَالْقَنَاطِيرِ الْمُقَنطَرَةِ مِنَ الذَّهَبِ وَالْفِضَّةِ وَالْخَيْلِ الْمُسَوَّمَةِ وَالْأَنْعَامِ وَالْحَرْثِ ۗ ذَٰلِكَ مَتَاعُ الْحَيَاةِ الدُّنْيَا ۖ وَاللَّهُ عِندَهُ حُسْنُ الْمَآبِ ۝١٤
Zuyyina linnaasi hubbush shahawaati minannisaaa`i wal baneena walqanaateeril muqantarati minaz zahabi walfiddati walkhailil musawwamati wal an`aami walhars; zaalika mataa`ul hayaatid dunyaa wallaahu `indahoo husnul ma-aab
📖 हिंदी अर्थ
दुनिया में लोगों को उनकी मरग़ूब चीज़े (मसलन) बीवियों और बेटों और सोने चॉदी के बड़े बड़े लगे हुए ढेरों और उम्दा उम्दा घोड़ों और मवेशियों ओर खेती के साथ उलफ़त भली करके दिखा दी गई है ये सब दुनयावी ज़िन्दगी के (चन्द रोज़ा) फ़ायदे हैं और (हमेशा का) अच्छा ठिकाना तो ख़ुदा ही के यहॉ है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • زُيِّنَ: सुंदर बनाकर प्रस्तुत किया गया, मन को आकर्षित करने वाला बनाया गया।
  • الشَّهَوَاتِ: इच्छाएँ, वह चीज़ें जिन्हें मन स्वभावतः चाहता है।
  • الْقَنَاطِيرِ الْمُقَنطَرَةِ: ढेर सारा धन, बहुत बड़ी मात्रा में एकत्रित संपत्ति।
  • الْمُسَوَّمَةِ: निशान लगाए हुए, सुंदर और प्रशिक्षित घोड़े।
  • الْأَنْعَامِ: चौपाए जानवर — ऊँट, गाय, बकरी आदि।
  • الْحَرْثِ: खेती, वह भूमि जो बोआई और पौधों के लिए तैयार की गई हो।
  • الْمَآبِ: लौटने की जगह, अंतिम ठिकाना।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला इस आयत में बताते हैं कि उसने इंसान के लिए दुनिया की चीज़ों की मोहब्बत को खूबसूरत बना दिया है — यह एक इम्तिहान है। इन चीज़ों में सबसे पहले औरतें हैं, फिर बेटे, फिर ढेर सारा सोना-चाँदी, फिर निशान वाले सुंदर घोड़े, फिर चौपाए जानवर (ऊँट, गाय, बकरी) और खेती-बाड़ी। ये सारी चीज़ें इंसान के दिल को अपनी ओर खींचती हैं और उसे दुनिया में मशगूल रखती हैं।

ये सब चीज़ें दुनिया की ज़िंदगी का अस्थायी सामान हैं — कुछ दिनों का मज़ा है, जो आखिरकार खत्म हो जाने वाला है। इन पर दिल लगाना और इन्हीं में उलझे रहना अक्लमंदी नहीं है। असली कामयाबी और हमेशा रहने वाली नेमत अल्लाह के पास है — वह है जन्नत, जो हर खूबसूरत चीज़ से बेहतर और हमेशा रहने वाली है। जो इंसान दुनिया की इन चीज़ों से ऊपर उठकर अल्लाह की रज़ा और उसके इनाम की तरफ देखेगा, वही सच्चा बुद्धिमान है।


फ़ायदे (सीख):

  1. दुनिया की चीज़ों से मोहब्बत इंसान की फितरत है — यह कोई गुनाह नहीं, बल्कि एक आज़माइश है। असल परीक्षा यह है कि इंसान इन चीज़ों को अल्लाह की राह में खर्च करे और इन पर अल्लाह की याद को न भूल जाए।
  2. दुनिया की चीज़ें अस्थायी हैं — चाहे कितनी भी बड़ी दौलत हो, सुंदर घोड़े हों या खेती-बाड़ी, ये सब एक दिन खत्म हो जाने वाली हैं। इसलिए इन पर दिल लगाना बेवकूफी है।
  3. असली सुंदरता और सुख अल्लाह के पास है — जन्नत की नेमतें इन सब दुनियावी चीज़ों से कहीं बेहतर और हमेशा रहने वाली हैं। जो इंसान इस सच्चाई को समझ ले, वह दुनिया को कभी अपना असली ठिकाना नहीं बनाएगा।
  4. यह आयत हमें सिखाती है कि दुनिया की चीज़ों का सही इस्तेमाल करें — इन्हें हलाल तरीके से कमाएँ, अल्लाह का शुक्र अदा करें, और इनमें से दूसरों की मदद करें। इस तरह दुनिया की चीज़ें भी आख़िरत की कमाई का ज़रिया बन जाती हैं।
  5. मोहब्बत का सही मक़ाम सिर्फ अल्लाह है — दुनिया की हर चीज़ से मोहब्बत हो सकती है, लेकिन सबसे बड़ी और सच्ची मोहब्बत अल्लाह से होनी चाहिए। जिसके दिल में अल्लाह की मोहब्बत होगी, वह दुनिया की चीज़ों को अपने क़दमों तले देखेगा, न कि अपने दिल में।


📜 आयत 12-16 — आल-इमरान

12قُل لِّلَّذِينَ كَفَرُوا سَتُغْلَبُونَ وَتُحْشَرُونَ إِلَىٰ جَهَنَّمَ ۚ وَبِئْسَ الْمِهَادُ
(ऐ रसूल) जिन लोगों ने कुफ़्र इख्तेयार किया उनसे कह दो कि बहुत जल्द तुम (मुसलमानो के मुक़ाबले में) मग़लूब (हारे हुए) होंगे और जहन्नुम में इकट्ठे किये जाओगे और वह (क्या) बुरा ठिकाना है
13قَدْ كَانَ لَكُمْ آيَةٌ فِي فِئَتَيْنِ الْتَقَتَا ۖ فِئَةٌ تُقَاتِلُ فِي سَبِيلِ اللَّهِ وَأُخْرَىٰ كَافِرَةٌ يَرَوْنَهُم مِّثْلَيْهِمْ رَأْيَ الْعَيْنِ ۚ وَاللَّهُ يُؤَيِّدُ بِنَصْرِهِ مَن يَشَاءُ ۗ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَعِبْرَةً لِّأُولِي الْأَبْصَارِ
बेशक तुम्हारे (समझाने के) वास्ते उन दो (मुख़ालिफ़ गिरोहों में जो (बद्र की लड़ाई में) एक दूसरे के साथ गुथ गए (रसूल की सच्चाई की) बड़ी भारी निशानी है कि एक गिरोह ख़ुदा की राह में जेहाद करता था और दूसरा काफ़िरों का जिनको मुसलमान अपनी ऑख से दुगना देख रहे थे (मगर ख़ुदा ने क़लील ही को फ़तह दी) और ख़ुदा अपनी मदद से जिस की चाहता है ताईद करता है बेशक ऑख वालों के वास्ते इस वाक़ये में बड़ी इबरत है
14زُيِّنَ لِلنَّاسِ حُبُّ الشَّهَوَاتِ مِنَ النِّسَاءِ وَالْبَنِينَ وَالْقَنَاطِيرِ الْمُقَنطَرَةِ مِنَ الذَّهَبِ وَالْفِضَّةِ وَالْخَيْلِ الْمُسَوَّمَةِ وَالْأَنْعَامِ وَالْحَرْثِ ۗ ذَٰلِكَ مَتَاعُ الْحَيَاةِ الدُّنْيَا ۖ وَاللَّهُ عِندَهُ حُسْنُ الْمَآبِ
दुनिया में लोगों को उनकी मरग़ूब चीज़े (मसलन) बीवियों और बेटों और सोने चॉदी के बड़े बड़े लगे हुए ढेरों और उम्दा उम्दा घोड़ों और मवेशियों ओर खेती के साथ उलफ़त भली करके दिखा दी गई है ये सब दुनयावी ज़िन्दगी के (चन्द रोज़ा) फ़ायदे हैं और (हमेशा का) अच्छा ठिकाना तो ख़ुदा ही के यहॉ है
15۞ قُلْ أَؤُنَبِّئُكُم بِخَيْرٍ مِّن ذَٰلِكُمْ ۚ لِلَّذِينَ اتَّقَوْا عِندَ رَبِّهِمْ جَنَّاتٌ تَجْرِي مِن تَحْتِهَا الْأَنْهَارُ خَالِدِينَ فِيهَا وَأَزْوَاجٌ مُّطَهَّرَةٌ وَرِضْوَانٌ مِّنَ اللَّهِ ۗ وَاللَّهُ بَصِيرٌ بِالْعِبَادِ
(ऐ रसूल) उन लोगों से कह दो कि क्या मैं तुमको उन सब चीज़ों से बेहतर चीज़ बता दूं (अच्छा सुनो) जिन लोगों ने परहेज़गारी इख्तेयार की उनके लिए उनके परवरदिगार के यहॉ (बेहिश्त) के वह बाग़ात हैं जिनके नीचे नहरें जारी हैं (और वह) हमेशा उसमें रहेंगे और उसके अलावा उनके लिए साफ सुथरी बीवियॉ हैं और (सबसे बढ़कर) ख़ुदा की ख़ुशनूदी है और ख़ुदा (अपने) उन बन्दों को खूब देख रहा हे जो दुआऐं मॉगा करते हैं
16الَّذِينَ يَقُولُونَ رَبَّنَا إِنَّنَا آمَنَّا فَاغْفِرْ لَنَا ذُنُوبَنَا وَقِنَا عَذَابَ النَّارِ
कि हमारे पालने वाले हम तो (बेताम्मुल) ईमान लाए हैं पस तू भी हमारे गुनाहों को बख्श दे और हमको दोज़ख़ के अज़ाब से बचा
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अनुवाद — आल-इमरान 14

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सूरा आयत 14/200 — आल-इमरान آل عمران (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: आल-इमरान सुनें, आल-इमरान अनुवाद, आल-इमरान mp3, आल-इमरान pdf. आयत 12–16. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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