Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- أَصَابَكُمْ (तुम्हें पहुँचा) — जो कुछ तुम पर आया, जैसे घाव, शहादत, या हार।
- الْجَمْعَانِ (दोनों समूह) — मुसलमानों का समूह और मुशरिकों (काफिरों) का समूह।
- بِإِذْنِ اللَّهِ (अल्लाह के आदेश से) — अल्लाह की इच्छा, उसके फैसले और उसकी तकदीर से।
- وَلِيَعْلَمَ الْمُؤْمِنِينَ (और ताकि अल्लाह मोमिनों को जान ले) — ताकि सच्चे ईमानवाले सामने आ जाएँ और झूठे दावे करने वाले अलग हो जाएँ।
तफसीर (व्याख्या):
ऐ ईमानवालो! जो कुछ भी तुम पर उस दिन आया, जब दोनों समूह (मुसलमान और मुशरिक) उहुद के मैदान में आमने-सामने हुए — चाहे वह ज़ख्म हों, शहादत हो, या पहली जीत के बाद हार का सामना — वह सब कुछ अल्लाह ही के आदेश, उसकी इच्छा और उसकी तकदीर से हुआ। यह कोई इत्तेफ़ाक़ या संयोग नहीं था, बल्कि अल्लाह की गहरी हिकमत (बुद्धिमत्ता) थी।
अल्लाह तआला ने यह सब इसलिए होने दिया ताकि सच्चे मोमिनों को मुशरिकों और मुनाफ़िकों से अलग करके सामने लाए। क्योंकि ईमान का दावा ज़ुबान से आसान है, लेकिन असली ईमान वही है जो मुश्किलों और आज़माइशों में ज़ाहिर हो। जब मुसलमानों को उहुद में घाव और नुकसान पहुँचा, तो सच्चे साबित हुए वे लोग जिन्होंने अल्लाह के रास्ते में जान की परवाह नहीं की, और जो कमज़ोर ईमान वाले थे या मुनाफ़िक थे, वे पीछे हट गए।
यह आयत हमें सिखाती है कि मुसीबतें और परीक्षाएँ अल्लाह की तरफ से हैं, और उनमें हमारे लिए भलाई छिपी होती है। अल्लाह हमें आज़माता है ताकि हमारा ईमान पक्का हो, हमारा सब्र बढ़े, और हम उसकी राह पर और मज़बूती से क़ायम रहें। जब कोई मुसीबत आए, तो हमें यह यक़ीन रखना चाहिए कि यह अल्लाह की तरफ से है, और उसमें हमारे लिए कोई न कोई हिकमत ज़रूर है। यही सच्चे मोमिन की पहचान है — कि वह हर हाल में अल्लाह पर भरोसा रखे और उसके फैसले पर राज़ी रहे।
याद रखो, अल्लाह तआला अपने बंदों से बेहद मुहब्बत करता है, और हर आज़माइश के बाद उनके लिए खुशी और कामयाबी रखता है। उहुद की उस मुसीबत के बाद ही अल्लाह ने मुसलमानों को ताक़त दी, उनके दिलों को साफ़ किया, और उन्हें सिखाया कि सब्र और तक़वा ही असली फतह की कुंजी है। इसलिए हमें भी अपनी ज़िंदगी की हर परेशानी में अल्लाह की रहमत की उम्मीद रखनी चाहिए और यक़ीन करना चाहिए कि अल्लाह हर मुसीबत के बाद राहत ज़रूर देता है।
📜 आयत 164-168 — सूरा आल-इमरान
अनुवाद — आल-इमरान 166
सूरा आल-इमरान आयत 166 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जिस दिन दो जमाअतें आपस में गुंथ गयीं उस…सूरा आयत 166/200 — सूरा आल-इमरान آل عمران (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा आल-इमरान सुनें, सूरा आल-इमरान अनुवाद, सूरा आल-इमरान mp3, सूरा आल-इमरान pdf. आयत 164–168. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा आल-इमरान
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
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