Mishary Rashid Alafasy
✓
Mahmoud Khalil Al-Husary
✓
Abdurrahman As-Sudais
✓
Mohamed Siddiq Al-Minshawi
✓
Abdul Basit Abdul Samad
✓
Ali Al-Hudhaify
✓
Ahmed ibn Ali al-Ajamy
✓
Abu Bakr Ash-Shaatree
✓
Muhammad Ayyoub
✓
Abdullah Basfar
✓
Abdullah Al-Juhani
✓
Maher Al Muaiqly
✓
अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- نَافَقُوا: निफ़ाक़ किया, यानी दिल में कुछ छिपाया और ज़ुबान पर कुछ और लाया।
- ادْفَعُوا: अपनी जान और माल से रक्षा करो, या अपनी तादाद बढ़ाकर दुश्मन को रोको।
- لَوْ نَعْلَمُ قِتَالًا: अगर हमें मालूम होता कि लड़ाई होगी।
- أَقْرَبُ مِنْهُمْ لِلْإِيمَانِ: ईमान की बजाय कुफ़्र के ज़्यादा करीब।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला ने इस आयत में मुनाफ़िक़ों (दिखावटी मुसलमानों) के हालात से पर्दा उठाया है, ताकि मोमिनीन को उनकी हक़ीक़त मालूम हो जाए और उनका निफ़ाक़ सामने आ जाए। यह वही मुनाफ़िक़ थे जो उहुद के मैदान में अब्दुल्लाह बिन उबैय और उसके साथियों की तरह मुसलमानों से अलग हो गए थे। जब मोमिनीन ने उनसे कहा: "आओ, अल्लाह के रास्ते में जिहाद करो, या कम से कम अपनी तादाद बढ़ाकर दुश्मन को रोकने में हमारी मदद करो," तो उन्होंने जवाब दिया: "अगर हमें यक़ीन होता कि लड़ाई होगी, तो हम ज़रूर तुम्हारे साथ होते।" यह उनका बहाना था, क्योंकि वे जानते थे कि लड़ाई होगी, लेकिन डर और बुज़दिली की वजह से वे पीछे हट गए।
अल्लाह तआला ने उनके इस झूठ को बेनक़ाब करते हुए फ़रमाया: "वे उस वक़्त ईमान की निस्बत कुफ़्र के ज़्यादा करीब थे," क्योंकि उनकी ज़ुबान पर ईमान के कलिमे थे, लेकिन उनके दिल कुफ़्र से भरे हुए थे। वे अपने मुँह से वह बातें कहते थे जो उनके दिलों में नहीं होतीं। अल्लाह तआला उन सब राज़ों से ख़ूब वाक़िफ़ है जो वे अपने सीनों में छिपाते हैं, और वह उन्हें उनके किए की सज़ा देकर रहेगा।
दावती पहलू (नसीहत):
यह आयत हमें सिखाती है कि ईमान सिर्फ़ ज़ुबान का दावा नहीं, बल्कि दिल का यक़ीन और अमल का सबूत है। अल्लाह तआला हर उस बात को जानता है जो हम छिपाते हैं, और हमारे दिलों की नीयतों से भी पूरी तरह वाक़िफ़ है। इसलिए हमें चाहिए कि अपने ईमान को सिर्फ़ ज़ुबान तक सीमित न रखें, बल्कि उसे अपने अमल, अपनी क़ुर्बानी और अपने सब्र से साबित करें। जब अल्लाह के रास्ते में मदद की पुकार आए, तो बहाने बनाने के बजाय आगे बढ़ना चाहिए। याद रखें, अल्लाह उन लोगों से मुहब्बत करता है जो सच्चे और मुख़लिस (खरे) होते हैं, और वह मुनाफ़िक़ों के निफ़ाक़ को बेनक़ाब करके उन्हें रुसवा करता है। आइए, हम अपने दिलों को सच्चे ईमान से भरें और अपने अमल को अल्लाह की रज़ा के लिए ख़ालिस करें।
📜 आयत 165-169 — सूरा आल-इमरान
अनुवाद — आल-इमरान 167
सूरा आल-इमरान आयत 167 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और मुनाफ़िक़ों को देख ले (कि कौन है) और मुनाफ़िक़ों…सूरा आयत 167/200 — सूरा आल-इमरान آل عمران (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा आल-इमरान सुनें, सूरा आल-इमरान अनुवाद, सूरा आल-इमरान mp3, सूरा आल-इमरान pdf. आयत 165–169. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा आल-इमरान
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


