अल-अहज़ाब · 10/73
अनुवाद उच्चारण — अल-अहज़ाब
إِذْ جَاءُوكُم مِّن فَوْقِكُمْ وَمِنْ أَسْفَلَ مِنكُمْ وَإِذْ زَاغَتِ الْأَبْصَارُ وَبَلَغَتِ الْقُلُوبُ الْحَنَاجِرَ وَتَظُنُّونَ بِاللَّهِ الظُّنُونَا ۝١٠
Iz jaaa`ookum min fawqikum wa min asfala minkum wa iz zaaghatil absaaru wa balaghatil quloobul hanaajira wa tazunnoona billaahiz zunoonaa
📖 हिंदी अर्थ
जिस वक्त वह लोग तुम पर तुम्हारे ऊपर से आ पड़े और तुम्हारे नीचे की तरफ से भी पिल गए और जिस वक्त (उनकी कसरत से) तुम्हारी ऑंखें ख़ैरा हो गयीं थी और (ख़ौफ से) कलेजे मुँह को आ गए थे और ख़ुदा पर तरह-तरह के (बुरे) ख्याल करने लगे थे।
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • زَاغَتِ الْأَبْصَارُ: आँखें टेढ़ी हो गईं, अर्थात भय और हैरानी से आँखें एक जगह टिक गईं और देखते-देखते रह गईं।
  • بَلَغَتِ الْقُلُوبُ الْحَنَاجِرَ: दिल गले तक आ गए, यानी अत्यधिक भय के कारण दिल धड़कते हुए गले तक पहुँच गए।
  • الظُّنُونَا: तरह-तरह के गुमान और भिन्न-भिन्न धारणाएँ।

तफ़सीर:

यह वह समय था जब अहज़ाब (गठबंधन) के काफ़िरों ने मदीना पर चढ़ाई की थी। वे तुम्हारे पास ऊपर से आए—यानी पूर्व की ओर से वादी के ऊपरी हिस्से से बनी ग़तफ़ान के क़बीले—और नीचे से—यानी पश्चिम की ओर से वादी के निचले हिस्से से क़ुरैश के लोग। इस तरह मुसलमान चारों ओर से घिर गए थे। उस वक्त आँखें भय और हैरानी से एक जगह टिक गईं, दिल डर के मारे गले तक आ गए, और लोग अल्लाह के बारे में तरह-तरह के गुमान करने लगे।

मोमिनीन (सच्चे ईमान वाले) ने अल्लाह पर भरोसा रखते हुए अच्छा गुमान किया कि अल्लाह अपने दीन की मदद करेगा और अपने नबी को विजय देगा। लेकिन मुनाफ़िक़ीन (कपटी) और कमज़ोर ईमान वालों ने बुरे गुमान किए—यहाँ तक कि उन्होंने सोचा कि अल्लाह अपने रसूल और उनके साथियों की मदद नहीं करेगा, और इस्लाम का ख़ात्मा हो जाएगा। यह उनके दिलों की कमज़ोरी और अल्लाह पर भरोसे की कमी का सबूत था।

यह वह मुश्किल घड़ी थी जब ईमान और कुफ़्र की परीक्षा हुई। अल्लाह ने यह दृश्य इसलिए बयान किया ताकि हम सीखें कि मुसीबत के वक्त अल्लाह पर अच्छा गुमान रखना चाहिए, क्योंकि अल्लाह अपने वादे पर कभी ख़िलाफ़ नहीं करता। जो लोग अल्लाह पर भरोसा रखते हैं, अल्लाह उन्हें कभी अकेला नहीं छोड़ता। यह घटना हमें सिखाती है कि सख्त से सख्त हालात में भी अल्लाह की रहमत और मदद का यक़ीन रखना चाहिए—क्योंकि अल्लाह हर मुश्किल के बाद आसानी करता है और अपने सच्चे बंदों की मदद ज़रूर करता है।

🎧 सुनें

📜 आयत 8-12 — अल-अहज़ाब

8لِّيَسْأَلَ الصَّادِقِينَ عَن صِدْقِهِمْ ۚ وَأَعَدَّ لِلْكَافِرِينَ عَذَابًا أَلِيمًا
ताकि (क़यामत के दिन) सच्चों (पैग़म्बरों) से उनकी सच्चाई तबलीग़े रिसालत का हाल दरियाफ्त करें और काफिरों के वास्ते तो उसने दर्दनाक अज़ाब तैयार ही कर रखा है।
9يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا اذْكُرُوا نِعْمَةَ اللَّهِ عَلَيْكُمْ إِذْ جَاءَتْكُمْ جُنُودٌ فَأَرْسَلْنَا عَلَيْهِمْ رِيحًا وَجُنُودًا لَّمْ تَرَوْهَا ۚ وَكَانَ اللَّهُ بِمَا تَعْمَلُونَ بَصِيرًا
(ऐ ईमानदारों खुदा की) उन नेअमतों को याद करो जो उसने तुम पर नाज़िल की हैं (जंगे खन्दक में) जब तुम पर (काफिरों का) लशकर (उमड़ के) आ पड़ा तो (हमने तुम्हारी मदद की) उन पर ऑंधी भेजी और (इसके अलावा फरिश्तों का ऐसा लश्कर भेजा) जिसको तुमने देखा तक नहीं और तुम जो कुछ कर रहे थे खुदा उसे खूब देख रहा था
10إِذْ جَاءُوكُم مِّن فَوْقِكُمْ وَمِنْ أَسْفَلَ مِنكُمْ وَإِذْ زَاغَتِ الْأَبْصَارُ وَبَلَغَتِ الْقُلُوبُ الْحَنَاجِرَ وَتَظُنُّونَ بِاللَّهِ الظُّنُونَا
जिस वक्त वह लोग तुम पर तुम्हारे ऊपर से आ पड़े और तुम्हारे नीचे की तरफ से भी पिल गए और जिस वक्त (उनकी कसरत से) तुम्हारी ऑंखें ख़ैरा हो गयीं थी और (ख़ौफ से) कलेजे मुँह को आ गए थे और ख़ुदा पर तरह-तरह के (बुरे) ख्याल करने लगे थे।
11هُنَالِكَ ابْتُلِيَ الْمُؤْمِنُونَ وَزُلْزِلُوا زِلْزَالًا شَدِيدًا
यहाँ पर मोमिनों का इम्तिहान लिया गया था और ख़ूब अच्छी तरह झिंझोड़े गए थे।
12وَإِذْ يَقُولُ الْمُنَافِقُونَ وَالَّذِينَ فِي قُلُوبِهِم مَّرَضٌ مَّا وَعَدَنَا اللَّهُ وَرَسُولُهُ إِلَّا غُرُورًا
और जिस वक्त मुनाफेक़ीन और वह लोग जिनके दिलों में (कुफ्र का) मरज़ था कहने लगे थे कि खुदा ने और उसके रसूल ने जो हमसे वायदे किए थे वह बस बिल्कुल धोखे की टट्टी था।
अल-अहज़ाबकुरान सूची
73आयत
मदनीRevelation
10आयत

अनुवाद — अल-अहज़ाब 10

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Tuesday, August 18, 2026

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