अल-अहज़ाब · 9/73
अनुवाद उच्चारण — अल-अहज़ाब
يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا اذْكُرُوا نِعْمَةَ اللَّهِ عَلَيْكُمْ إِذْ جَاءَتْكُمْ جُنُودٌ فَأَرْسَلْنَا عَلَيْهِمْ رِيحًا وَجُنُودًا لَّمْ تَرَوْهَا ۚ وَكَانَ اللَّهُ بِمَا تَعْمَلُونَ بَصِيرًا ۝٩
Yaaa aiyuhal lazeena aamanuz kuroo ni`matal laahi `alaikum iz jaaa`atkm junoodun fa arsalnaa `alaihim reehanw wa junoodal lam tarawhaa; wa kaanal laahu bimaa ta`maloona Baseera
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ ईमानदारों खुदा की) उन नेअमतों को याद करो जो उसने तुम पर नाज़िल की हैं (जंगे खन्दक में) जब तुम पर (काफिरों का) लशकर (उमड़ के) आ पड़ा तो (हमने तुम्हारी मदद की) उन पर ऑंधी भेजी और (इसके अलावा फरिश्तों का ऐसा लश्कर भेजा) जिसको तुमने देखा तक नहीं और तुम जो कुछ कर रहे थे खुदा उसे खूब देख रहा था
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • جُنُودٌ – सेनाएँ, यहाँ अर्थ है काफिरों के गठजोड़ (अहज़ाब) जो मदीना पर चढ़ाई करने आए थे।
  • رِيحًا – तेज़ हवा (तूफ़ान), जो अल्लाह की ओर से मदद के तौर पर भेजी गई।
  • جُنُودًا لَّمْ تَرَوْهَا – वे सेनाएँ जिन्हें तुमने नहीं देखा, अर्थात फ़रिश्ते।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ ईमान लाने वालों! अल्लाह की उस महान नेमत (कृपा) को याद करो जो उसने तुम पर की, जब ग़ज़वा-ए-अहज़ाब (खंदक की लड़ाई) के दिन मदीना पर काफिरों की भारी सेनाएँ चारों ओर से चढ़ आईं। यह वह समय था जब मुशरिकीन बाहर से, और यहूदी व मुनाफ़िक़ीन अंदर से मिलकर मुसलमानों को घेरने की कोशिश कर रहे थे। मुसलमानों के लिए हालात बेहद खतरनाक थे, दिल दहल गए थे और हर तरफ से मुसीबतें आ रही थीं।

तब अल्लाह ने अपनी कुदरत से उन काफिरों पर तेज़ हवा (सबा की हवा) भेजी, जिसने उनके ख़ेमे उखाड़ दिए, उनके बर्तन पलट दिए और उनके दिलों में खौफ़ डाल दिया। साथ ही, अल्लाह ने फ़रिश्तों की सेनाएँ भेजीं जिन्हें तुम देख नहीं सकते थे, और उन्होंने काफिरों के दिलों में रुअब (दहशत) डाल दी। नतीजा यह हुआ कि वे बिना कोई नुकसान पहुँचाए भाग खड़े हुए। यह अल्लाह की स्पष्ट मदद थी, जो उसने अपने नबी और मोमिनों को दी।

अल्लाह तुम्हारे सारे कर्मों को देख रहा है—चाहे वह खंदक खोदने की मेहनत हो, जिहाद में सब्र हो, या दिल की नीयत हो। उससे कोई चीज़ छिपी नहीं है, और वही तुम्हें तुम्हारे अच्छे कर्मों का बदला देगा।


दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):

यह आयत हमें सिखाती है कि जब इंसान अल्लाह पर भरोसा करता है और सब्र के साथ मेहनत करता है, तो अल्लाह उसे ऐसे रास्तों से मदद देता है जिनका उसे अंदाज़ा भी नहीं होता। जिस तरह उस दिन तेज़ हवा और अदृश्य फ़रिश्तों ने मुसलमानों की मदद की, उसी तरह आज भी अल्लाह अपने सच्चे बंदों की मदद करता है, चाहे ज़रिए कुछ भी हों। इसलिए हर मुसीबत में अल्लाह का शुक्र अदा करो और उसकी रहमत को याद रखो—क्योंकि अल्लाह हर हाल में तुम्हारे साथ है और तुम्हारे हर अमल से बाख़बर है। यही ईमान की ताक़त है कि बंदा अल्लाह की मदद पर यक़ीन रखे और उसके सामने सिर झुकाए।

🎧 सुनें

📜 आयत 7-11 — अल-अहज़ाब

7وَإِذْ أَخَذْنَا مِنَ النَّبِيِّينَ مِيثَاقَهُمْ وَمِنكَ وَمِن نُّوحٍ وَإِبْرَاهِيمَ وَمُوسَىٰ وَعِيسَى ابْنِ مَرْيَمَ ۖ وَأَخَذْنَا مِنْهُم مِّيثَاقًا غَلِيظًا
और (ऐ रसूल वह वक्त याद करो) जब हमने और पैग़म्बरों से और ख़ास तुमसे और नूह और इबराहीम और मूसा और मरियम के बेटे ईसा से एहदो पैमाने लिया और उन लोगों से हमने सख्त एहद लिया था
8لِّيَسْأَلَ الصَّادِقِينَ عَن صِدْقِهِمْ ۚ وَأَعَدَّ لِلْكَافِرِينَ عَذَابًا أَلِيمًا
ताकि (क़यामत के दिन) सच्चों (पैग़म्बरों) से उनकी सच्चाई तबलीग़े रिसालत का हाल दरियाफ्त करें और काफिरों के वास्ते तो उसने दर्दनाक अज़ाब तैयार ही कर रखा है।
9يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا اذْكُرُوا نِعْمَةَ اللَّهِ عَلَيْكُمْ إِذْ جَاءَتْكُمْ جُنُودٌ فَأَرْسَلْنَا عَلَيْهِمْ رِيحًا وَجُنُودًا لَّمْ تَرَوْهَا ۚ وَكَانَ اللَّهُ بِمَا تَعْمَلُونَ بَصِيرًا
(ऐ ईमानदारों खुदा की) उन नेअमतों को याद करो जो उसने तुम पर नाज़िल की हैं (जंगे खन्दक में) जब तुम पर (काफिरों का) लशकर (उमड़ के) आ पड़ा तो (हमने तुम्हारी मदद की) उन पर ऑंधी भेजी और (इसके अलावा फरिश्तों का ऐसा लश्कर भेजा) जिसको तुमने देखा तक नहीं और तुम जो कुछ कर रहे थे खुदा उसे खूब देख रहा था
10إِذْ جَاءُوكُم مِّن فَوْقِكُمْ وَمِنْ أَسْفَلَ مِنكُمْ وَإِذْ زَاغَتِ الْأَبْصَارُ وَبَلَغَتِ الْقُلُوبُ الْحَنَاجِرَ وَتَظُنُّونَ بِاللَّهِ الظُّنُونَا
जिस वक्त वह लोग तुम पर तुम्हारे ऊपर से आ पड़े और तुम्हारे नीचे की तरफ से भी पिल गए और जिस वक्त (उनकी कसरत से) तुम्हारी ऑंखें ख़ैरा हो गयीं थी और (ख़ौफ से) कलेजे मुँह को आ गए थे और ख़ुदा पर तरह-तरह के (बुरे) ख्याल करने लगे थे।
11هُنَالِكَ ابْتُلِيَ الْمُؤْمِنُونَ وَزُلْزِلُوا زِلْزَالًا شَدِيدًا
यहाँ पर मोमिनों का इम्तिहान लिया गया था और ख़ूब अच्छी तरह झिंझोड़े गए थे।
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अनुवाद — अल-अहज़ाब 9

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Tuesday, August 18, 2026

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