अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- मुस्लिमीन / मुस्लिमात: अल्लाह के आदेशों के सामने आत्मसमर्पण करने वाले पुरुष और स्त्रियाँ।
- मोमिनीन / मोमिनात: सच्चे दिल से ईमान लाने वाले पुरुष और स्त्रियाँ।
- क़ानितीन / क़ानितात: अल्लाह के आज्ञाकारी, उसकी इबादत में लीन रहने वाले पुरुष और स्त्रियाँ।
- ख़ाशि'ईन / ख़ाशि'आत: अल्लाह के भय से दिल में नम्रता और ख़ुशूअत (विनम्रता) रखने वाले पुरुष और स्त्रियाँ।
- हाफ़िज़ीन / हाफ़िज़ात: अपनी शर्मगाहों (गोपनीय अंगों) की रक्षा करने वाले पुरुष और स्त्रियाँ।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह पवित्र आयत मुस्लिम समाज के लिए एक स्वर्णिम संविधान की तरह है, जिसमें अल्लाह तआला ने उन सभी गुणों का वर्णन किया है जो एक सच्चे मोमिन पुरुष और मोमिना स्त्री में होने चाहिए। यह आयत बताती है कि अल्लाह की दृष्टि में पुरुष और स्त्री दोनों बराबर हैं—दोनों को समान रूप से इनाम और अज्र का अधिकार है, बशर्ते वे इन गुणों को अपनाएँ।
अल्लाह तआला फ़रमाता है कि जो पुरुष और स्त्रियाँ इस्लाम लाए (अर्थात अल्लाह के हुक्म के आगे सर झुका दिया), जो ईमान लाए (सच्चे दिल से अल्लाह और उसके रसूल पर यक़ीन किया), जो क़ानित हैं (अल्लाह की इबादत में मशगूल रहते हैं और उसके आदेशों का पालन करते हैं), जो सच्चे हैं (अपने ईमान, वचन और व्यवहार में सच्चाई रखते हैं), जो सब्र करने वाले हैं (तकलीफ़ों, मुसीबतों और गुनाहों से बचने में धैर्य रखते हैं), जो ख़ुशूअत रखते हैं (अल्लाह के भय से उनके दिल नम्र और उनके अंदाज़ विनम्र होते हैं), जो दान देते हैं (फ़र्ज़ ज़कात भी और नफ़्ली सदक़ा भी), जो रोज़े रखते हैं (रमज़ान के फ़र्ज़ रोज़े और नफ़्ली रोज़े भी), जो अपनी शर्मगाहों की रक्षा करते हैं (हराम कामों, ज़िना और उसके मुक़द्दमात से बचते हैं, और अपने जिस्म को नामहरम से छिपाते हैं), और जो अल्लाह को बहुत ज़्यादा याद करते हैं (दिल से और ज़ुबान से, चुपके और खुले तौर पर)—इन सबके लिए अल्लाह ने मग़फ़िरत (गुनाहों की माफ़ी) और बड़ा अज्र (जन्नत) तैयार कर रखा है।
यह आयत हमें सिखाती है कि इस्लाम में स्त्री और पुरुष की कोई ऊँच-नीच नहीं है। अल्लाह के यहाँ वही इज़्ज़त पाता है जो इन गुणों को अपनाता है। यह आयत हर मुसलमान के लिए एक प्रेरणा है कि वह अपनी ज़िंदगी को इन्हीं गुणों से सजाए—इस्लाम, ईमान, इबादत, सच्चाई, सब्र, ख़ुशूअत, दान, रोज़े, पाकदामनी और ज़िक्र—ताकि अल्लाह की रहमत और उसका अज़ीम इनाम उसे हासिल हो। यह वादा अल्लाह का है, और अल्लाह का वादा कभी नहीं टूटता।
📜 आयत 33-37 — अल-अहज़ाब
अनुवाद — अल-अहज़ाब 35
सूरा अल-अहज़ाब आयत 35 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (दिल लगा के सुनो) मुसलमान मर्द और मुसलमान औरतें और…सूरा आयत 35/73 — अल-अहज़ाब الأحزاب (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अहज़ाब सुनें, अल-अहज़ाब अनुवाद, अल-अहज़ाब mp3, अल-अहज़ाब pdf. आयत 33–37. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए








