अल-अहज़ाब · 61/73
अनुवाद उच्चारण — अल-अहज़ाब
مَّلْعُونِينَ ۖ أَيْنَمَا ثُقِفُوا أُخِذُوا وَقُتِّلُوا تَقْتِيلًا ۝٦١
Mal`ooneena ainamaa suqifoo ukhizoo wa quttiloo taqteelaa
📖 हिंदी अर्थ
लानत के मारे जहाँ कहीं हत्थे चढ़े पकड़े गए और फिर बुरी तरह मार डाले गए
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مَلْعُونِينَ: रहमत से निकाले हुए, अभिशप्त।
  • أَيْنَمَا ثُقِفُوا: जहाँ कहीं भी पाए जाएँ।
  • أُخِذُوا: पकड़ लिए जाएँ।
  • وَقُتِّلُوا تَقْتِيلًا: और बुरी तरह मार डाले जाएँ (लगातार और बड़े पैमाने पर कत्ल किए जाएँ)।

तफसीर:

अल्लाह तआला इस आयत में उन मुनाफ़िक़ों (दिखावटी मुसलमानों) के बारे में बता रहे हैं जो दिल में कुफ़्र छिपाए हुए हैं और ज़ुबान पर ईमान का दावा करते हैं, और उन लोगों के बारे में भी जिनके दिलों में शक और बीमारी है, और वे लोग जो मदीना में झूठी अफ़वाहें फैलाते हैं और मुसलमानों के बीच फ़साद पैदा करते हैं। अल्लाह फ़रमाता है कि ये लोग "मलऊनीन" हैं, यानी अल्लाह की रहमत से मरदूद और फिटकारे हुए हैं।

इनका हाल यह है कि जहाँ कहीं भी ये पाए जाएँ, उन्हें पकड़ा जाएगा और बुरी तरह क़त्ल किया जाएगा। यह उनकी सज़ा है उनके निफ़ाक़ (दोहरेपन), झूठी अफ़वाहों और मुसलमानों के बीच फ़साद फैलाने की वजह से। यह अल्लाह का क़ानून है कि जो लोग अल्लाह और उसके रसूल ﷺ के खिलाफ़ साज़िशें करते हैं और ईमान वालों के बीच बुराई फैलाते हैं, उनके लिए दुनिया में ज़िल्लत और आख़िरत में अज़ाब है।

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह का दीन बहुत पाक और साफ़ दीन है। अल्लाह उन लोगों को कभी बर्दाश्त नहीं करता जो दिल में कुफ़्र रखते हैं और ज़ुबान से ईमान का दावा करते हैं, और जो मुसलमानों के बीच फ़साद और बुराई फैलाते हैं। यह हमारे लिए एक बड़ी नसीहत है कि हम अपने दिलों को साफ़ रखें, अपनी ज़ुबान को सच्चा रखें, और कभी भी झूठ, धोखा, या अफ़वाहों से मुसलमानों के बीच फ़साद न फैलाएँ।

इस आयत से हमें यह भी पता चलता है कि अल्लाह अपने नबी ﷺ और ईमान वालों की हिफ़ाज़त करता है और उनके दुश्मनों को ज़रूर ज़लील करता है। जो लोग अल्लाह और उसके रसूल ﷺ के खिलाफ़ बुराई की साज़िश करते हैं, उनका अंजाम बहुत बुरा होता है। यह हमारे लिए तसल्ली की बात है कि अल्लाह हमेशा सच्चे मोमिनों के साथ है, और सच्चाई और ईमान की ही हमेशा बलंदी होती है।

आओ, हम सब अपने दिलों को निफ़ाक़ से पाक रखें, सच्चाई और ईमान पर साबित क़दम रहें, और अल्लाह से दुआ करें कि वह हमें मुनाफ़िक़ों के रास्ते से बचाए और हमें सच्चे मोमिनों में शामिल करे। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 59-63 — अल-अहज़ाब

59يَا أَيُّهَا النَّبِيُّ قُل لِّأَزْوَاجِكَ وَبَنَاتِكَ وَنِسَاءِ الْمُؤْمِنِينَ يُدْنِينَ عَلَيْهِنَّ مِن جَلَابِيبِهِنَّ ۚ ذَٰلِكَ أَدْنَىٰ أَن يُعْرَفْنَ فَلَا يُؤْذَيْنَ ۗ وَكَانَ اللَّهُ غَفُورًا رَّحِيمًا
ऐ नबी अपनी बीवियों और अपनी लड़कियों और मोमिनीन की औरतों से कह दो कि (बाहर निकलते वक्त) अपने (चेहरों और गर्दनों) पर अपनी चादरों का घूंघट लटका लिया करें ये उनकी (शराफ़त की) पहचान के वास्ते बहुत मुनासिब है तो उन्हें कोई छेड़ेगा नहीं और खुदा तो बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
60۞ لَّئِن لَّمْ يَنتَهِ الْمُنَافِقُونَ وَالَّذِينَ فِي قُلُوبِهِم مَّرَضٌ وَالْمُرْجِفُونَ فِي الْمَدِينَةِ لَنُغْرِيَنَّكَ بِهِمْ ثُمَّ لَا يُجَاوِرُونَكَ فِيهَا إِلَّا قَلِيلًا
ऐ रसूल मुनाफेक़ीन और वह लोग जिनके दिलों में (कुफ़्र का) मर्ज़ है और जो लोग मदीने में बुरी ख़बरें उड़ाया करते हैं- अगर ये लोग (अपनी शरारतों से) बाज़ न आएंगें तो हम तुम ही को (एक न एक दिन) उन पर मुसल्लत कर देगें फिर वह तुम्हारे पड़ोस में चन्द रोज़ों के सिवा ठहरने (ही) न पाएँगे
61مَّلْعُونِينَ ۖ أَيْنَمَا ثُقِفُوا أُخِذُوا وَقُتِّلُوا تَقْتِيلًا
लानत के मारे जहाँ कहीं हत्थे चढ़े पकड़े गए और फिर बुरी तरह मार डाले गए
62سُنَّةَ اللَّهِ فِي الَّذِينَ خَلَوْا مِن قَبْلُ ۖ وَلَن تَجِدَ لِسُنَّةِ اللَّهِ تَبْدِيلًا
जो लोग पहले गुज़र गए उनके बारे में (भी) खुदा की (यही) आदत (जारी) रही और तुम खुदा की आदत में हरगिज़ तग़य्युर तबद्दुल न पाओगे
63يَسْأَلُكَ النَّاسُ عَنِ السَّاعَةِ ۖ قُلْ إِنَّمَا عِلْمُهَا عِندَ اللَّهِ ۚ وَمَا يُدْرِيكَ لَعَلَّ السَّاعَةَ تَكُونُ قَرِيبًا
(ऐ रसूल) लोग तुमसे क़यामत के बारे में पूछा करते हैं (तुम उनसे) कह दो कि उसका इल्म तो बस खुदा को है और तुम क्या जानो शायद क़यामत क़रीब ही हो
अल-अहज़ाबकुरान सूची
73आयत
मदनीRevelation
61आयत

अनुवाद — अल-अहज़ाब 61

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Tuesday, August 18, 2026

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