अल-अहज़ाब · 62/73
अनुवाद उच्चारण — अल-अहज़ाब
سُنَّةَ اللَّهِ فِي الَّذِينَ خَلَوْا مِن قَبْلُ ۖ وَلَن تَجِدَ لِسُنَّةِ اللَّهِ تَبْدِيلًا ۝٦٢
Sunnatal laahi fil lazeena khalaw min qablu wa lan tajida lisunnatil laahi tabdeelaa
📖 हिंदी अर्थ
जो लोग पहले गुज़र गए उनके बारे में (भी) खुदा की (यही) आदत (जारी) रही और तुम खुदा की आदत में हरगिज़ तग़य्युर तबद्दुल न पाओगे

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • سُنَّةَ اللَّهِ: अल्लाह की सुन्नत (रीति/क़ानून)।
  • خَلَوْا مِن قَبْلُ: जो पहले गुज़र चुके हैं (पिछली उम्मतें)।
  • تَبْدِيلًا: बदलना, परिवर्तन करना।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत अल्लाह तआला के उस अटल और अपरिवर्तनीय क़ानून (सुन्नत) को बयान करती है जो पिछली उम्मतों में मुनाफ़िक़ों (दिखावटी मुसलमानों) के साथ लागू होता रहा है। अल्लाह का यह नियम है कि जो लोग दिल में कुफ़्र छिपाए रखते हैं और ज़ुबान से ईमान का दावा करते हैं, उनका अंजाम हमेशा यही रहा है कि वे जहाँ भी हों, उन्हें पकड़ा गया, उनकी साज़िशें नाकाम हुईं और उन्हें ज़लील व रुसवा किया गया। यह अल्लाह की उसी सुन्नत का हिस्सा है जो पहले के मुनाफ़िक़ों (जैसे मूसा अलैहिस्सलाम की उम्मत में) पर लागू हुई।

अल्लाह तआला फ़रमाता है कि ऐ नबी! आप इस सुन्नत में कभी कोई बदलाव या परिवर्तन नहीं पाएँगे। यानी अल्लाह का यह क़ानून हर ज़माने और हर जगह एक जैसा है — मुनाफ़िक़ों का अंजाम बुराई ही होता है, चाहे वे कितनी भी चालाकियाँ क्यों न करें। यह बात मुनाफ़िक़ों के लिए एक सख़्त चेतावनी है और मोमिनों के लिए एक तसल्ली कि अल्लाह का वादा सच्चा है, वह अपने नबी और अपने दीन की मदद ज़रूर करेगा।

दावती पहलू:

इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि अल्लाह के क़ानून कभी नहीं बदलते। जिस तरह पिछली उम्मतों में सच्चे ईमान वालों को कामयाबी मिली और मुनाफ़िक़ों को रुसवाई, उसी तरह आज भी जो लोग सच्चे दिल से अल्लाह और उसके रसूल पर ईमान लाएँगे और नेक अमल करेंगे, उन्हें इज़्ज़त और कामयाबी मिलेगी। और जो लोग दिखावे के लिए ईमान का दावा करेंगे, उनका अंजाम रुसवाई के सिवा कुछ नहीं। यह अल्लाह का अपरिवर्तनीय नियम है। इसलिए हमें चाहिए कि अपने दिलों को सच्चे ईमान से भरें, अपने अमल को नेक बनाएँ और कभी भी मुनाफ़िक़ों के रास्ते पर न चलें। अल्लाह की मदद हमेशा सच्चे और मुख़लिस (सच्चे इरादे वाले) बंदों के साथ होती है।



📜 आयत 60-64 — अल-अहज़ाब

60۞ لَّئِن لَّمْ يَنتَهِ الْمُنَافِقُونَ وَالَّذِينَ فِي قُلُوبِهِم مَّرَضٌ وَالْمُرْجِفُونَ فِي الْمَدِينَةِ لَنُغْرِيَنَّكَ بِهِمْ ثُمَّ لَا يُجَاوِرُونَكَ فِيهَا إِلَّا قَلِيلًا
ऐ रसूल मुनाफेक़ीन और वह लोग जिनके दिलों में (कुफ़्र का) मर्ज़ है और जो लोग मदीने में बुरी ख़बरें उड़ाया करते हैं- अगर ये लोग (अपनी शरारतों से) बाज़ न आएंगें तो हम तुम ही को (एक न एक दिन) उन पर मुसल्लत कर देगें फिर वह तुम्हारे पड़ोस में चन्द रोज़ों के सिवा ठहरने (ही) न पाएँगे
61مَّلْعُونِينَ ۖ أَيْنَمَا ثُقِفُوا أُخِذُوا وَقُتِّلُوا تَقْتِيلًا
लानत के मारे जहाँ कहीं हत्थे चढ़े पकड़े गए और फिर बुरी तरह मार डाले गए
62سُنَّةَ اللَّهِ فِي الَّذِينَ خَلَوْا مِن قَبْلُ ۖ وَلَن تَجِدَ لِسُنَّةِ اللَّهِ تَبْدِيلًا
जो लोग पहले गुज़र गए उनके बारे में (भी) खुदा की (यही) आदत (जारी) रही और तुम खुदा की आदत में हरगिज़ तग़य्युर तबद्दुल न पाओगे
63يَسْأَلُكَ النَّاسُ عَنِ السَّاعَةِ ۖ قُلْ إِنَّمَا عِلْمُهَا عِندَ اللَّهِ ۚ وَمَا يُدْرِيكَ لَعَلَّ السَّاعَةَ تَكُونُ قَرِيبًا
(ऐ रसूल) लोग तुमसे क़यामत के बारे में पूछा करते हैं (तुम उनसे) कह दो कि उसका इल्म तो बस खुदा को है और तुम क्या जानो शायद क़यामत क़रीब ही हो
64إِنَّ اللَّهَ لَعَنَ الْكَافِرِينَ وَأَعَدَّ لَهُمْ سَعِيرًا
ख़ुदा ने क़ाफिरों पर यक़ीनन लानत की है और उनके लिए जहन्नुम को तैयार कर रखा है
अल-अहज़ाबकुरान सूची
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62आयत

अनुवाद — अल-अहज़ाब 62

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Tuesday, August 18, 2026

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