अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- سُنَّةَ اللَّهِ: अल्लाह की सुन्नत (रीति/क़ानून)।
- خَلَوْا مِن قَبْلُ: जो पहले गुज़र चुके हैं (पिछली उम्मतें)।
- تَبْدِيلًا: बदलना, परिवर्तन करना।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत अल्लाह तआला के उस अटल और अपरिवर्तनीय क़ानून (सुन्नत) को बयान करती है जो पिछली उम्मतों में मुनाफ़िक़ों (दिखावटी मुसलमानों) के साथ लागू होता रहा है। अल्लाह का यह नियम है कि जो लोग दिल में कुफ़्र छिपाए रखते हैं और ज़ुबान से ईमान का दावा करते हैं, उनका अंजाम हमेशा यही रहा है कि वे जहाँ भी हों, उन्हें पकड़ा गया, उनकी साज़िशें नाकाम हुईं और उन्हें ज़लील व रुसवा किया गया। यह अल्लाह की उसी सुन्नत का हिस्सा है जो पहले के मुनाफ़िक़ों (जैसे मूसा अलैहिस्सलाम की उम्मत में) पर लागू हुई।
अल्लाह तआला फ़रमाता है कि ऐ नबी! आप इस सुन्नत में कभी कोई बदलाव या परिवर्तन नहीं पाएँगे। यानी अल्लाह का यह क़ानून हर ज़माने और हर जगह एक जैसा है — मुनाफ़िक़ों का अंजाम बुराई ही होता है, चाहे वे कितनी भी चालाकियाँ क्यों न करें। यह बात मुनाफ़िक़ों के लिए एक सख़्त चेतावनी है और मोमिनों के लिए एक तसल्ली कि अल्लाह का वादा सच्चा है, वह अपने नबी और अपने दीन की मदद ज़रूर करेगा।
दावती पहलू:
इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि अल्लाह के क़ानून कभी नहीं बदलते। जिस तरह पिछली उम्मतों में सच्चे ईमान वालों को कामयाबी मिली और मुनाफ़िक़ों को रुसवाई, उसी तरह आज भी जो लोग सच्चे दिल से अल्लाह और उसके रसूल पर ईमान लाएँगे और नेक अमल करेंगे, उन्हें इज़्ज़त और कामयाबी मिलेगी। और जो लोग दिखावे के लिए ईमान का दावा करेंगे, उनका अंजाम रुसवाई के सिवा कुछ नहीं। यह अल्लाह का अपरिवर्तनीय नियम है। इसलिए हमें चाहिए कि अपने दिलों को सच्चे ईमान से भरें, अपने अमल को नेक बनाएँ और कभी भी मुनाफ़िक़ों के रास्ते पर न चलें। अल्लाह की मदद हमेशा सच्चे और मुख़लिस (सच्चे इरादे वाले) बंदों के साथ होती है।
📜 आयत 60-64 — अल-अहज़ाब
अनुवाद — अल-अहज़ाब 62
सूरा अल-अहज़ाब आयत 62 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : जो लोग पहले गुज़र गए उनके बारे में (भी) खुदा…सूरा आयत 62/73 — अल-अहज़ाब الأحزاب (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अहज़ाब सुनें, अल-अहज़ाब अनुवाद, अल-अहज़ाब mp3, अल-अहज़ाब pdf. आयत 60–64. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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