अल-अहज़ाब · 73/73
अनुवाद उच्चारण — अल-अहज़ाब
لِّيُعَذِّبَ اللَّهُ الْمُنَافِقِينَ وَالْمُنَافِقَاتِ وَالْمُشْرِكِينَ وَالْمُشْرِكَاتِ وَيَتُوبَ اللَّهُ عَلَى الْمُؤْمِنِينَ وَالْمُؤْمِنَاتِ ۗ وَكَانَ اللَّهُ غَفُورًا رَّحِيمًا ۝٧٣
Liyu `azzibal laahul munaafiqeena wal munaafiqaati walmushrikeena wal mushrikaati wa yatoobal laahu `alal mu`mineena walmu`minaat; wa kaanal laahu Ghafoorar Raheema
📖 हिंदी अर्थ
इसका नतीजा यह हुआ कि खुदा मुनाफिक़ मर्दों और मुनाफिक़ औरतों और मुशरिक मर्दों और मुशरिक औरतों को (उनके किए की) सज़ा देगा और ईमानदार मर्दों और ईमानदार औरतों की (तक़सीर अमानत की) तौबा क़ुबूल फरमाएगा और खुदा तो बड़ा बख़शने वाला मेहरबान है
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • मुनाफ़िक़ीन (मुनाफ़िक़ पुरुष): वे लोग जो ज़ुबान से ईमान का इज़हार करते हैं लेकिन दिल में कुफ़्र छिपाए होते हैं।
  • मुनाफ़िक़ात (मुनाफ़िक़ औरतें): वही सिफ़त रखने वाली औरतें।
  • मुशरिकीन (मुशरिक पुरुष): वे लोग जो अल्लाह के साथ किसी और की इबादत करते हैं।
  • मुशरिकात (मुशरिक औरतें): वही हालत रखने वाली औरतें।
  • यतूबा (तौबा करना): रहमत और माफ़ी की नज़र से देखना, गुनाह माफ़ कर देना।
  • ग़फ़ूर (बहुत माफ़ करने वाला): अल्लाह का वह गुण जिसमें वह अपने बंदों के गुनाहों को ढक लेता है और माफ़ कर देता है।
  • रहीम (बहुत रहम करने वाला): अल्लाह का वह गुण जिसमें वह अपने बंदों पर असीम दया और करुणा बरसाता है।

तफ़सीर:

इस आयत में अल्लाह तआला ने उस अमानत (ईमान, इस्लाम और शरीयत की ज़िम्मेदारी) के हिकमत (कारण) को बयान किया है जो इंसान को सौंपी गई। यह अमानत इसलिए दी गई ताकि अल्लाह उन लोगों को अज़ाब (सज़ा) दे जिन्होंने इस अमानत के साथ ख़ियानत की—यानी मुनाफ़िक़ीन और मुनाफ़िक़ात जिन्होंने ज़ुबान से ईमान कहा लेकिन दिल में कुफ़्र छिपाए रखा, और मुशरिकीन व मुशरिकात जिन्होंने अल्लाह के साथ दूसरों की इबादत की। ये सब लोग अपने नफ़ाक़ (दो-मुँहापन) और शिर्क (अल्लाह के साथ साझीदार ठहराने) की वजह से अल्लाह के अज़ाब के हक़दार हैं।

दूसरी तरफ़, अल्लाह तआला ने उन मोमिनीन और मोमिनात (ईमान वाले पुरुषों और औरतों) का ज़िक्र किया है जिन्होंने इस अमानत को अच्छी तरह निभाया, ईमान पर क़ायम रहे, अल्लाह के अहकाम पर अमल किया और अपनी कमज़ोरियों पर नदामत (पछतावा) के साथ तौबा की। अल्लाह ने उन पर अपनी रहमत की नज़र फरमाई, उनके गुनाह माफ़ किए और उन्हें अपनी पनाह में ले लिया।

आयत के आख़िर में अल्लाह तआला अपनी दो खूबसूरत सिफ़तों का ज़िक्र करता है—ग़फ़ूर (बहुत माफ़ करने वाला) और रहीम (बहुत रहम करने वाला)। यानी अल्लाह अपने उन बंदों के लिए बेहद माफ़ करने वाला और रहम करने वाला है जो अपनी ग़लतियों से तौबा करके उसकी तरफ़ रुजू करते हैं। यह अल्लाह का वादा है कि वह तौबा करने वालों के गुनाहों को माफ़ कर देता है और उन पर रहम फरमाता है।

दावती पहलू:

यह आयत हमें दो रास्ते दिखाती है—एक रास्ता मुनाफ़िक़ीन और मुशरिकीन का है जो अमानत में ख़ियानत करते हैं और अल्लाह के अज़ाब के हक़दार बनते हैं, और दूसरा रास्ता मोमिनीन का है जो अमानत को निभाते हैं और अल्लाह की रहमत और माफ़ी के हक़दार बनते हैं। यह हमारे लिए एक बड़ी नसीहत है कि हम अपने ईमान में सच्चे रहें, अपने दिल को नफ़ाक़ और शिर्क से पाक रखें, और अल्लाह की दी हुई अमानत—यानी ईमान, इबादत और अच्छे अख़लाक़—को पूरी वफ़ादारी से निभाएँ। अल्लाह तआला बेहद मेहरबान है, वह चाहता है कि उसके बंदे उसकी तरफ़ रुजू करें, तौबा करें और उसकी रहमत की पनाह में आ जाएँ। जो भी सच्चे दिल से तौबा करेगा, अल्लाह उसे माफ़ कर देगा और उस पर रहम फरमाएगा। यह अल्लाह का वादा है जो कभी टूटता नहीं।

🎧 सुनें

📜 आयत 71-73 — अल-अहज़ाब

71يُصْلِحْ لَكُمْ أَعْمَالَكُمْ وَيَغْفِرْ لَكُمْ ذُنُوبَكُمْ ۗ وَمَن يُطِعِ اللَّهَ وَرَسُولَهُ فَقَدْ فَازَ فَوْزًا عَظِيمًا
तो खुदा तुम्हारी कारगुज़ारियों को दुरूस्त कर देगा और तुम्हारे गुनाह बख्श देगा और जिस शख्स ने खुदा और उसके रसूल की इताअत की वह तो अपनी मुराद को खूब अच्छी तरह पहुँच गया
72إِنَّا عَرَضْنَا الْأَمَانَةَ عَلَى السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ وَالْجِبَالِ فَأَبَيْنَ أَن يَحْمِلْنَهَا وَأَشْفَقْنَ مِنْهَا وَحَمَلَهَا الْإِنسَانُ ۖ إِنَّهُ كَانَ ظَلُومًا جَهُولًا
बेशक हमने (रोज़े अज़ल) अपनी अमानत (इताअत इबादत) को सारे आसमान और ज़मीन पहाड़ों के सामने पेश किया तो उन्होंने उसके (बार) उठाने से इन्कार किया और उससे डर गए और आदमी ने उसे (बे ताम्मुल) उठा लिया बेशक इन्सान (अपने हक़ में) बड़ा ज़ालिम (और) नादान है
73لِّيُعَذِّبَ اللَّهُ الْمُنَافِقِينَ وَالْمُنَافِقَاتِ وَالْمُشْرِكِينَ وَالْمُشْرِكَاتِ وَيَتُوبَ اللَّهُ عَلَى الْمُؤْمِنِينَ وَالْمُؤْمِنَاتِ ۗ وَكَانَ اللَّهُ غَفُورًا رَّحِيمًا
इसका नतीजा यह हुआ कि खुदा मुनाफिक़ मर्दों और मुनाफिक़ औरतों और मुशरिक मर्दों और मुशरिक औरतों को (उनके किए की) सज़ा देगा और ईमानदार मर्दों और ईमानदार औरतों की (तक़सीर अमानत की) तौबा क़ुबूल फरमाएगा और खुदा तो बड़ा बख़शने वाला मेहरबान है
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अनुवाद — अल-अहज़ाब 73

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Tuesday, August 18, 2026

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