अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- ख़लीफ़ा: अर्थात शासक, अधिकारी, और धरती पर अल्लाह की ओर से प्रतिनिधि।
- हक़: न्याय, सच्चाई, और इंसाफ़।
- हवा: मन की इच्छाएँ, नफ़्स की ख्वाहिशें, और ग़लत रुझान।
- सबील अल्लाह: अल्लाह का रास्ता, यानी उसका दीन और शरीयत।
- यौमुल हिसाब: क़ियामत का दिन, जब हर इंसान से उसके अमलों का हिसाब लिया जाएगा।
तफ़सीर:
ऐ दाऊद (अलैहिस्सलाम)! हमने तुम्हें धरती पर ख़लीफ़ा (शासक और प्रतिनिधि) बनाया है, और तुम्हें अधिकार और ताक़त दी है। यह एक बड़ी ज़िम्मेदारी है, जिसे निभाना तुम्हारा फ़र्ज़ है। इसलिए लोगों के बीच हमेशा हक़ और इंसाफ़ के साथ फ़ैसले करो। कभी भी अपनी नफ़्स की ख्वाहिशों और व्यक्तिगत रुझानों की पैरवी मत करो, क्योंकि हवा-ओ-हवस (मन की इच्छाएँ) इंसान को अल्लाह के सीधे रास्ते से भटका देती हैं। जो लोग अल्लाह के रास्ते से भटक जाते हैं, उनके लिए बहुत सख्त अज़ाब है, क्योंकि उन्होंने क़ियामत के दिन और उसके हिसाब को भुला दिया था। अगर उन्हें उस दिन का यक़ीन और डर होता, तो वे कभी भी अपनी इच्छाओं के पीछे नहीं भागते और न ही अल्लाह के हुक्म से मुँह मोड़ते।
यह आयत सिर्फ़ हज़रत दाऊद (अलैहिस्सलाम) के लिए नहीं, बल्कि हर उस शख्स के लिए एक नसीहत है जिसे अल्लाह ने कोई ज़िम्मेदारी दी है—चाहे वह हुकूमत हो, क़ाज़ी का ओहदा हो, या कोई और अधिकार। हर हाकिम और हर ज़िम्मेदार को चाहिए कि वह अल्लाह की नाज़िल की हुई शरीयत के मुताबिक़ फ़ैसले करे, और किसी की परवाह या दुश्मनी उसे हक़ से न हटाए। याद रखो, जो इंसाफ़ से फ़ैसला करता है, अल्लाह उसके साथ होता है और उसे दुनिया और आख़िरत दोनों में इज़्ज़त देता है।
इस आयत में एक बहुत बड़ी नसीहत है कि इंसान को अपनी ख्वाहिशों पर क़ाबू रखना चाहिए। हवा-ओ-हवस की पैरवी इंसान को अंधा कर देती है, और वह हक़ और बातिल में फ़र्क़ नहीं कर पाता। अल्लाह तआला ने हमें अक़्ल दी है, क़ुरआन दिया है, और रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की सुन्नत दी है—ये सब हमारे लिए रहनुमा हैं। अगर हम इन पर चलें, तो कभी गुमराह नहीं होंगे। और जो लोग इन्हें छोड़कर अपनी इच्छाओं के पीछे चलते हैं, वे दुनिया में भी परेशान रहते हैं और आख़िरत में भी सख्त अज़ाब का सामना करेंगे।
इसलिए ऐ मुसलमान! अपने हर काम में अल्लाह की रज़ा को सामने रखो। इंसाफ़ को अपना शिआर बनाओ, चाहे मामला अपने ख़िलाफ़ ही क्यों न हो। अल्लाह तआला उन लोगों से मुहब्बत करता है जो इंसाफ़ करते हैं। और याद रखो, क़ियामत का दिन ज़रूर आएगा, उस दिन हर इंसान से उसके अमलों का हिसाब लिया जाएगा। जो लोग उस दिन को भूल गए, वे आज अपनी ख्वाहिशों के ग़ुलाम बने हुए हैं, और जो उस दिन को याद रखते हैं, वे हर काम में अल्लाह की रज़ा को तरजीह देते हैं। अल्लाह हम सबको हक़ पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 24-28 — साद
अनुवाद — साद 26
सूरा साद आयत 26 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (हमने फरमाया) ऐ दाऊद हमने तुमको ज़मीन में (अपना) नाएब…सूरा आयत 26/88 — साद ص (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: साद सुनें, साद अनुवाद, साद mp3, साद pdf. आयत 24–28. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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