साद · 27/88
अनुवाद उच्चारण — सूरा साद
وَمَا خَلَقْنَا السَّمَاءَ وَالْأَرْضَ وَمَا بَيْنَهُمَا بَاطِلًا ۚ ذَٰلِكَ ظَنُّ الَّذِينَ كَفَرُوا ۚ فَوَيْلٌ لِّلَّذِينَ كَفَرُوا مِنَ النَّارِ ۝٢٧
Wa ma khalaqnas samaaa`a wal arda wa maa bainahumaa baatilaa; zaalika zannul lazeena kafaroo; fawi lul lillazeena kafaroo minan Naar
📖 हिंदी अर्थ
और हमने आसमान और ज़मीन और जो चीज़ें उन दोनों के दरमियान हैं बेकार नहीं पैदा किया ये उन लोगों का ख्याल है जो काफ़िर हो बैठे तो जो लोग दोज़ख़ के मुनकिर हैं उन पर अफ़सोस है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
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A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
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A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • بَاطِلًا (बातिलन): व्यर्थ, बिना किसी उद्देश्य के, खेल-तमाशे के रूप में।
  • ظَنُّ (ज़न्नु): गुमान, धारणा, विचार।
  • وَيْلٌ (वैलुन): विनाश, बड़ी आफत, अफसोस और पछतावा।

तफसीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने इस आयत में अपनी कुदरत की महान निशानियों की ओर इशारा करते हुए फरमाया कि हमने आसमान, ज़मीन और इन दोनों के बीच की सारी चीज़ों को बेकार और व्यर्थ नहीं बनाया। यह पूरी कायनात एक गहरे हिकमत (बुद्धिमत्ता) और मक़सद के साथ पैदा की गई है। हर चीज़ अपनी जगह पर एक खास निज़ाम के तहत काम कर रही है, और यह सब कुछ अल्लाह की तौहीद, उसकी कुदरत और उसके इल्म की गवाही दे रहा है।

यह सृष्टि कोई खेल-तमाशा नहीं है, बल्कि इसका एक बड़ा मक़सद है — अल्लाह की इबादत, उसका हुक्म मानना और उसकी राह पर चलना। यह दुनिया एक इम्तिहान की जगह है, और इसके बाद एक और ज़िंदगी आने वाली है जहाँ हर अच्छे और बुरे काम का हिसाब होगा। जो लोग यह समझते हैं कि यह सब कुछ यूँ ही बन गया और कोई हिसाब-किताब नहीं होगा, वह अल्लाह के बारे में बुरा गुमान रखते हैं। यही गुमान काफिरों का है, जिन्होंने आख़िरत, जन्नत और जहन्नम को नकार दिया।

अल्लाह तआला फरमाता है कि ऐसे लोगों के लिए जो इस बात को नहीं मानते कि यह कायनात एक हिकमत के साथ बनाई गई है और जो मरने के बाद दोबारा उठाए जाने और हिसाब को झुठलाते हैं, उनके लिए जहन्नम की आग से बड़ी तबाही और विनाश है। वह आग उनका ठिकाना होगी, क्योंकि उन्होंने अल्लाह के साथ कुफ्र किया और उसकी निशानियों को नकारा।

यह आयत हमें सिखाती है कि इस दुनिया की हर चीज़ बेकार नहीं है, बल्कि हर चीज़ में अल्लाह की हिकमत छिपी है। जो लोग इस सच्चाई को समझते हैं, वह अल्लाह के करीब होते हैं और उसकी इबादत में मशगूल रहते हैं। और जो लोग इस सच्चाई से आँखें बंद कर लेते हैं, उनका अंजाम बहुत बुरा होगा। अल्लाह तआला हम सबको सीधी राह पर चलने की तौफीक़ दे और हमें उन लोगों में से न बनाए जो उसकी निशानियों से ग़ाफिल हैं। आमीन।



📜 आयत 25-29 — सूरा साद

25فَغَفَرْنَا لَهُ ذَٰلِكَ ۖ وَإِنَّ لَهُ عِندَنَا لَزُلْفَىٰ وَحُسْنَ مَآبٍ
तो हमने उनकी वह ग़लती माफ कर दी और इसमें शक नहीं कि हमारी बारगाह में उनका तक़र्रुब और अन्जाम अच्छा हुआ
26يَا دَاوُودُ إِنَّا جَعَلْنَاكَ خَلِيفَةً فِي الْأَرْضِ فَاحْكُم بَيْنَ النَّاسِ بِالْحَقِّ وَلَا تَتَّبِعِ الْهَوَىٰ فَيُضِلَّكَ عَن سَبِيلِ اللَّهِ ۚ إِنَّ الَّذِينَ يَضِلُّونَ عَن سَبِيلِ اللَّهِ لَهُمْ عَذَابٌ شَدِيدٌ بِمَا نَسُوا يَوْمَ الْحِسَابِ
(हमने फरमाया) ऐ दाऊद हमने तुमको ज़मीन में (अपना) नाएब क़रार दिया तो तुम लोगों के दरमियान बिल्कुल ठीक फैसला किया करो और नफ़सियानी ख्वाहिश की पैरवी न करो बसा ये पीरों तुम्हें ख़ुदा की राह से बहका देगी इसमें शक नहीं कि जो लोग खुदा की राह में भटकते हैं उनकी बड़ी सख्त सज़ा होगी क्योंकि उन लोगों ने हिसाब के दिन (क़यामत) को भुला दिया
27وَمَا خَلَقْنَا السَّمَاءَ وَالْأَرْضَ وَمَا بَيْنَهُمَا بَاطِلًا ۚ ذَٰلِكَ ظَنُّ الَّذِينَ كَفَرُوا ۚ فَوَيْلٌ لِّلَّذِينَ كَفَرُوا مِنَ النَّارِ
और हमने आसमान और ज़मीन और जो चीज़ें उन दोनों के दरमियान हैं बेकार नहीं पैदा किया ये उन लोगों का ख्याल है जो काफ़िर हो बैठे तो जो लोग दोज़ख़ के मुनकिर हैं उन पर अफ़सोस है
28أَمْ نَجْعَلُ الَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ كَالْمُفْسِدِينَ فِي الْأَرْضِ أَمْ نَجْعَلُ الْمُتَّقِينَ كَالْفُجَّارِ
क्या जिन लोगों ने ईमान कुबूल किया और अच्छे-अच्छे काम किए उनको हम (उन लोगों के बराबर) कर दें जो रूए ज़मीन में फसाद फैलाया करते हैं या हम परहेज़गारों को मिसल बदकारों के बना दें
29كِتَابٌ أَنزَلْنَاهُ إِلَيْكَ مُبَارَكٌ لِّيَدَّبَّرُوا آيَاتِهِ وَلِيَتَذَكَّرَ أُولُو الْأَلْبَابِ
(ऐ रसूल) किताब (कुरान) जो हमने तुम्हारे पास नाज़िल की है (बड़ी) बरकत वाली है ताकि लोग इसकी आयतों में ग़ौर करें और ताकि अक्ल वाले नसीहत हासिल करें
सादकुरान सूची
88आयत
मक्कीअवतरण स्थान
27आयत

अनुवाद — साद 27

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Friday, October 2, 2026

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