साद · 29/88
अनुवाद उच्चारण — सूरा साद
كِتَابٌ أَنزَلْنَاهُ إِلَيْكَ مُبَارَكٌ لِّيَدَّبَّرُوا آيَاتِهِ وَلِيَتَذَكَّرَ أُولُو الْأَلْبَابِ ۝٢٩
Kitaabun anzalnaahu ilaika mubaarakul liyaddabbarooo Aayaatihee wa liyatazakkara ulul albaab
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल) किताब (कुरान) जो हमने तुम्हारे पास नाज़िल की है (बड़ी) बरकत वाली है ताकि लोग इसकी आयतों में ग़ौर करें और ताकि अक्ल वाले नसीहत हासिल करें

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • مُبَارَكٌ (बरकत वाला): अर्थात यह किताब अपने आप में बहुत अधिक भलाई, बरकत और नेकी का खज़ाना रखती है।
  • لِيَدَّبَّرُوا (ताकि वे ग़ौर-ओ-फ़िक्र करें): अर्थात इसकी आयतों पर ध्यान से विचार करें, उनके मायने समझें और उन पर अमल करें।
  • أُولُو الْأَلْبَابِ (समझदार और अक्लमंद लोग): वे लोग जो सही समझ, साफ़ दिमाग़ और सलीम अक़्ल रखते हैं।

तफ़सीर:

यह आयत उस महान किताब (क़ुरआन) की तारीफ़ करती है जिसे अल्लाह तआला ने अपने आख़िरी नबी हज़रत मुहम्मद ﷺ पर नाज़िल किया। यह किताब बरकत वाली है — यानी इसका हर शब्द, हर हुक्म और हर किस्सा अपने अंदर बेशुमार भलाई और रहमत रखता है। जो इसे पढ़ता है, समझता है और उस पर अमल करता है, उसकी ज़िंदगी में बरकत आती है, उसका दिल रौशन होता है और उसे दुनिया और आख़िरत की कामयाबी मिलती है।

अल्लाह तआला ने इस किताब को सिर्फ़ पढ़ने के लिए नहीं भेजा, बल्कि इसलिए भेजा कि लोग इसकी आयात पर ग़ौर-ओ-फ़िक्र करें। यानी वे इसके पीछे छिपे हुए हिकमतों, नसीहतों और हिदायतों को समझें। जब कोई इंसान क़ुरआन की आयात पर ध्यान से विचार करता है, तो उसके दिल में ईमान की रौशनी पैदा होती है, उसे अपने रब की पहचान होती है और उसे ज़िंदगी का सही रास्ता मिलता है।

फिर अल्लाह फ़रमाता है कि इस किताब का एक और मक़सद यह है कि अक्लमंद और समझदार लोग इससे नसीहत हासिल करें। यानी जिन लोगों ने अल्लाह की दी हुई अक़्ल को सही तरह से इस्तेमाल किया, वे इस किताब को पढ़कर अपनी ग़लतियों से बाज़ आते हैं, अपने रब की तरफ़ लौटते हैं और अपनी ज़िंदगी को सुधार लेते हैं। यह किताब उनके लिए एक रहनुमा, एक मुर्शिद और एक रौशनी है।

इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि क़ुरआन को सिर्फ़ तिलावत के लिए नहीं रखना चाहिए, बल्कि उसे पढ़कर उस पर अमल करना चाहिए। हमें चाहिए कि हर दिन कुछ वक़्त निकालकर क़ुरआन की आयात पर ग़ौर करें, उनके मायने समझें और अपनी ज़िंदगी को उसी के अनुसार ढालें। यही वह रास्ता है जो हमें जन्नत तक पहुँचाएगा और यही वह नसीहत है जो हमें दुनिया की बुराइयों से बचाएगी।

अल्लाह तआला हम सबको क़ुरआन को समझने, उस पर अमल करने और उससे नसीहत हासिल करने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन।



📜 आयत 27-31 — सूरा साद

27وَمَا خَلَقْنَا السَّمَاءَ وَالْأَرْضَ وَمَا بَيْنَهُمَا بَاطِلًا ۚ ذَٰلِكَ ظَنُّ الَّذِينَ كَفَرُوا ۚ فَوَيْلٌ لِّلَّذِينَ كَفَرُوا مِنَ النَّارِ
और हमने आसमान और ज़मीन और जो चीज़ें उन दोनों के दरमियान हैं बेकार नहीं पैदा किया ये उन लोगों का ख्याल है जो काफ़िर हो बैठे तो जो लोग दोज़ख़ के मुनकिर हैं उन पर अफ़सोस है
28أَمْ نَجْعَلُ الَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ كَالْمُفْسِدِينَ فِي الْأَرْضِ أَمْ نَجْعَلُ الْمُتَّقِينَ كَالْفُجَّارِ
क्या जिन लोगों ने ईमान कुबूल किया और अच्छे-अच्छे काम किए उनको हम (उन लोगों के बराबर) कर दें जो रूए ज़मीन में फसाद फैलाया करते हैं या हम परहेज़गारों को मिसल बदकारों के बना दें
29كِتَابٌ أَنزَلْنَاهُ إِلَيْكَ مُبَارَكٌ لِّيَدَّبَّرُوا آيَاتِهِ وَلِيَتَذَكَّرَ أُولُو الْأَلْبَابِ
(ऐ रसूल) किताब (कुरान) जो हमने तुम्हारे पास नाज़िल की है (बड़ी) बरकत वाली है ताकि लोग इसकी आयतों में ग़ौर करें और ताकि अक्ल वाले नसीहत हासिल करें
30وَوَهَبْنَا لِدَاوُودَ سُلَيْمَانَ ۚ نِعْمَ الْعَبْدُ ۖ إِنَّهُ أَوَّابٌ
और हमने दाऊद को सुलेमान (सा बेटा) अता किया (सुलेमान भी) क्या अच्छे बन्दे थे
31إِذْ عُرِضَ عَلَيْهِ بِالْعَشِيِّ الصَّافِنَاتُ الْجِيَادُ
बेशक वह हमारी तरफ रूजू करने वाले थे इत्तोफाक़न एक दफ़ा तीसरे पहर को ख़ासे के असील घोड़े उनके सामने पेश किए गए
सादकुरान सूची
88आयत
मक्कीअवतरण स्थान
29आयत

अनुवाद — साद 29

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सूरा आयत 29/88 — सूरा साद ص (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा साद सुनें, सूरा साद अनुवाद, सूरा साद mp3, सूरा साद pdf. आयत 27–31. हिंदी अर्थ: اردو.





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Thursday, October 1, 2026

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