अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- अम (أَمْ): क्या (प्रश्नवाचक)
- नज'अलु (نَجْعَلُ): क्या हम बनाएँगे / क्या हम करेंगे
- अल-मुस्फिदीन (الْمُفْسِدِينَ): उपद्रव फैलाने वाले, बिगाड़ पैदा करने वाले
- अल-मुत्तक़ीन (الْمُتَّقِينَ): परहेज़गार, अल्लाह से डरने वाले
- अल-फुज्जार (الْفُجَّار): दुष्ट, पापी, अवज्ञाकारी
तफ़सीर:
क्या हम उन लोगों को जिन्होंने ईमान लाया और अच्छे कर्म किए, उन लोगों के बराबर कर सकते हैं जो धरती में उपद्रव और फसाद फैलाते हैं? क्या हम परहेज़गारों को दुष्टों और पापियों के समान ठहरा सकते हैं? यह प्रश्न स्वयं ही उत्तर देता है कि यह कभी संभव नहीं है। अल्लाह की हिक्मत और अदल (न्याय) इस बात की गवाही देता है कि नेक और बद लोगों का अंजाम एक जैसा नहीं हो सकता।
यह आयत हमें एक बुनियादी सच्चाई की ओर संकेत करती है—अल्लाह का न्याय अटल है। वह कभी अच्छे और बुरे को एक पैमाने पर नहीं तोलता। जो लोग ईमान लाए, अल्लाह के आदेशों का पालन किया और अच्छे कर्म किए, उनका दर्जा उन लोगों के समान नहीं हो सकता जो धरती में फसाद फैलाते हैं, अल्लाह की अवज्ञा करते हैं और उसके बंदों को नुक़सान पहुँचाते हैं। इसी तरह, जो लोग तक़वा (अल्लाह का डर) अपनाते हैं, हलाल-हराम का ध्यान रखते हैं और अपने जीवन को अल्लाह की रज़ा के अनुसार ढालते हैं, वे उन लोगों के बराबर नहीं हो सकते जो पाप में डूबे हुए हैं और अल्लाह की रहमत से दूर हैं।
यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि इस दुनिया में भले ही कुछ लोगों को लगे कि नेक और बद का अंजाम एक जैसा है, लेकिन अल्लाह के यहाँ हर व्यक्ति को उसके कर्मों का पूरा-पूरा बदला मिलेगा। नेक लोगों के लिए जन्नत है और बद लोगों के लिए जहन्नम। यह अल्लाह का वादा है और वह अपने वादे को कभी नहीं तोड़ता।
इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि हमें अपने जीवन में नेकी और परहेज़गारी को अपनाना चाहिए, क्योंकि अल्लाह के यहाँ नेकी की कद्र होती है। हमें कभी यह नहीं सोचना चाहिए कि बुरे लोगों को देखकर हम भी बुराई कर लें, क्योंकि अल्लाह की नज़र में नेक और बद कभी बराबर नहीं हो सकते। यही अल्लाह का न्याय है, और यही उसकी हिक्मत है।
📜 आयत 26-30 — साद
अनुवाद — साद 28
सूरा साद आयत 28 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : क्या जिन लोगों ने ईमान कुबूल किया और अच्छे-अच्छे काम…सूरा आयत 28/88 — साद ص (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: साद सुनें, साद अनुवाद, साद mp3, साद pdf. आयत 26–30. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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