साद · 28/88
अनुवाद उच्चारण — साद
أَمْ نَجْعَلُ الَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ كَالْمُفْسِدِينَ فِي الْأَرْضِ أَمْ نَجْعَلُ الْمُتَّقِينَ كَالْفُجَّارِ ۝٢٨
Am naj`alul lazeena aamanoo wa `amilus saalihaati kalmufisdeena fil ardi am naj`alul muttaqeena kalfujjaar
📖 हिंदी अर्थ
क्या जिन लोगों ने ईमान कुबूल किया और अच्छे-अच्छे काम किए उनको हम (उन लोगों के बराबर) कर दें जो रूए ज़मीन में फसाद फैलाया करते हैं या हम परहेज़गारों को मिसल बदकारों के बना दें
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • अम (أَمْ): क्या (प्रश्नवाचक)
  • नज'अलु (نَجْعَلُ): क्या हम बनाएँगे / क्या हम करेंगे
  • अल-मुस्फिदीन (الْمُفْسِدِينَ): उपद्रव फैलाने वाले, बिगाड़ पैदा करने वाले
  • अल-मुत्तक़ीन (الْمُتَّقِينَ): परहेज़गार, अल्लाह से डरने वाले
  • अल-फुज्जार (الْفُجَّار): दुष्ट, पापी, अवज्ञाकारी

तफ़सीर:

क्या हम उन लोगों को जिन्होंने ईमान लाया और अच्छे कर्म किए, उन लोगों के बराबर कर सकते हैं जो धरती में उपद्रव और फसाद फैलाते हैं? क्या हम परहेज़गारों को दुष्टों और पापियों के समान ठहरा सकते हैं? यह प्रश्न स्वयं ही उत्तर देता है कि यह कभी संभव नहीं है। अल्लाह की हिक्मत और अदल (न्याय) इस बात की गवाही देता है कि नेक और बद लोगों का अंजाम एक जैसा नहीं हो सकता।

यह आयत हमें एक बुनियादी सच्चाई की ओर संकेत करती है—अल्लाह का न्याय अटल है। वह कभी अच्छे और बुरे को एक पैमाने पर नहीं तोलता। जो लोग ईमान लाए, अल्लाह के आदेशों का पालन किया और अच्छे कर्म किए, उनका दर्जा उन लोगों के समान नहीं हो सकता जो धरती में फसाद फैलाते हैं, अल्लाह की अवज्ञा करते हैं और उसके बंदों को नुक़सान पहुँचाते हैं। इसी तरह, जो लोग तक़वा (अल्लाह का डर) अपनाते हैं, हलाल-हराम का ध्यान रखते हैं और अपने जीवन को अल्लाह की रज़ा के अनुसार ढालते हैं, वे उन लोगों के बराबर नहीं हो सकते जो पाप में डूबे हुए हैं और अल्लाह की रहमत से दूर हैं।

यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि इस दुनिया में भले ही कुछ लोगों को लगे कि नेक और बद का अंजाम एक जैसा है, लेकिन अल्लाह के यहाँ हर व्यक्ति को उसके कर्मों का पूरा-पूरा बदला मिलेगा। नेक लोगों के लिए जन्नत है और बद लोगों के लिए जहन्नम। यह अल्लाह का वादा है और वह अपने वादे को कभी नहीं तोड़ता।

इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि हमें अपने जीवन में नेकी और परहेज़गारी को अपनाना चाहिए, क्योंकि अल्लाह के यहाँ नेकी की कद्र होती है। हमें कभी यह नहीं सोचना चाहिए कि बुरे लोगों को देखकर हम भी बुराई कर लें, क्योंकि अल्लाह की नज़र में नेक और बद कभी बराबर नहीं हो सकते। यही अल्लाह का न्याय है, और यही उसकी हिक्मत है।

🎧 सुनें

📜 आयत 26-30 — साद

26يَا دَاوُودُ إِنَّا جَعَلْنَاكَ خَلِيفَةً فِي الْأَرْضِ فَاحْكُم بَيْنَ النَّاسِ بِالْحَقِّ وَلَا تَتَّبِعِ الْهَوَىٰ فَيُضِلَّكَ عَن سَبِيلِ اللَّهِ ۚ إِنَّ الَّذِينَ يَضِلُّونَ عَن سَبِيلِ اللَّهِ لَهُمْ عَذَابٌ شَدِيدٌ بِمَا نَسُوا يَوْمَ الْحِسَابِ
(हमने फरमाया) ऐ दाऊद हमने तुमको ज़मीन में (अपना) नाएब क़रार दिया तो तुम लोगों के दरमियान बिल्कुल ठीक फैसला किया करो और नफ़सियानी ख्वाहिश की पैरवी न करो बसा ये पीरों तुम्हें ख़ुदा की राह से बहका देगी इसमें शक नहीं कि जो लोग खुदा की राह में भटकते हैं उनकी बड़ी सख्त सज़ा होगी क्योंकि उन लोगों ने हिसाब के दिन (क़यामत) को भुला दिया
27وَمَا خَلَقْنَا السَّمَاءَ وَالْأَرْضَ وَمَا بَيْنَهُمَا بَاطِلًا ۚ ذَٰلِكَ ظَنُّ الَّذِينَ كَفَرُوا ۚ فَوَيْلٌ لِّلَّذِينَ كَفَرُوا مِنَ النَّارِ
और हमने आसमान और ज़मीन और जो चीज़ें उन दोनों के दरमियान हैं बेकार नहीं पैदा किया ये उन लोगों का ख्याल है जो काफ़िर हो बैठे तो जो लोग दोज़ख़ के मुनकिर हैं उन पर अफ़सोस है
28أَمْ نَجْعَلُ الَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ كَالْمُفْسِدِينَ فِي الْأَرْضِ أَمْ نَجْعَلُ الْمُتَّقِينَ كَالْفُجَّارِ
क्या जिन लोगों ने ईमान कुबूल किया और अच्छे-अच्छे काम किए उनको हम (उन लोगों के बराबर) कर दें जो रूए ज़मीन में फसाद फैलाया करते हैं या हम परहेज़गारों को मिसल बदकारों के बना दें
29كِتَابٌ أَنزَلْنَاهُ إِلَيْكَ مُبَارَكٌ لِّيَدَّبَّرُوا آيَاتِهِ وَلِيَتَذَكَّرَ أُولُو الْأَلْبَابِ
(ऐ रसूल) किताब (कुरान) जो हमने तुम्हारे पास नाज़िल की है (बड़ी) बरकत वाली है ताकि लोग इसकी आयतों में ग़ौर करें और ताकि अक्ल वाले नसीहत हासिल करें
30وَوَهَبْنَا لِدَاوُودَ سُلَيْمَانَ ۚ نِعْمَ الْعَبْدُ ۖ إِنَّهُ أَوَّابٌ
और हमने दाऊद को सुलेमान (सा बेटा) अता किया (सुलेमान भी) क्या अच्छे बन्दे थे
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अनुवाद — साद 28

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सूरा आयत 28/88 — साद ص (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: साद सुनें, साद अनुवाद, साद mp3, साद pdf. आयत 26–30. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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