अज़-ज़ुमर · 53/75
अनुवाद उच्चारण — अज़-ज़ुमर
۞ قُلْ يَا عِبَادِيَ الَّذِينَ أَسْرَفُوا عَلَىٰ أَنفُسِهِمْ لَا تَقْنَطُوا مِن رَّحْمَةِ اللَّهِ ۚ إِنَّ اللَّهَ يَغْفِرُ الذُّنُوبَ جَمِيعًا ۚ إِنَّهُ هُوَ الْغَفُورُ الرَّحِيمُ ۝٥٣
Qul yaa`ibaadiyal lazeena asrafoo `alaaa anfusihim laa taqnatoo mirrahmatil laah; innal laaha yaghfiruz zunooba jamee`aa; innahoo Huwal Ghafoorur Raheem
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि ऐ मेरे (ईमानदार) बन्दों जिन्होने (गुनाह करके) अपनी जानों पर ज्यादतियाँ की हैं तुम लोग ख़ुदा की रहमत से नाउम्मीद न होना बेशक ख़ुदा (तुम्हारे) कुल गुनाहों को बख्श देगा वह बेशक बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أَسْرَفُوا: हद से बढ़ गए, अत्यधिक पाप किए।
  • لَا تَقْنَطُوا: निराश मत हो, उम्मीद मत छोड़ो।
  • الْغَفُورُ الرَّحِيمُ: अत्यंत क्षमाशील, अत्यंत दयावान।

तफसीर (व्याख्या):

ऐ नबी! आप मेरे उन बंदों से कह दीजिए जिन्होंने अपनी आत्माओं पर अत्याचार किया है, यानी गुनाहों में डूबकर अपने आप को बर्बाद कर लिया है, और शिर्क, बड़े-बड़े पापों और बुराइयों में हद से आगे निकल गए हैं—उन्हें यह खुशखबरी सुना दीजिए कि अल्लाह की रहमत से निराश न हों। चाहे तुम्हारे गुनाह कितने ही अधिक और भारी क्यों न हों, अल्लाह की दया और क्षमा का दामन बहुत विशाल है।

अल्लाह तआला फरमाता है: "बेशक अल्लाह सारे गुनाहों को माफ कर देता है।" यह वादा उन लोगों के लिए है जो सच्चे दिल से तौबा करें, अपने गुनाहों से बाज़ आएं, और अल्लाह की ओर पलट आएं। हाँ, शिर्क (अल्लाह के साथ किसी को साझी ठहराना) को छोड़कर—क्योंकि शिर्क की माफी तौबा के बिना नहीं है, जैसा कि कुरआन की दूसरी आयातों से स्पष्ट है। लेकिन जो शिर्क से भी तौबा कर ले, तो अल्लाह उसे भी माफ कर देता है।

यह आयत मुसलमानों के लिए सबसे बड़ी खुशखबरी है। अल्लाह ने अपने रसूल ﷺ के माध्यम से यह घोषणा की है कि उसकी रहमत उसके गज़ब से कहीं बढ़कर है। नबी ﷺ ने फरमाया: "अल्लाह तआला सारे गुनाहों को माफ कर देता है और उसे कोई परवाह नहीं" (यानी वह अपनी कुदरत से हर गुनाह को माफ कर सकता है)।

तो ऐ गुनाहगार बंदो! अल्लाह की रहमत से मायूस मत होओ। उसकी दया का दरवाजा हमेशा खुला है। जब तक तुम्हारी सांसें चल रही हैं, तौबा का मौका मौजूद है। अल्लाह अपने बंदों से बेहद प्यार करता है और चाहता है कि वे उसकी ओर लौट आएं। वह गुनाहों को माफ करने वाला और अपने बंदों पर रहम करने वाला है। उसकी रहमत से निराश होना खुद उसकी रहमत का अपमान है। इसलिए उठो, अपने गुनाहों से तौबा करो, और अल्लाह की रहमत की तरफ दौड़ो—क्योंकि वह तुम्हारे लिए अपनी माफी और दया का दरवाजा खोलने को तैयार है।

🎧 सुनें

📜 आयत 51-55 — अज़-ज़ुमर

51فَأَصَابَهُمْ سَيِّئَاتُ مَا كَسَبُوا ۚ وَالَّذِينَ ظَلَمُوا مِنْ هَٰؤُلَاءِ سَيُصِيبُهُمْ سَيِّئَاتُ مَا كَسَبُوا وَمَا هُم بِمُعْجِزِينَ
ग़रज़ उनके आमाल के बुरे नतीजे उन्हें भुगतने पड़े और उन (कुफ्फ़ारे मक्का) में से जिन लोगों ने नाफरमानियाँ की हैं उन्हें भी अपने अपने आमाल की सज़ाएँ भुगतनी पड़ेंगी और ये लोग (ख़ुदा को)े आजिज़ नहीं कर सकते
52أَوَلَمْ يَعْلَمُوا أَنَّ اللَّهَ يَبْسُطُ الرِّزْقَ لِمَن يَشَاءُ وَيَقْدِرُ ۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَاتٍ لِّقَوْمٍ يُؤْمِنُونَ
क्या उन लोगों को इतनी बात भी मालूम नहीं कि ख़ुदा ही जिसके लिए चाहता है रोज़ी फराख़ करता है और (जिसके लिए चाहता है) तंग करता है इसमें शक नहीं कि क्या इसमें ईमानदार लोगों के (कुदरत की) बहुत सी निशानियाँ हैं
53۞ قُلْ يَا عِبَادِيَ الَّذِينَ أَسْرَفُوا عَلَىٰ أَنفُسِهِمْ لَا تَقْنَطُوا مِن رَّحْمَةِ اللَّهِ ۚ إِنَّ اللَّهَ يَغْفِرُ الذُّنُوبَ جَمِيعًا ۚ إِنَّهُ هُوَ الْغَفُورُ الرَّحِيمُ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि ऐ मेरे (ईमानदार) बन्दों जिन्होने (गुनाह करके) अपनी जानों पर ज्यादतियाँ की हैं तुम लोग ख़ुदा की रहमत से नाउम्मीद न होना बेशक ख़ुदा (तुम्हारे) कुल गुनाहों को बख्श देगा वह बेशक बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
54وَأَنِيبُوا إِلَىٰ رَبِّكُمْ وَأَسْلِمُوا لَهُ مِن قَبْلِ أَن يَأْتِيَكُمُ الْعَذَابُ ثُمَّ لَا تُنصَرُونَ
और अपने परवरदिगार की तरफ रूजू करो और उसी के फरमाबरदार बन जाओ (मगर) उस वक्त क़े क़ब्ल ही कि तुम पर जब अज़ाब आ नाज़िल हो (और) फिर तुम्हारी मदद न की जा सके
55وَاتَّبِعُوا أَحْسَنَ مَا أُنزِلَ إِلَيْكُم مِّن رَّبِّكُم مِّن قَبْلِ أَن يَأْتِيَكُمُ الْعَذَابُ بَغْتَةً وَأَنتُمْ لَا تَشْعُرُونَ
और जो जो अच्छी बातें तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से तुम पर नाज़िल हई हैं उन पर चलो (मगर) उसके क़ब्ल कि तुम पर एक बारगी अज़ाब नाज़िल हो और तुमको उसकी ख़बर भी न हो
अज़-ज़ुमरकुरान सूची
75आयत
मक्कीRevelation
53आयत

अनुवाद — अज़-ज़ुमर 53

सूरा अज़-ज़ुमर आयत 53 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल) तुम कह दो कि ऐ मेरे (ईमानदार) बन्दों…

सूरा आयत 53/75 — अज़-ज़ुमर الزمر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अज़-ज़ुमर सुनें, अज़-ज़ुमर अनुवाद, अज़-ज़ुमर mp3, अज़-ज़ुमर pdf. आयत 51–55. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए