अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- अनीबू (وَأَنِيبُوا): रुजू होना, लौटना, तौबा करके अल्लाह की ओर झुकना।
- अस्लिमू (وَأَسْلِمُوا): आत्मसमर्पण करना, अपने आप को अल्लाह के हवाले कर देना, उसकी आज्ञा के आगे सर झुका देना।
- अज़ाब (الْعَذَابُ): यातना, दंड, अल्लाह की तरफ से आने वाली सज़ा।
- ला तुन्सरून (لَا تُنصَرُونَ): तुम्हें कोई मदद नहीं मिलेगी, कोई तुम्हें बचाने वाला नहीं होगा।
तफसीर (व्याख्या):
ऐ लोगों! अपने रब की ओर लौट आओ। अपने गुनाहों पर नादिम होकर, दिल से तौबा करते हुए उसकी तरफ रुजू हो जाओ। और उसके सामने पूरी तरह आत्मसमर्पण कर दो—अपने आप को, अपनी इच्छाओं को, अपने कामों को उसकी रज़ा के हवाले कर दो। उसकी इबादत को खालिस कर दो, सिर्फ उसी के लिए। यह काम उस वक़्त से पहले कर लो, जब अज़ाब आ जाए—चाहे वह दुनिया में आने वाली मुसीबत हो या आख़िरत का अज़ाब। क्योंकि जब अज़ाब आ जाएगा, तो फिर कोई मददगार नहीं होगा। न तुम्हारे बुत, न तुम्हारे रिश्तेदार, न तुम्हारे साथी—कोई भी तुम्हें अल्लाह की पकड़ से नहीं बचा सकेगा।
याद रखो, अल्लाह का दरवाज़ा हमेशा खुला है। वह रहमत वाला है, माफ़ करने वाला है। जब तक साँसें चल रही हैं, तौबा का मौक़ा मौजूद है। लेकिन यह मौक़ा हमेशा नहीं रहेगा। जिस दिन फ़ैसला हो जाएगा, उस दिन न तो तौबा क़ुबूल होगी और न ही कोई सिफ़ारिश काम आएगी।
तो आज ही, इसी पल, अपने रब की तरफ पलटो। उसकी रहमत की तरफ दौड़ो। वह तुम्हारे गुनाह माफ़ करने को तैयार है। उसकी मोहब्बत और मग़फिरत का दरवाज़ा तुम्हारे लिए खुला है। बस एक क़दम उठाओ—तौबा की तरफ, अल्लाह की तरफ। यही तुम्हारी कामयाबी है, यही तुम्हारी नजात है।
📜 आयत 52-56 — अज़-ज़ुमर
अनुवाद — अज़-ज़ुमर 54
सूरा अज़-ज़ुमर आयत 54 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और अपने परवरदिगार की तरफ रूजू करो और उसी के…सूरा आयत 54/75 — अज़-ज़ुमर الزمر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अज़-ज़ुमर सुनें, अज़-ज़ुमर अनुवाद, अज़-ज़ुमर mp3, अज़-ज़ुमर pdf. आयत 52–56. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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