Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- النَّجَاةِ: मुक्ति और छुटकारा, यानी जहन्नम की आग से बचाव और जन्नत की ओर पहुँचने वाला रास्ता।
- تَدْعُونَنِي: तुम मुझे बुला रहे हो।
- إِلَى النَّارِ: आग की ओर, यानी ऐसे कामों की ओर जो जहन्नम तक ले जाएँ।
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ मेरी क़ौम के लोगो! यह कैसा अजीब मामला है कि मैं तुम्हें उस चीज़ की ओर बुला रहा हूँ जो तुम्हारी नजात (मुक्ति) का ज़रिया है — यानी अल्लाह पर ईमान लाना, उसके नबी मूसा (अलैहिस्सलाम) की पैरवी करना, और अच्छे काम करना। यही वह रास्ता है जो तुम्हें जहन्नम की आग से बचाकर जन्नत की तरफ ले जाता है। और दूसरी तरफ तुम मुझे उस चीज़ की ओर बुला रहे हो जो सीधे आग की तरफ ले जाती है — यानी शिर्क (अल्लाह के साथ किसी को साझी ठहराना) और अल्लाह की नाफ़रमानी।
यह कितना बड़ा विरोधाभास है! मैं तुम्हारी भलाई चाहता हूँ और तुम मेरी बर्बादी चाहते हो। मैं तुम्हें हिदायत की रोशनी की ओर बुलाता हूँ, और तुम मुझे गुमराही के अंधेरे में धकेलना चाहते हो। मैं तुम्हें उस रास्ते की दावत देता हूँ जो हमेशा की खुशियों और सुकून की जगह (जन्नत) तक पहुँचाता है, और तुम मुझे उस रास्ते पर चलने के लिए कहते हो जिसकी मंज़िल सिर्फ दर्द, अफ़सोस और जलती हुई आग है।
यह नबी (मूसा अलैहिस्सलाम) की दलील और नसीहत का अंदाज़ है — उन्होंने अपनी क़ौम को बार-बार पुकारा, उन्हें नींद से जगाने की कोशिश की, और उनकी इस हरकत पर अफ़सोस जताया कि वे अपने भले को छोड़कर बुराई की तरफ भाग रहे हैं। यह पुकार सिर्फ उस वक़्त की नहीं थी, बल्कि हर उस इंसान के लिए एक सबक़ है जो सच्चाई को ठुकराकर बातिल की तरफ चलता है।
दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):
यह आयत हमें सिखाती है कि नेकी की दावत देने वाला हमेशा अपनी क़ौम की भलाई चाहता है, चाहे उसे जवाब में बुराई ही क्यों न मिले। और यह भी याद दिलाती है कि अल्लाह की राह — ईमान, तौहीद और नेक अमल — ही असली नजात का ज़रिया है। जो लोग इस दुनिया में अपनी ज़िद और अहंकार की वजह से सच्चाई को नहीं मानते, वे आख़िरत में सिर्फ पछतावे के सिवा कुछ हासिल नहीं करेंगे। आओ, हम अपनी ज़िंदगी में इस सच्चाई को अपनाएँ कि अल्लाह की तरफ बुलाना सबसे बड़ी भलाई है, और उसकी नाफ़रमानी से बचना ही सबसे बड़ी कामयाबी है।
📜 आयत 39-43 — सूरा ग़ाफिर
अनुवाद — ग़ाफिर 41
सूरा ग़ाफिर आयत 41 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और ऐ मेरी क़ौम मुझे क्या हुआ है कि मैं…सूरा आयत 41/85 — सूरा ग़ाफिर غافر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा ग़ाफिर सुनें, सूरा ग़ाफिर अनुवाद, सूरा ग़ाफिर mp3, सूरा ग़ाफिर pdf. आयत 39–43. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
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