ग़ाफिर · 41/85
अनुवाद उच्चारण — ग़ाफिर
۞ وَيَا قَوْمِ مَا لِي أَدْعُوكُمْ إِلَى النَّجَاةِ وَتَدْعُونَنِي إِلَى النَّارِ ۝٤١
Wa yaa qawmi maa leee ad`ookum ilan najaati wa tad`oonaneee ilan Naar
📖 हिंदी अर्थ
और ऐ मेरी क़ौम मुझे क्या हुआ है कि मैं तुमको नजाद की तरफ बुलाता हूँ और तुम मुझे दोज़ख़ की तरफ बुलाते हो
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • النَّجَاةِ: मुक्ति और छुटकारा, यानी जहन्नम की आग से बचाव और जन्नत की ओर पहुँचने वाला रास्ता।
  • تَدْعُونَنِي: तुम मुझे बुला रहे हो।
  • إِلَى النَّارِ: आग की ओर, यानी ऐसे कामों की ओर जो जहन्नम तक ले जाएँ।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ मेरी क़ौम के लोगो! यह कैसा अजीब मामला है कि मैं तुम्हें उस चीज़ की ओर बुला रहा हूँ जो तुम्हारी नजात (मुक्ति) का ज़रिया है — यानी अल्लाह पर ईमान लाना, उसके नबी मूसा (अलैहिस्सलाम) की पैरवी करना, और अच्छे काम करना। यही वह रास्ता है जो तुम्हें जहन्नम की आग से बचाकर जन्नत की तरफ ले जाता है। और दूसरी तरफ तुम मुझे उस चीज़ की ओर बुला रहे हो जो सीधे आग की तरफ ले जाती है — यानी शिर्क (अल्लाह के साथ किसी को साझी ठहराना) और अल्लाह की नाफ़रमानी।

यह कितना बड़ा विरोधाभास है! मैं तुम्हारी भलाई चाहता हूँ और तुम मेरी बर्बादी चाहते हो। मैं तुम्हें हिदायत की रोशनी की ओर बुलाता हूँ, और तुम मुझे गुमराही के अंधेरे में धकेलना चाहते हो। मैं तुम्हें उस रास्ते की दावत देता हूँ जो हमेशा की खुशियों और सुकून की जगह (जन्नत) तक पहुँचाता है, और तुम मुझे उस रास्ते पर चलने के लिए कहते हो जिसकी मंज़िल सिर्फ दर्द, अफ़सोस और जलती हुई आग है।

यह नबी (मूसा अलैहिस्सलाम) की दलील और नसीहत का अंदाज़ है — उन्होंने अपनी क़ौम को बार-बार पुकारा, उन्हें नींद से जगाने की कोशिश की, और उनकी इस हरकत पर अफ़सोस जताया कि वे अपने भले को छोड़कर बुराई की तरफ भाग रहे हैं। यह पुकार सिर्फ उस वक़्त की नहीं थी, बल्कि हर उस इंसान के लिए एक सबक़ है जो सच्चाई को ठुकराकर बातिल की तरफ चलता है।

दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):

यह आयत हमें सिखाती है कि नेकी की दावत देने वाला हमेशा अपनी क़ौम की भलाई चाहता है, चाहे उसे जवाब में बुराई ही क्यों न मिले। और यह भी याद दिलाती है कि अल्लाह की राह — ईमान, तौहीद और नेक अमल — ही असली नजात का ज़रिया है। जो लोग इस दुनिया में अपनी ज़िद और अहंकार की वजह से सच्चाई को नहीं मानते, वे आख़िरत में सिर्फ पछतावे के सिवा कुछ हासिल नहीं करेंगे। आओ, हम अपनी ज़िंदगी में इस सच्चाई को अपनाएँ कि अल्लाह की तरफ बुलाना सबसे बड़ी भलाई है, और उसकी नाफ़रमानी से बचना ही सबसे बड़ी कामयाबी है।

🎧 सुनें

📜 आयत 39-43 — ग़ाफिर

39يَا قَوْمِ إِنَّمَا هَٰذِهِ الْحَيَاةُ الدُّنْيَا مَتَاعٌ وَإِنَّ الْآخِرَةَ هِيَ دَارُ الْقَرَارِ
भाईयों ये दुनियावी ज़िन्दगी तो बस (चन्द रोज़ा) फ़ायदा है और आखेरत ही हमेशा रहने का घर है
40مَنْ عَمِلَ سَيِّئَةً فَلَا يُجْزَىٰ إِلَّا مِثْلَهَا ۖ وَمَنْ عَمِلَ صَالِحًا مِّن ذَكَرٍ أَوْ أُنثَىٰ وَهُوَ مُؤْمِنٌ فَأُولَٰئِكَ يَدْخُلُونَ الْجَنَّةَ يُرْزَقُونَ فِيهَا بِغَيْرِ حِسَابٍ
जो बुरा काम करेगा तो उसे बदला भी वैसा ही मिलेगा, और जो नेक काम करेगा मर्द हो या औरत मगर ईमानदार हो तो ऐसे लोग बेहिश्त में दाख़िल होंगे वहाँ उन्हें बेहिसाब रोज़ी मिलेगी
41۞ وَيَا قَوْمِ مَا لِي أَدْعُوكُمْ إِلَى النَّجَاةِ وَتَدْعُونَنِي إِلَى النَّارِ
और ऐ मेरी क़ौम मुझे क्या हुआ है कि मैं तुमको नजाद की तरफ बुलाता हूँ और तुम मुझे दोज़ख़ की तरफ बुलाते हो
42تَدْعُونَنِي لِأَكْفُرَ بِاللَّهِ وَأُشْرِكَ بِهِ مَا لَيْسَ لِي بِهِ عِلْمٌ وَأَنَا أَدْعُوكُمْ إِلَى الْعَزِيزِ الْغَفَّارِ
तुम मुझे बुलाते हो कि मै ख़ुदा के साथ कुफ्र करूं और उस चीज़ को उसका शरीक बनाऊ जिसका मुझे इल्म में भी नहीं, और मैं तुम्हें ग़ालिब (और) बड़े बख्शने वाले ख़ुदा की तरफ बुलाता हूँ
43لَا جَرَمَ أَنَّمَا تَدْعُونَنِي إِلَيْهِ لَيْسَ لَهُ دَعْوَةٌ فِي الدُّنْيَا وَلَا فِي الْآخِرَةِ وَأَنَّ مَرَدَّنَا إِلَى اللَّهِ وَأَنَّ الْمُسْرِفِينَ هُمْ أَصْحَابُ النَّارِ
बेशक तुम जिस चीज़ की तरफ़ मुझे बुलाते हो वह न तो दुनिया ही में पुकारे जाने के क़ाबिल है और न आख़िरत में और आख़िर में हम सबको ख़ुदा ही की तरफ लौट कर जाना है और इसमें तो शक ही नहीं कि हद से बढ़ जाने वाले जहन्नुमी हैं
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अनुवाद — ग़ाफिर 41

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Tuesday, August 18, 2026

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