Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- سَیِّئَةً (सैय्यिअह): बुरा काम, पाप
- یُجْزَىٰ (युज्ज़ा): बदला दिया जाएगा
- صَالِحًا (सालिहन): अच्छा काम, नेकी
- یَرْزُقُونَ (युर्ज़क़ून): उन्हें रोज़ी दी जाएगी
- بِغَیْرِ حِسَابٍ (बिग़ैरि हिसाब): बिना किसी हिसाब-किताब के, बिना किसी कमी के
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला इस आयत में अपने न्याय और अपनी रहमत का बेहद खूबसूरत नज़ारा पेश कर रहे हैं। वह फ़रमाते हैं कि जो शख्स बुरा काम करता है, उसे उसके बुरे काम के बराबर ही बदला मिलेगा — उससे ज़्यादा नहीं। यह अल्लाह का इंसाफ़ है कि वह गुनाह की सज़ा में कोई ज़्यादती नहीं करता। लेकिन जो नेक काम करता है, अल्लाह उसे उसके अमल से कहीं बढ़कर अज्र अता फ़रमाता है।
फिर अल्लाह तआला एक बहुत बड़ी खुशखबरी सुनाते हैं — जो कोई भी नेक अमल करे, चाहे वह मर्द हो या औरत, बशर्ते वह अल्लाह पर ईमान रखता हो और उसे एक मानता हो, तो ऐसे लोग जन्नत में दाखिल होंगे। यहाँ अल्लाह ने ख़ास तौर पर "मर्द या औरत" का ज़िक्र किया ताकि यह साफ़ हो जाए कि अल्लाह के यहाँ किसी भी जिन्स या जाति की कोई फज़ीलत नहीं, बल्कि सिर्फ़ ईमान और अमल देखा जाता है। इस्लाम में औरत को भी मर्द के बराबर दर्जा दिया गया है — यह उस दौर की बड़ी इंक़िलाबी तालीम थी जब दुनिया में औरतों को इंसान ही नहीं समझा जाता था।
अब इस आयत का सबसे खूबसूरत हिस्सा देखिए — अल्लाह फ़रमाता है कि ऐसे नेक लोग जन्नत में दाखिल होंगे और उन्हें वहाँ "बिना हिसाब" रोज़ी दी जाएगी। यानी उन्हें जन्नत के फल, नेमतें, आराम और खुशियाँ इतनी मिलेंगी कि उनका कोई हिसाब ही नहीं होगा। यह अल्लाह का असीम करम है — वह नेकी का बदला भी अपनी रहमत से देता है, इंसाफ़ से नहीं।
प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें दो बातें सिखाती है: पहली, हमें गुनाहों से बचना चाहिए क्योंकि हर बुराई का बदला ज़रूर मिलेगा। दूसरी, हमें नेक अमल की कोई कसर नहीं छोड़नी चाहिए — चाहे हमारा अमल कितना ही छोटा क्यों न हो, अल्लाह उसे कबूल फरमाकर हमें बेशुमार नेमतें अता करेगा। और सबसे बड़ी बात — जन्नत की नेमतें सिर्फ़ मर्दों के लिए नहीं, बल्कि उन सभी के लिए हैं जो ईमान लाएँ और नेक अमल करें। अल्लाह हम सबको अपनी रहमत से जन्नत अता फरमाए। आमीन।
📜 आयत 38-42 — सूरा ग़ाफिर
अनुवाद — ग़ाफिर 40
सूरा ग़ाफिर आयत 40 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : जो बुरा काम करेगा तो उसे बदला भी वैसा ही…सूरा आयत 40/85 — सूरा ग़ाफिर غافر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा ग़ाफिर सुनें, सूरा ग़ाफिर अनुवाद, सूरा ग़ाफिर mp3, सूरा ग़ाफिर pdf. आयत 38–42. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
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