ग़ाफिर · 40/85
अनुवाद उच्चारण — ग़ाफिर
مَنْ عَمِلَ سَيِّئَةً فَلَا يُجْزَىٰ إِلَّا مِثْلَهَا ۖ وَمَنْ عَمِلَ صَالِحًا مِّن ذَكَرٍ أَوْ أُنثَىٰ وَهُوَ مُؤْمِنٌ فَأُولَٰئِكَ يَدْخُلُونَ الْجَنَّةَ يُرْزَقُونَ فِيهَا بِغَيْرِ حِسَابٍ ۝٤٠
Man `amila saiyi`atan falaa yujzaaa illaa mislahaa wa man `amila saaliham min zakarin aw unsaa wa huwa mu`minun fa ulaaa`ika yadkhuloonal Jannata yurzaqoona feehaa bighairi hisaab
📖 हिंदी अर्थ
जो बुरा काम करेगा तो उसे बदला भी वैसा ही मिलेगा, और जो नेक काम करेगा मर्द हो या औरत मगर ईमानदार हो तो ऐसे लोग बेहिश्त में दाख़िल होंगे वहाँ उन्हें बेहिसाब रोज़ी मिलेगी

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • سَیِّئَةً (सैय्यिअह): बुरा काम, पाप
  • یُجْزَىٰ (युज्ज़ा): बदला दिया जाएगा
  • صَالِحًا (सालिहन): अच्छा काम, नेकी
  • یَرْزُقُونَ (युर्ज़क़ून): उन्हें रोज़ी दी जाएगी
  • بِغَیْرِ حِسَابٍ (बिग़ैरि हिसाब): बिना किसी हिसाब-किताब के, बिना किसी कमी के

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला इस आयत में अपने न्याय और अपनी रहमत का बेहद खूबसूरत नज़ारा पेश कर रहे हैं। वह फ़रमाते हैं कि जो शख्स बुरा काम करता है, उसे उसके बुरे काम के बराबर ही बदला मिलेगा — उससे ज़्यादा नहीं। यह अल्लाह का इंसाफ़ है कि वह गुनाह की सज़ा में कोई ज़्यादती नहीं करता। लेकिन जो नेक काम करता है, अल्लाह उसे उसके अमल से कहीं बढ़कर अज्र अता फ़रमाता है।

फिर अल्लाह तआला एक बहुत बड़ी खुशखबरी सुनाते हैं — जो कोई भी नेक अमल करे, चाहे वह मर्द हो या औरत, बशर्ते वह अल्लाह पर ईमान रखता हो और उसे एक मानता हो, तो ऐसे लोग जन्नत में दाखिल होंगे। यहाँ अल्लाह ने ख़ास तौर पर "मर्द या औरत" का ज़िक्र किया ताकि यह साफ़ हो जाए कि अल्लाह के यहाँ किसी भी जिन्स या जाति की कोई फज़ीलत नहीं, बल्कि सिर्फ़ ईमान और अमल देखा जाता है। इस्लाम में औरत को भी मर्द के बराबर दर्जा दिया गया है — यह उस दौर की बड़ी इंक़िलाबी तालीम थी जब दुनिया में औरतों को इंसान ही नहीं समझा जाता था।

अब इस आयत का सबसे खूबसूरत हिस्सा देखिए — अल्लाह फ़रमाता है कि ऐसे नेक लोग जन्नत में दाखिल होंगे और उन्हें वहाँ "बिना हिसाब" रोज़ी दी जाएगी। यानी उन्हें जन्नत के फल, नेमतें, आराम और खुशियाँ इतनी मिलेंगी कि उनका कोई हिसाब ही नहीं होगा। यह अल्लाह का असीम करम है — वह नेकी का बदला भी अपनी रहमत से देता है, इंसाफ़ से नहीं।

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें दो बातें सिखाती है: पहली, हमें गुनाहों से बचना चाहिए क्योंकि हर बुराई का बदला ज़रूर मिलेगा। दूसरी, हमें नेक अमल की कोई कसर नहीं छोड़नी चाहिए — चाहे हमारा अमल कितना ही छोटा क्यों न हो, अल्लाह उसे कबूल फरमाकर हमें बेशुमार नेमतें अता करेगा। और सबसे बड़ी बात — जन्नत की नेमतें सिर्फ़ मर्दों के लिए नहीं, बल्कि उन सभी के लिए हैं जो ईमान लाएँ और नेक अमल करें। अल्लाह हम सबको अपनी रहमत से जन्नत अता फरमाए। आमीन।



📜 आयत 38-42 — ग़ाफिर

38وَقَالَ الَّذِي آمَنَ يَا قَوْمِ اتَّبِعُونِ أَهْدِكُمْ سَبِيلَ الرَّشَادِ
और जो शख्स (दर पर्दा) ईमानदार था कहने लगा भाईयों मेरा कहना मानों मैं तुम्हें हिदायत के रास्ते दिख दूंगा
39يَا قَوْمِ إِنَّمَا هَٰذِهِ الْحَيَاةُ الدُّنْيَا مَتَاعٌ وَإِنَّ الْآخِرَةَ هِيَ دَارُ الْقَرَارِ
भाईयों ये दुनियावी ज़िन्दगी तो बस (चन्द रोज़ा) फ़ायदा है और आखेरत ही हमेशा रहने का घर है
40مَنْ عَمِلَ سَيِّئَةً فَلَا يُجْزَىٰ إِلَّا مِثْلَهَا ۖ وَمَنْ عَمِلَ صَالِحًا مِّن ذَكَرٍ أَوْ أُنثَىٰ وَهُوَ مُؤْمِنٌ فَأُولَٰئِكَ يَدْخُلُونَ الْجَنَّةَ يُرْزَقُونَ فِيهَا بِغَيْرِ حِسَابٍ
जो बुरा काम करेगा तो उसे बदला भी वैसा ही मिलेगा, और जो नेक काम करेगा मर्द हो या औरत मगर ईमानदार हो तो ऐसे लोग बेहिश्त में दाख़िल होंगे वहाँ उन्हें बेहिसाब रोज़ी मिलेगी
41۞ وَيَا قَوْمِ مَا لِي أَدْعُوكُمْ إِلَى النَّجَاةِ وَتَدْعُونَنِي إِلَى النَّارِ
और ऐ मेरी क़ौम मुझे क्या हुआ है कि मैं तुमको नजाद की तरफ बुलाता हूँ और तुम मुझे दोज़ख़ की तरफ बुलाते हो
42تَدْعُونَنِي لِأَكْفُرَ بِاللَّهِ وَأُشْرِكَ بِهِ مَا لَيْسَ لِي بِهِ عِلْمٌ وَأَنَا أَدْعُوكُمْ إِلَى الْعَزِيزِ الْغَفَّارِ
तुम मुझे बुलाते हो कि मै ख़ुदा के साथ कुफ्र करूं और उस चीज़ को उसका शरीक बनाऊ जिसका मुझे इल्म में भी नहीं, और मैं तुम्हें ग़ालिब (और) बड़े बख्शने वाले ख़ुदा की तरफ बुलाता हूँ
ग़ाफिरकुरान सूची
85आयत
मक्कीRevelation
40आयत

अनुवाद — ग़ाफिर 40

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सूरा आयत 40/85 — ग़ाफिर غافر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: ग़ाफिर सुनें, ग़ाफिर अनुवाद, ग़ाफिर mp3, ग़ाफिर pdf. आयत 38–42. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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