Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- تَدْعُونَنِي: तुम मुझे बुला रहे हो / बुलावा दे रहे हो
- لِأَكْفُرَ بِاللَّهِ: ताकि मैं अल्लाह का इनकार करूँ
- وَأُشْرِكَ بِهِ: और उसके साथ किसी को साझी (शरीक) ठहराऊँ
- مَا لَيْسَ لِي بِهِ عِلْمٌ: जिसके बारे में मुझे कोई ज्ञान नहीं
- الْعَزِيزِ: वह जो सब पर ग़ालिब है, जिसे कोई हरा नहीं सकता
- الْغَفَّارِ: बहुत क्षमा करने वाला
तफ़सीर (व्याख्या):
यह एक ईमान वाले व्यक्ति का वह कथन है जो फ़िरऔन की क़ौम के बीच रहता था और अपनी क़ौम को सच्चाई की ओर बुला रहा था। वह उन्हें समझा रहा है कि तुम मुझसे क्या चाहते हो? तुम मुझे बुला रहे हो कि मैं अल्लाह का इनकार करूँ और उसके साथ उन चीज़ों को साझी ठहराऊँ जिनके बारे में मुझे कोई ज्ञान नहीं है। यानी तुम चाहते हो कि मैं उन मूर्तियों और झूठे देवताओं की इबादत करूँ जिनके बारे में न तो कोई प्रमाण है और न ही कोई तर्क। यह सबसे बड़ा पाप और सबसे बुरा काम है — अल्लाह के साथ किसी को शरीक करना, जबकि अल्लाह ने कभी इसकी अनुमति नहीं दी और न ही कोई सही ज्ञान इस ओर ले जाता है।
दूसरी ओर, मैं तुम्हें उस अल्लाह की ओर बुलाता हूँ जो अज़ीज़ है — वह अपनी ताकत और प्रतिशोध में सब पर ग़ालिब है, कोई उसे हरा नहीं सकता, और वह ग़फ़्फ़ार है — वह बहुत क्षमा करने वाला है, जो अपने बंदों के पापों को माफ कर देता है जब वे उसकी ओर लौटते हैं और तौबा करते हैं।
इस आयत में एक बहुत बड़ी सीख है: सच्चा ईमान वाला व्यक्ति कभी भी सत्य का मार्ग नहीं छोड़ता, चाहे उसे कितना ही दबाव क्यों न दिया जाए। वह जानता है कि अल्लाह की ताकत और उसकी क्षमा — ये दोनों चीज़ें उसे सच्चाई पर स्थिर रहने की ताकत देती हैं। अल्लाह अज़ीज़ है, इसलिए उसकी नाराज़गी से डरना चाहिए; और वह ग़फ़्फ़ार है, इसलिए उसकी रहमत से उम्मीद रखनी चाहिए। यही संतुलन एक मुसलमान की ज़िंदगी का आधार है — डर और उम्मीद के बीच।
प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें सिखाती है कि हमें अपने ईमान पर अटल रहना चाहिए। दुनिया में बहुत से लोग हमें गुमराह करने की कोशिश करेंगे, हमें बुरे रास्ते पर ले जाना चाहेंगे, लेकिन हमें उस अल्लाह पर भरोसा रखना है जो सबसे ताकतवर है और जो अपने सच्चे बंदों के पापों को माफ करने वाला है। जो व्यक्ति अल्लाह की ओर बुलाता है, वह कभी अकेला नहीं होता — अल्लाह उसके साथ होता है। और जो लोग सच्चाई को ठुकराते हैं, वे अल्लाह की पकड़ से बच नहीं सकते। आइए, हम सब उस अज़ीज़ और ग़फ़्फ़ार की ओर लौटें, उसकी इबादत करें और उससे अपने गुनाहों की माफ़ी माँगें।
📜 आयत 40-44 — सूरा ग़ाफिर
अनुवाद — ग़ाफिर 42
सूरा ग़ाफिर आयत 42 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तुम मुझे बुलाते हो कि मै ख़ुदा के साथ कुफ्र…सूरा आयत 42/85 — सूरा ग़ाफिर غافر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा ग़ाफिर सुनें, सूरा ग़ाफिर अनुवाद, सूरा ग़ाफिर mp3, सूरा ग़ाफिर pdf. आयत 40–44. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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