ग़ाफिर · 82/85
अनुवाद उच्चारण — सूरा ग़ाफिर
أَفَلَمْ يَسِيرُوا فِي الْأَرْضِ فَيَنظُرُوا كَيْفَ كَانَ عَاقِبَةُ الَّذِينَ مِن قَبْلِهِمْ ۚ كَانُوا أَكْثَرَ مِنْهُمْ وَأَشَدَّ قُوَّةً وَآثَارًا فِي الْأَرْضِ فَمَا أَغْنَىٰ عَنْهُم مَّا كَانُوا يَكْسِبُونَ ۝٨٢
Afalam yaseeroo fil ardi fa yanzuroo kaifa kaana `aaqibatul lazeena min qablihim; kaanoo aksara minhum wa ashadda quwwatanw wa aasaaran fil ardi famaaa aghnaa `anhum maa kaanoo yaksiboon
📖 हिंदी अर्थ
तो क्या ये लोग रूए ज़मीन पर चले फिरे नहीं, तो देखते कि जो लोग इनसे पहले थे उनका क्या अंजाम हुआ, जो उनसे (तादाद में) कहीं ज्यादा थे और क़ूवत और ज़मीन पर (अपनी) निशानियाँ (यादगारें) छोड़ने में भी कहीं बढ़ चढ़ कर थे तो जो कुछ उन लोगों ने किया कराया था उनके कुछ भी काम न आया

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
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A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • آثَارًا فِي الْأَرْضِ: धरती पर छोड़े गए निशान, जैसे इमारतें, महल, खेत और दूसरी बनावटें।
  • فَمَا أَغْنَىٰ عَنْهُم: उनके काम न आया, उन्हें कोई लाभ नहीं पहुँचाया।
  • مَّا كَانُوا يَكْسِبُونَ: जो कुछ वे कमाते थे (धन, ताकत, साधन)।

तफ़सीर:

क्या ये झुठलाने वाले लोग धरती पर चले-फिरे नहीं कि वे अपने से पहले की उन क़ौमों का अंजाम देखते, जिन्होंने अल्लाह के रसूलों को झुठलाया था? क्या उन्होंने उन बर्बाद हुई बस्तियों और तबाह हुए घरों पर नज़र नहीं डाली? ये पिछली क़ौमें इनसे कहीं ज़्यादा तादाद में थीं, इनसे कहीं ज़्यादा ताकतवर थीं, और धरती पर इनसे बेहतर निशान छोड़ गई थीं—ऊँची इमारतें, शानदार महल, खूबसूरत बाग़ और मज़बूत किले। लेकिन जब अल्लाह का अज़ाब आया, तो उनकी ताकत, उनका धन, उनकी बड़ाई—कुछ भी उनके काम न आया। उनकी कमाई और उनके इकट्ठा किए हुए साधन उन्हें अल्लाह की पकड़ से न बचा सके।

ये क़ुरआन का वो सबक़ है जो हर ज़माने में दोहराया जाता है—इतिहास के पन्नों में दर्ज है कि जिन क़ौमों ने हक़ को झुठलाया और अल्लाह के हुक्म से मुँह मोड़ा, उनका अंजाम बर्बादी के सिवा कुछ नहीं था। आज भी अगर इंसान इन निशानियों पर ग़ौर करे, तो उसे समझ आ जाए कि असली ताकत अल्लाह के पास है, और उसकी पकड़ से बचने की कोई सूरत नहीं। ये आयत हमें दावत देती है कि हम इतिहास से सबक़ लें, अपने हालात पर नज़र डालें, और अल्लाह की तरफ़ लौट आएँ—क्योंकि जो लोग अल्लाह की राह पर चलते हैं, उन्हें दुनिया में भी इज़्ज़त मिलती है और आख़िरत में भी कामयाबी। मगर जो लोग सिर्फ़ दुनिया की चमक-दमक और अपनी ताकत पर इतराते हैं, वे एक दिन ये देख लेंगे कि उनकी सारी कमाई उनके किसी काम न आई। तो आओ, हम इन निशानियों से सबक़ लें और अपने रब की इबादत और उसके हुक्म की पैरवी को अपनी ज़िंदगी का असली मक़सद बनाएँ—यही सच्ची कामयाबी है।



📜 आयत 80-84 — सूरा ग़ाफिर

80وَلَكُمْ فِيهَا مَنَافِعُ وَلِتَبْلُغُوا عَلَيْهَا حَاجَةً فِي صُدُورِكُمْ وَعَلَيْهَا وَعَلَى الْفُلْكِ تُحْمَلُونَ
और तुम्हारे लिए उनमें (और भी) फायदे हैं और ताकि तुम उन पर (चढ़ कर) अपनी दिली मक़सद तक पहुँचो और उन पर और (नीज़) कश्तियों पर सवार फिरते हो
81وَيُرِيكُمْ آيَاتِهِ فَأَيَّ آيَاتِ اللَّهِ تُنكِرُونَ
और वह तुमको अपनी (कुदरत की) निशानियाँ दिखाता है तो तुम ख़ुदा की किन किन निशानियों को न मानोगे
82أَفَلَمْ يَسِيرُوا فِي الْأَرْضِ فَيَنظُرُوا كَيْفَ كَانَ عَاقِبَةُ الَّذِينَ مِن قَبْلِهِمْ ۚ كَانُوا أَكْثَرَ مِنْهُمْ وَأَشَدَّ قُوَّةً وَآثَارًا فِي الْأَرْضِ فَمَا أَغْنَىٰ عَنْهُم مَّا كَانُوا يَكْسِبُونَ
तो क्या ये लोग रूए ज़मीन पर चले फिरे नहीं, तो देखते कि जो लोग इनसे पहले थे उनका क्या अंजाम हुआ, जो उनसे (तादाद में) कहीं ज्यादा थे और क़ूवत और ज़मीन पर (अपनी) निशानियाँ (यादगारें) छोड़ने में भी कहीं बढ़ चढ़ कर थे तो जो कुछ उन लोगों ने किया कराया था उनके कुछ भी काम न आया
83فَلَمَّا جَاءَتْهُمْ رُسُلُهُم بِالْبَيِّنَاتِ فَرِحُوا بِمَا عِندَهُم مِّنَ الْعِلْمِ وَحَاقَ بِهِم مَّا كَانُوا بِهِ يَسْتَهْزِئُونَ
फिर जब उनके पैग़म्बर उनके पास वाज़ेए व रौशन मौजिज़े ले कर आए तो जो इल्म (अपने ख्याल में) उनके पास था उस पर नाज़िल हुए और जिस (अज़ाब) की ये लोग हँसी उड़ाते थे उसी ने उनको चारों तरफ से घेर लिया
84فَلَمَّا رَأَوْا بَأْسَنَا قَالُوا آمَنَّا بِاللَّهِ وَحْدَهُ وَكَفَرْنَا بِمَا كُنَّا بِهِ مُشْرِكِينَ
तो जब इन लोगों ने हमारे अज़ाब को देख लिया तो कहने लगे, हम यकता ख़ुदा पर ईमान लाए और जिस चीज़ को हम उसका शरीक बनाते थे हम उनको नहीं मानते
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अनुवाद — ग़ाफिर 82

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Thursday, October 1, 2026

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