ग़ाफिर · 81/85
अनुवाद उच्चारण — ग़ाफिर
وَيُرِيكُمْ آيَاتِهِ فَأَيَّ آيَاتِ اللَّهِ تُنكِرُونَ ۝٨١
Wa yureekum Aayaatihee fa ayya Aayaatil laahi tunkiroon
📖 हिंदी अर्थ
और वह तुमको अपनी (कुदरत की) निशानियाँ दिखाता है तो तुम ख़ुदा की किन किन निशानियों को न मानोगे
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • آيَاتِهِ: अल्लाह की निशानियाँ और प्रमाण, जो उसकी कुदरत (शक्ति) और वहदानियत (एकता) पर दालालत करती हैं।
  • تُنكِرُونَ: इनकार करते हो, नहीं मानते हो।

तफ़सीर:

अल्लाह तआला अपने बंदों पर बेपनाह रहमत और करम फ़रमाता है। वह तुम्हें अपनी आयतें (निशानियाँ) दिखाता है — यानी अपनी कुदरत के वो नमूने जो हर तरफ़ बिखरे हुए हैं। आसमान और ज़मीन की पैदाइश, रात और दिन का बदलना, बारिश का बरसना और ज़मीन का हरा-भरा होना, इंसान की पैदाइश और उसके अंदर के अजीबो-ग़रीब सिस्टम — ये सब अल्लाह की आयतें हैं। ये निशानियाँ इतनी साफ़ और रौशन हैं कि इन्हें देखकर कोई समझदार इंसान इनका इनकार नहीं कर सकता।

फिर अल्लाह तआला फ़रमाता है: "तो आख़िर अल्लाह की किन आयतों को तुम इनकार करोगे?" यानी जब ये सारी निशानियाँ तुम्हारे सामने मौजूद हैं और हर पल तुम्हें अल्लाह की ताक़त और हिकमत की गवाही दे रही हैं, तो फिर कौन सी आयत ऐसी है जिसे तुम नहीं मानते? क्या सूरज की रौशनी को झुठलाया जा सकता है? क्या साँस लेने की नेमत का इनकार मुमकिन है? ये सब इतने ज़ाहिर हैं कि इन्हें झुठलाना खुद अपनी आँखों को अंधा कहने के बराबर है।

यह आयत हमें ग़ौर और फ़िक्र की दावत देती है। अल्लाह ने जो निशानियाँ हमारे चारों तरफ़ फैला रखी हैं, उन पर थोड़ा सा टकटकी लगाकर देखें तो हमारा ईमान मज़बूत हो जाए। हर पत्ते का हिलना, हर दिल की धड़कन, हर साँस का अंदर-बाहर होना — ये सब अल्लाह की मुहब्बत और क़ुदरत की निशानियाँ हैं। जो इंसान इन निशानियों को पढ़ ले, उसके दिल में अल्लाह की अज़मत का डर और उसकी रहमत की उम्मीद पैदा हो जाती है।

तो ऐ बंदे! इन आयतों को पहचान, अल्लाह का शुक्र अदा कर, और अपनी ज़िंदगी को उसी की बताई हुई राह पर चला। क्योंकि जिसने अल्लाह की निशानियों को पहचान लिया, उसने अपनी कामयाबी का रास्ता पा लिया। और जो इनसे आँखें बंद कर ले, वो सिर्फ़ अपना नुक़सान करता है। अल्लाह तो अपनी आयतें दिखाता ही रहता है — हर सुबह और हर शाम, हर मौसम और हर मंज़र में — ताकि हम उसे पहचानें और उसकी इबादत करें।

🎧 सुनें

📜 आयत 79-83 — ग़ाफिर

79اللَّهُ الَّذِي جَعَلَ لَكُمُ الْأَنْعَامَ لِتَرْكَبُوا مِنْهَا وَمِنْهَا تَأْكُلُونَ
ख़ुदा ही तो वह है जिसने तुम्हारे लिए चारपाए पैदा किए ताकि तुम उनमें से किसी पर सवार होते हो और किसी को खाते हो
80وَلَكُمْ فِيهَا مَنَافِعُ وَلِتَبْلُغُوا عَلَيْهَا حَاجَةً فِي صُدُورِكُمْ وَعَلَيْهَا وَعَلَى الْفُلْكِ تُحْمَلُونَ
और तुम्हारे लिए उनमें (और भी) फायदे हैं और ताकि तुम उन पर (चढ़ कर) अपनी दिली मक़सद तक पहुँचो और उन पर और (नीज़) कश्तियों पर सवार फिरते हो
81وَيُرِيكُمْ آيَاتِهِ فَأَيَّ آيَاتِ اللَّهِ تُنكِرُونَ
और वह तुमको अपनी (कुदरत की) निशानियाँ दिखाता है तो तुम ख़ुदा की किन किन निशानियों को न मानोगे
82أَفَلَمْ يَسِيرُوا فِي الْأَرْضِ فَيَنظُرُوا كَيْفَ كَانَ عَاقِبَةُ الَّذِينَ مِن قَبْلِهِمْ ۚ كَانُوا أَكْثَرَ مِنْهُمْ وَأَشَدَّ قُوَّةً وَآثَارًا فِي الْأَرْضِ فَمَا أَغْنَىٰ عَنْهُم مَّا كَانُوا يَكْسِبُونَ
तो क्या ये लोग रूए ज़मीन पर चले फिरे नहीं, तो देखते कि जो लोग इनसे पहले थे उनका क्या अंजाम हुआ, जो उनसे (तादाद में) कहीं ज्यादा थे और क़ूवत और ज़मीन पर (अपनी) निशानियाँ (यादगारें) छोड़ने में भी कहीं बढ़ चढ़ कर थे तो जो कुछ उन लोगों ने किया कराया था उनके कुछ भी काम न आया
83فَلَمَّا جَاءَتْهُمْ رُسُلُهُم بِالْبَيِّنَاتِ فَرِحُوا بِمَا عِندَهُم مِّنَ الْعِلْمِ وَحَاقَ بِهِم مَّا كَانُوا بِهِ يَسْتَهْزِئُونَ
फिर जब उनके पैग़म्बर उनके पास वाज़ेए व रौशन मौजिज़े ले कर आए तो जो इल्म (अपने ख्याल में) उनके पास था उस पर नाज़िल हुए और जिस (अज़ाब) की ये लोग हँसी उड़ाते थे उसी ने उनको चारों तरफ से घेर लिया
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अनुवाद — ग़ाफिर 81

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Tuesday, August 18, 2026

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