Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- فَرِحُوا – वे खुश हुए, प्रसन्न हुए।
- بِمَا عِندَهُم مِّنَ الْعِلْمِ – उस ज्ञान से जो उनके पास था (अर्थात अपनी दुनियावी समझ और बुद्धि पर इतराना)।
- وَحَاقَ – उन पर उतर आया, घेर लिया, हावी हो गया।
- يَسْتَهْزِئُونَ – वे मज़ाक उड़ाते थे, उपहास करते थे।
विस्तृत तफ़सीर:
जब अल्लाह के रसूल (पैगंबर) इन झुठलाने वाली क़ौमों के पास साफ़-साफ़ निशानियाँ और चमत्कारी सबूत लेकर आए, तो उन्होंने उन्हें मानने के बजाय अपनी उसी दुनियावी जानकारी और समझ पर इतराना शुरू कर दिया, जो उनके पास पहले से थी। वे समझते थे कि हमें जो ज्ञान मिला है, वही काफ़ी है, हमें किसी और की बात की ज़रूरत नहीं। उन्होंने रसूलों के पैग़ाम को ठुकरा दिया और अपनी ही बुद्धि को सबसे बड़ा सच मान लिया। यही उनकी सबसे बड़ी भूल थी।
फिर उन पर वह अज़ाब आ पड़ा, जिसका वे मज़ाक उड़ाया करते थे। जब रसूल उन्हें अल्लाह के अज़ाब से डराते थे, तो वे हँसते थे और कहते थे: "हमें तो कोई अज़ाब आता नहीं दिखता, तुम तो बस डरा रहे हो।" लेकिन जब वह अज़ाब आ गया, तो उनकी सारी दुनियावी जानकारी, उनकी बुद्धि, उनकी ताक़त — कुछ भी काम न आई। वह अज़ाब उन पर इस तरह हावी हो गया कि उनके पास कोई राह न बची।
इस आयत में एक बहुत बड़ी नसीहत है: जो ज्ञान या विज्ञान अल्लाह के दीन (इस्लाम) के ख़िलाफ़ जाए, या उस पर शक पैदा करे, या उसे बुरा कहे — वह ज्ञान हक़ीक़त में ज्ञान नहीं, बल्कि गुमराही है। सच्चा ज्ञान वही है जो इंसान को अल्लाह के करीब ले जाए, उसकी इबादत की तरफ़ राह दिखाए, और उसके रसूलों की तालीमात को सच माने। जो इंसान अपनी दुनियावी समझ को दीन पर तरजीह देता है, वह उसी अंजाम से दो-चार होता है जिसका ज़िक्र इस आयत में किया गया है।
प्यारे भाइयों और बहनों! हमें चाहिए कि हम अपने ज्ञान और समझ को अल्लाह की वही और रसूल ﷺ की सुन्नत के आगे झुकाएँ। यही कामयाबी की राह है। जो लोग अपने इल्म पर इतराते हैं और हक़ को नहीं मानते, उनका अंजाम बहुत बुरा होता है। अल्लाह हमें हक़ समझने और उस पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 81-85 — सूरा ग़ाफिर
अनुवाद — ग़ाफिर 83
सूरा ग़ाफिर आयत 83 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : फिर जब उनके पैग़म्बर उनके पास वाज़ेए व रौशन मौजिज़े…सूरा आयत 83/85 — सूरा ग़ाफिर غافر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा ग़ाफिर सुनें, सूरा ग़ाफिर अनुवाद, सूरा ग़ाफिर mp3, सूरा ग़ाफिर pdf. आयत 81–85. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
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