ग़ाफिर · 83/85
अनुवाद उच्चारण — ग़ाफिर
فَلَمَّا جَاءَتْهُمْ رُسُلُهُم بِالْبَيِّنَاتِ فَرِحُوا بِمَا عِندَهُم مِّنَ الْعِلْمِ وَحَاقَ بِهِم مَّا كَانُوا بِهِ يَسْتَهْزِئُونَ ۝٨٣
Falammaa jaaa`at hum Rusuluhum bilbaiyinaati farihoo bimaa `indahum minal `ilmi wa haaqa bihim maa kaanoo bihee yastahzi`oon
📖 हिंदी अर्थ
फिर जब उनके पैग़म्बर उनके पास वाज़ेए व रौशन मौजिज़े ले कर आए तो जो इल्म (अपने ख्याल में) उनके पास था उस पर नाज़िल हुए और जिस (अज़ाब) की ये लोग हँसी उड़ाते थे उसी ने उनको चारों तरफ से घेर लिया
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَرِحُوا – वे खुश हुए, प्रसन्न हुए।
  • بِمَا عِندَهُم مِّنَ الْعِلْمِ – उस ज्ञान से जो उनके पास था (अर्थात अपनी दुनियावी समझ और बुद्धि पर इतराना)।
  • وَحَاقَ – उन पर उतर आया, घेर लिया, हावी हो गया।
  • يَسْتَهْزِئُونَ – वे मज़ाक उड़ाते थे, उपहास करते थे।

विस्तृत तफ़सीर:

जब अल्लाह के रसूल (पैगंबर) इन झुठलाने वाली क़ौमों के पास साफ़-साफ़ निशानियाँ और चमत्कारी सबूत लेकर आए, तो उन्होंने उन्हें मानने के बजाय अपनी उसी दुनियावी जानकारी और समझ पर इतराना शुरू कर दिया, जो उनके पास पहले से थी। वे समझते थे कि हमें जो ज्ञान मिला है, वही काफ़ी है, हमें किसी और की बात की ज़रूरत नहीं। उन्होंने रसूलों के पैग़ाम को ठुकरा दिया और अपनी ही बुद्धि को सबसे बड़ा सच मान लिया। यही उनकी सबसे बड़ी भूल थी।

फिर उन पर वह अज़ाब आ पड़ा, जिसका वे मज़ाक उड़ाया करते थे। जब रसूल उन्हें अल्लाह के अज़ाब से डराते थे, तो वे हँसते थे और कहते थे: "हमें तो कोई अज़ाब आता नहीं दिखता, तुम तो बस डरा रहे हो।" लेकिन जब वह अज़ाब आ गया, तो उनकी सारी दुनियावी जानकारी, उनकी बुद्धि, उनकी ताक़त — कुछ भी काम न आई। वह अज़ाब उन पर इस तरह हावी हो गया कि उनके पास कोई राह न बची।

इस आयत में एक बहुत बड़ी नसीहत है: जो ज्ञान या विज्ञान अल्लाह के दीन (इस्लाम) के ख़िलाफ़ जाए, या उस पर शक पैदा करे, या उसे बुरा कहे — वह ज्ञान हक़ीक़त में ज्ञान नहीं, बल्कि गुमराही है। सच्चा ज्ञान वही है जो इंसान को अल्लाह के करीब ले जाए, उसकी इबादत की तरफ़ राह दिखाए, और उसके रसूलों की तालीमात को सच माने। जो इंसान अपनी दुनियावी समझ को दीन पर तरजीह देता है, वह उसी अंजाम से दो-चार होता है जिसका ज़िक्र इस आयत में किया गया है।

प्यारे भाइयों और बहनों! हमें चाहिए कि हम अपने ज्ञान और समझ को अल्लाह की वही और रसूल ﷺ की सुन्नत के आगे झुकाएँ। यही कामयाबी की राह है। जो लोग अपने इल्म पर इतराते हैं और हक़ को नहीं मानते, उनका अंजाम बहुत बुरा होता है। अल्लाह हमें हक़ समझने और उस पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 81-85 — ग़ाफिर

81وَيُرِيكُمْ آيَاتِهِ فَأَيَّ آيَاتِ اللَّهِ تُنكِرُونَ
और वह तुमको अपनी (कुदरत की) निशानियाँ दिखाता है तो तुम ख़ुदा की किन किन निशानियों को न मानोगे
82أَفَلَمْ يَسِيرُوا فِي الْأَرْضِ فَيَنظُرُوا كَيْفَ كَانَ عَاقِبَةُ الَّذِينَ مِن قَبْلِهِمْ ۚ كَانُوا أَكْثَرَ مِنْهُمْ وَأَشَدَّ قُوَّةً وَآثَارًا فِي الْأَرْضِ فَمَا أَغْنَىٰ عَنْهُم مَّا كَانُوا يَكْسِبُونَ
तो क्या ये लोग रूए ज़मीन पर चले फिरे नहीं, तो देखते कि जो लोग इनसे पहले थे उनका क्या अंजाम हुआ, जो उनसे (तादाद में) कहीं ज्यादा थे और क़ूवत और ज़मीन पर (अपनी) निशानियाँ (यादगारें) छोड़ने में भी कहीं बढ़ चढ़ कर थे तो जो कुछ उन लोगों ने किया कराया था उनके कुछ भी काम न आया
83فَلَمَّا جَاءَتْهُمْ رُسُلُهُم بِالْبَيِّنَاتِ فَرِحُوا بِمَا عِندَهُم مِّنَ الْعِلْمِ وَحَاقَ بِهِم مَّا كَانُوا بِهِ يَسْتَهْزِئُونَ
फिर जब उनके पैग़म्बर उनके पास वाज़ेए व रौशन मौजिज़े ले कर आए तो जो इल्म (अपने ख्याल में) उनके पास था उस पर नाज़िल हुए और जिस (अज़ाब) की ये लोग हँसी उड़ाते थे उसी ने उनको चारों तरफ से घेर लिया
84فَلَمَّا رَأَوْا بَأْسَنَا قَالُوا آمَنَّا بِاللَّهِ وَحْدَهُ وَكَفَرْنَا بِمَا كُنَّا بِهِ مُشْرِكِينَ
तो जब इन लोगों ने हमारे अज़ाब को देख लिया तो कहने लगे, हम यकता ख़ुदा पर ईमान लाए और जिस चीज़ को हम उसका शरीक बनाते थे हम उनको नहीं मानते
85فَلَمْ يَكُ يَنفَعُهُمْ إِيمَانُهُمْ لَمَّا رَأَوْا بَأْسَنَا ۖ سُنَّتَ اللَّهِ الَّتِي قَدْ خَلَتْ فِي عِبَادِهِ ۖ وَخَسِرَ هُنَالِكَ الْكَافِرُونَ
तो जब उन लोगों ने हमारा (अज़ाब) आते देख लिया तो अब उनका ईमान लाना कुछ भी फायदेमन्द नहीं हो सकता (ये) ख़ुदा की आदत (है) जो अपने बन्दों के बारे में (सदा से) चली आती है और काफ़िर लोग इस वक्त घाटे मे रहे
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अनुवाद — ग़ाफिर 83

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Tuesday, August 18, 2026

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