Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- रिहन सरसरन: अत्यंत ठंडी और तेज़ आवाज़ वाली हवा, जो अपनी कड़कड़ाती ठंड से चीज़ों को जला देती है।
- अय्यामिन नहिसात: वे दिन जो उनके लिए अशुभ और संकट वाले थे, जिनमें अल्लाह का अज़ाब उन पर उतरा।
- अज़ाबल खिज़ी: वह यातना जो अपमान और रुसवाई का कारण बने।
- अख्ज़ा: अधिक अपमानित करने वाला, और भी बड़ी रुसवाई वाला।
- ला युन्सरून: उन्हें कोई सहायता नहीं मिलेगी, कोई उन्हें अज़ाब से बचाने वाला नहीं होगा।
तफ़सीर (व्याख्या):
जब आद की क़ौम ने हक़ को ठुकराया और अपने नबी हूद (अलैहिस्सलाम) की नसीहत को न माना, तो अल्लाह ने उन पर अपना क़हर भेजा। उन पर एक ऐसी तेज़ और कड़कड़ाती ठंडी हवा भेजी गई जिसकी आवाज़ से दिल दहल जाते थे और जो अपनी सख्त ठंड से हर चीज़ को तबाह कर देती थी। यह अज़ाब उन पर ऐसे दिनों में आया जो उनके लिए बदनसीबी और संकट के दिन थे—लगातार सात रातें और आठ दिन, जिनमें अल्लाह की रहमत उनसे छीन ली गई।
इस अज़ाब का मक़सद यह था कि उन्हें दुनिया की ज़िंदगी में ही रुसवाई और अपमान का मज़ा चखाया जाए, ताकि वे जान लें कि अल्लाह की नाफ़रमानी का अंजाम कितना बुरा होता है। यह अज़ाब सिर्फ़ उनके शरीर को तकलीफ़ देने के लिए नहीं था, बल्कि उनकी इज़्ज़त और शान को मिट्टी में मिलाने के लिए था, क्योंकि जब अल्लाह किसी क़ौम को ज़लील करता है तो उसका कोई बचाव नहीं होता।
लेकिन याद रखो—यह दुनिया का अज़ाब तो उन्होंने भुगत लिया, मगर आख़िरत का अज़ाब उससे कहीं ज़्यादा सख्त और अपमानजनक होगा। दुनिया की यातना तो ख़त्म हो जाती है, लेकिन आख़िरत की यातना हमेशा रहने वाली है। उस दिन उन्हें कोई मदद करने वाला नहीं होगा, न कोई सिफ़ारिशी, न कोई बचाने वाला। वे पूरी तरह अकेले होंगे, अल्लाह के सामने ज़लील और बेबस खड़े होंगे।
इस आयत में हमारे लिए बड़ी सीख है कि अल्लाह की नाफ़रमानी से बचें और उसके हुक्मों को मानें। यह क़िस्सा हमें बताता है कि अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है, लेकिन साथ ही वह बहुत रहम करने वाला भी है। जो लोग उसकी तरफ़ लौट आते हैं, उनके लिए उसकी रहमत के दरवाज़े खुले हैं। हमें चाहिए कि हम उन क़ौमों के अंजाम से सबक़ लें और अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक़ बनाएं, ताकि दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाब हों।
📜 आयत 14-18 — सूरा फुस्सिलत
अनुवाद — फुस्सिलत 16
सूरा फुस्सिलत आयत 16 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो हमने भी (तो उनके) नहूसत के दिनों में उन…सूरा आयत 16/54 — सूरा फुस्सिलत فصلت (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा फुस्सिलत सुनें, सूरा फुस्सिलत अनुवाद, सूरा फुस्सिलत mp3, सूरा फुस्सिलत pdf. आयत 14–18. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा फुस्सिलत
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


