फुस्सिलत · 16/54
अनुवाद उच्चारण — सूरा फुस्सिलत
فَأَرْسَلْنَا عَلَيْهِمْ رِيحًا صَرْصَرًا فِي أَيَّامٍ نَّحِسَاتٍ لِّنُذِيقَهُمْ عَذَابَ الْخِزْيِ فِي الْحَيَاةِ الدُّنْيَا ۖ وَلَعَذَابُ الْآخِرَةِ أَخْزَىٰ ۖ وَهُمْ لَا يُنصَرُونَ ۝١٦
Fa arsalnaa `alaihim reehan sarsaran feee ayyaamin nahisaatil linuzeeqahum `azaabal khizyi fil hayaatid dunyaa wa la`azaabul Aakhirati akhzaa wa hum laa yunsaroon
📖 हिंदी अर्थ
तो हमने भी (तो उनके) नहूसत के दिनों में उन पर बड़ी ज़ोरों की ऑंधी चलाई ताकि दुनिया की ज़िन्दगी में भी उनको रूसवाई के अज़ाब का मज़ा चखा दें और आखेरत का अज़ाब तो और ज्यादा रूसवा करने वाला ही होगा और (फिर) उनको कहीं से मदद भी न मिलेगी

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • रिहन सरसरन: अत्यंत ठंडी और तेज़ आवाज़ वाली हवा, जो अपनी कड़कड़ाती ठंड से चीज़ों को जला देती है।
  • अय्यामिन नहिसात: वे दिन जो उनके लिए अशुभ और संकट वाले थे, जिनमें अल्लाह का अज़ाब उन पर उतरा।
  • अज़ाबल खिज़ी: वह यातना जो अपमान और रुसवाई का कारण बने।
  • अख्ज़ा: अधिक अपमानित करने वाला, और भी बड़ी रुसवाई वाला।
  • ला युन्सरून: उन्हें कोई सहायता नहीं मिलेगी, कोई उन्हें अज़ाब से बचाने वाला नहीं होगा।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब आद की क़ौम ने हक़ को ठुकराया और अपने नबी हूद (अलैहिस्सलाम) की नसीहत को न माना, तो अल्लाह ने उन पर अपना क़हर भेजा। उन पर एक ऐसी तेज़ और कड़कड़ाती ठंडी हवा भेजी गई जिसकी आवाज़ से दिल दहल जाते थे और जो अपनी सख्त ठंड से हर चीज़ को तबाह कर देती थी। यह अज़ाब उन पर ऐसे दिनों में आया जो उनके लिए बदनसीबी और संकट के दिन थे—लगातार सात रातें और आठ दिन, जिनमें अल्लाह की रहमत उनसे छीन ली गई।

इस अज़ाब का मक़सद यह था कि उन्हें दुनिया की ज़िंदगी में ही रुसवाई और अपमान का मज़ा चखाया जाए, ताकि वे जान लें कि अल्लाह की नाफ़रमानी का अंजाम कितना बुरा होता है। यह अज़ाब सिर्फ़ उनके शरीर को तकलीफ़ देने के लिए नहीं था, बल्कि उनकी इज़्ज़त और शान को मिट्टी में मिलाने के लिए था, क्योंकि जब अल्लाह किसी क़ौम को ज़लील करता है तो उसका कोई बचाव नहीं होता।

लेकिन याद रखो—यह दुनिया का अज़ाब तो उन्होंने भुगत लिया, मगर आख़िरत का अज़ाब उससे कहीं ज़्यादा सख्त और अपमानजनक होगा। दुनिया की यातना तो ख़त्म हो जाती है, लेकिन आख़िरत की यातना हमेशा रहने वाली है। उस दिन उन्हें कोई मदद करने वाला नहीं होगा, न कोई सिफ़ारिशी, न कोई बचाने वाला। वे पूरी तरह अकेले होंगे, अल्लाह के सामने ज़लील और बेबस खड़े होंगे।

इस आयत में हमारे लिए बड़ी सीख है कि अल्लाह की नाफ़रमानी से बचें और उसके हुक्मों को मानें। यह क़िस्सा हमें बताता है कि अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है, लेकिन साथ ही वह बहुत रहम करने वाला भी है। जो लोग उसकी तरफ़ लौट आते हैं, उनके लिए उसकी रहमत के दरवाज़े खुले हैं। हमें चाहिए कि हम उन क़ौमों के अंजाम से सबक़ लें और अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक़ बनाएं, ताकि दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाब हों।



📜 आयत 14-18 — सूरा फुस्सिलत

14إِذْ جَاءَتْهُمُ الرُّسُلُ مِن بَيْنِ أَيْدِيهِمْ وَمِنْ خَلْفِهِمْ أَلَّا تَعْبُدُوا إِلَّا اللَّهَ ۖ قَالُوا لَوْ شَاءَ رَبُّنَا لَأَنزَلَ مَلَائِكَةً فَإِنَّا بِمَا أُرْسِلْتُم بِهِ كَافِرُونَ
जब उनके पास उनके आगे से और पीछे से पैग़म्बर (ये ख़बर लेकर) आए कि ख़ुदा के सिवा किसी की इबादत न करो तो कहने लगे कि अगर हमारा परवरदिगार चाहता तो फ़रिश्ते नाज़िल करता और जो (बातें) देकर तुम लोग भेजे गए हो हम तो उसे नहीं मानते
15فَأَمَّا عَادٌ فَاسْتَكْبَرُوا فِي الْأَرْضِ بِغَيْرِ الْحَقِّ وَقَالُوا مَنْ أَشَدُّ مِنَّا قُوَّةً ۖ أَوَلَمْ يَرَوْا أَنَّ اللَّهَ الَّذِي خَلَقَهُمْ هُوَ أَشَدُّ مِنْهُمْ قُوَّةً ۖ وَكَانُوا بِآيَاتِنَا يَجْحَدُونَ
तो आद नाहक़ रूए ज़मीन में ग़ुरूर करने लगे और कहने लगे कि हम से बढ़ के क़ूवत में कौन है, क्या उन लोगों ने इतना भी ग़ौर न किया कि ख़ुदा जिसने उनको पैदा किया है वह उनसे क़ूवत में कहीं बढ़ के है, ग़रज़ वह लोग हमारी आयतों से इन्कार ही करते रहे
16فَأَرْسَلْنَا عَلَيْهِمْ رِيحًا صَرْصَرًا فِي أَيَّامٍ نَّحِسَاتٍ لِّنُذِيقَهُمْ عَذَابَ الْخِزْيِ فِي الْحَيَاةِ الدُّنْيَا ۖ وَلَعَذَابُ الْآخِرَةِ أَخْزَىٰ ۖ وَهُمْ لَا يُنصَرُونَ
तो हमने भी (तो उनके) नहूसत के दिनों में उन पर बड़ी ज़ोरों की ऑंधी चलाई ताकि दुनिया की ज़िन्दगी में भी उनको रूसवाई के अज़ाब का मज़ा चखा दें और आखेरत का अज़ाब तो और ज्यादा रूसवा करने वाला ही होगा और (फिर) उनको कहीं से मदद भी न मिलेगी
17وَأَمَّا ثَمُودُ فَهَدَيْنَاهُمْ فَاسْتَحَبُّوا الْعَمَىٰ عَلَى الْهُدَىٰ فَأَخَذَتْهُمْ صَاعِقَةُ الْعَذَابِ الْهُونِ بِمَا كَانُوا يَكْسِبُونَ
और रहे समूद तो हमने उनको सीधा रास्ता दिखाया, मगर उन लोगों ने हिदायत के मुक़ाबले में गुमराही को पसन्द किया तो उन की करतूतों की बदौलत ज़िल्लत के अज़ाब की बिजली ने उनको ले डाला
18وَنَجَّيْنَا الَّذِينَ آمَنُوا وَكَانُوا يَتَّقُونَ
और जो लोग ईमान लाए और परहेज़गारी करते थे उनको हमने (इस) मुसीबत से बचा लिया
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अनुवाद — फुस्सिलत 16

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Monday, September 28, 2026

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