फुस्सिलत · 15/54
अनुवाद उच्चारण — फुस्सिलत
فَأَمَّا عَادٌ فَاسْتَكْبَرُوا فِي الْأَرْضِ بِغَيْرِ الْحَقِّ وَقَالُوا مَنْ أَشَدُّ مِنَّا قُوَّةً ۖ أَوَلَمْ يَرَوْا أَنَّ اللَّهَ الَّذِي خَلَقَهُمْ هُوَ أَشَدُّ مِنْهُمْ قُوَّةً ۖ وَكَانُوا بِآيَاتِنَا يَجْحَدُونَ ۝١٥
Fa ammaa `Aadun fastak baroo fil ardi bighairul haqqi wa qaaloo man ashaddu minnaa quwwatan awalam yaraw annal laahal lazee khalaqahum Huwa ashaddu minhum quwwatanw wa kaanoo bi Aayaatinaa yajhadoon
📖 हिंदी अर्थ
तो आद नाहक़ रूए ज़मीन में ग़ुरूर करने लगे और कहने लगे कि हम से बढ़ के क़ूवत में कौन है, क्या उन लोगों ने इतना भी ग़ौर न किया कि ख़ुदा जिसने उनको पैदा किया है वह उनसे क़ूवत में कहीं बढ़ के है, ग़रज़ वह लोग हमारी आयतों से इन्कार ही करते रहे

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَاسْتَكْبَرُوا: उन्होंने घमंड और अहंकार किया।
  • بِغَيْرِ الْحَقِّ: बिना किसी सही कारण के, अत्याचार के साथ।
  • مَنْ أَشَدُّ مِنَّا قُوَّةً: हमसे ज़्यादा ताकतवर कौन है?
  • يَجْحَدُونَ: इनकार करते थे, झुठलाते थे।

तफसीर (व्याख्या):

आद की क़ौम, जो हूद अलैहिस्सलाम की उम्मत थी, ने अपने रब की नेमतों को भुला दिया और ज़मीन में सरकशी और घमंड किया। उन्होंने लोगों पर ज़ुल्म किया और अपनी ताकत पर इतना नाज़ किया कि कहने लगे: "हमसे ज़्यादा ताकतवर कौन है?" उन्हें अपने बड़े-बड़े जिस्म और मज़बूत इमारतों पर नाज़ था, और वे समझते थे कि कोई उन्हें हरा नहीं सकता। अल्लाह तआला ने उन्हें नसीहत की और उनकी इस ग़लत फ़िक्र का जवाब दिया: क्या उन्होंने यह नहीं देखा कि जिस अल्लाह ने उन्हें पैदा किया, उन्हें ताकत दी, उनके जिस्म बनाए, वही उनसे कहीं ज़्यादा ताकतवर है? जो ताकत उन्हें दी गई थी, वह अल्लाह ही की दी हुई थी, और जो अल्लाह दे सकता है, वह छीन भी सकता है। इसके बावजूद वे अल्लाह की आयतों और निशानियों को जानते-बूझते हुए झुठलाते रहे, और हूद अलैहिस्सलाम के लाए हुए सबूतों को मानने से इनकार करते रहे।

दावती पहलू:

यह क़िस्सा हमारे लिए एक बड़ी सबक़ है। इंसान चाहे कितना ही ताकतवर, अमीर या बड़ा क्यों न हो जाए, उसे यह कभी नहीं भूलना चाहिए कि उसकी सारी ताकत, सारी नेमतें अल्लाह ही की दी हुई हैं। जिस अल्लाह ने हमें पैदा किया, वही हमारा मालिक है, और उसी की ताकत सबसे बड़ी है। हमें चाहिए कि अपनी ताकत और हैसियत पर घमंड न करें, बल्कि अल्लाह के आगे झुकें, उसकी आयतों को मानें और उसके हुक्मों पर चलें। याद रखिए, अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है, और घमंड करने वालों का अंजाम हमेशा बुरा ही होता है। आद की क़ौम का अंजाम देखिए — उनकी ताकत उनके किसी काम न आई, और वे अल्लाह के अज़ाब से बच न सके। इसलिए हमें चाहिए कि हम अल्लाह के सामने इन्क़ियाद (आज्ञाकारिता) अपनाएँ और उसकी रहमत के तलबगार बनें।



📜 आयत 13-17 — फुस्सिलत

13فَإِنْ أَعْرَضُوا فَقُلْ أَنذَرْتُكُمْ صَاعِقَةً مِّثْلَ صَاعِقَةِ عَادٍ وَثَمُودَ
फिर अगर हम पर भी ये कुफ्फार मुँह फेरें तो कह दो कि मैं तुम को ऐसी बिजली गिरने (के अज़ाब से) डराता हूँ जैसी क़ौम आद व समूद की बिजली की कड़क
14إِذْ جَاءَتْهُمُ الرُّسُلُ مِن بَيْنِ أَيْدِيهِمْ وَمِنْ خَلْفِهِمْ أَلَّا تَعْبُدُوا إِلَّا اللَّهَ ۖ قَالُوا لَوْ شَاءَ رَبُّنَا لَأَنزَلَ مَلَائِكَةً فَإِنَّا بِمَا أُرْسِلْتُم بِهِ كَافِرُونَ
जब उनके पास उनके आगे से और पीछे से पैग़म्बर (ये ख़बर लेकर) आए कि ख़ुदा के सिवा किसी की इबादत न करो तो कहने लगे कि अगर हमारा परवरदिगार चाहता तो फ़रिश्ते नाज़िल करता और जो (बातें) देकर तुम लोग भेजे गए हो हम तो उसे नहीं मानते
15فَأَمَّا عَادٌ فَاسْتَكْبَرُوا فِي الْأَرْضِ بِغَيْرِ الْحَقِّ وَقَالُوا مَنْ أَشَدُّ مِنَّا قُوَّةً ۖ أَوَلَمْ يَرَوْا أَنَّ اللَّهَ الَّذِي خَلَقَهُمْ هُوَ أَشَدُّ مِنْهُمْ قُوَّةً ۖ وَكَانُوا بِآيَاتِنَا يَجْحَدُونَ
तो आद नाहक़ रूए ज़मीन में ग़ुरूर करने लगे और कहने लगे कि हम से बढ़ के क़ूवत में कौन है, क्या उन लोगों ने इतना भी ग़ौर न किया कि ख़ुदा जिसने उनको पैदा किया है वह उनसे क़ूवत में कहीं बढ़ के है, ग़रज़ वह लोग हमारी आयतों से इन्कार ही करते रहे
16فَأَرْسَلْنَا عَلَيْهِمْ رِيحًا صَرْصَرًا فِي أَيَّامٍ نَّحِسَاتٍ لِّنُذِيقَهُمْ عَذَابَ الْخِزْيِ فِي الْحَيَاةِ الدُّنْيَا ۖ وَلَعَذَابُ الْآخِرَةِ أَخْزَىٰ ۖ وَهُمْ لَا يُنصَرُونَ
तो हमने भी (तो उनके) नहूसत के दिनों में उन पर बड़ी ज़ोरों की ऑंधी चलाई ताकि दुनिया की ज़िन्दगी में भी उनको रूसवाई के अज़ाब का मज़ा चखा दें और आखेरत का अज़ाब तो और ज्यादा रूसवा करने वाला ही होगा और (फिर) उनको कहीं से मदद भी न मिलेगी
17وَأَمَّا ثَمُودُ فَهَدَيْنَاهُمْ فَاسْتَحَبُّوا الْعَمَىٰ عَلَى الْهُدَىٰ فَأَخَذَتْهُمْ صَاعِقَةُ الْعَذَابِ الْهُونِ بِمَا كَانُوا يَكْسِبُونَ
और रहे समूद तो हमने उनको सीधा रास्ता दिखाया, मगर उन लोगों ने हिदायत के मुक़ाबले में गुमराही को पसन्द किया तो उन की करतूतों की बदौलत ज़िल्लत के अज़ाब की बिजली ने उनको ले डाला
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अनुवाद — फुस्सिलत 15

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Tuesday, August 18, 2026

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