अल-अहकाफ · 16/35
अनुवाद उच्चारण — अल-अहकाफ
أُولَٰئِكَ الَّذِينَ نَتَقَبَّلُ عَنْهُمْ أَحْسَنَ مَا عَمِلُوا وَنَتَجَاوَزُ عَن سَيِّئَاتِهِمْ فِي أَصْحَابِ الْجَنَّةِ ۖ وَعْدَ الصِّدْقِ الَّذِي كَانُوا يُوعَدُونَ ۝١٦
Ulaaa`ikal lazeena nata qabbalu `anhum ahsana maa `amiloo wa natajaawazu `an saiyiaatihim feee Ashaabil jannati Wa`das sidqil lazee kaanoo yoo`adoon
📖 हिंदी अर्थ
यही वह लोग हैं जिनके नेक अमल हम क़ुबूल फरमाएँगे और बेहिश्त (के जाने) वालों में उनके गुनाहों से दरग़ुज़र करेंगे (ये वह) सच्चा वायदा है जो उन से किया जाता था

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • نَتَقَبَّلُ – हम स्वीकार करते हैं, कबूल करते हैं।
  • أَحْسَنَ مَا عَمِلُوا – उनके सबसे अच्छे कर्म, यानी उनके नेक और पुण्यमय कार्य।
  • نَتَجَاوَزُ – हम दरगुज़र करते हैं, माफ कर देते हैं।
  • سَيِّئَاتِهِمْ – उनकी बुराइयाँ और गुनाह।
  • فِي أَصْحَابِ الْجَنَّةِ – जन्नत वालों के साथ, यानी उन्हीं के जत्थे में शामिल करके।
  • وَعْدَ الصِّدْقِ – सच्चा और पक्का वादा, जिसमें कोई झूठ या खिलाफ़ नहीं।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन खुशनसीब लोगों का ज़िक्र कर रही है जिन्होंने अपने माँ-बाप के साथ भलाई की, उनकी इज़्ज़त की, और अपने ईमान व अच्छे आचरण से अल्लाह की रज़ा हासिल की। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि यही वे लोग हैं जिनके सबसे अच्छे कर्मों को हम कबूल करते हैं — यानी उनकी नेकियों को हम अपनी रहमत से स्वीकार कर लेते हैं, चाहे वे कितनी ही छोटी क्यों न हों। और उनकी बुराइयों से हम दरगुज़र करते हैं, यानी उनके गुनाहों को माफ कर देते हैं, उन्हें पकड़ते नहीं, और उन पर उन्हें सज़ा नहीं देते।

और यह सब कुछ उन्हें "जन्नत वालों के साथ" मिलेगा — यानी वे जन्नत के उन्हीं लोगों के जत्थे में शामिल होंगे, उन्हीं के साथ रहेंगे, और उन्हीं की तरह इज़्ज़त और आराम पाएँगे। यह कोई अलग चीज़ नहीं, बल्कि यह वही सच्चा वादा है जो अल्लाह ने उन्हें दुनिया में दिया था — कि जो लोग ईमान लाए और अच्छे कर्म करते रहे, उनके लिए जन्नत है। अल्लाह का वादा कभी झूठा नहीं होता, और यह वादा पूरा होकर रहेगा।


दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):

यह आयत हर उस इंसान के लिए खुशखबरी है जो यह सोचता है कि मेरे गुनाह बहुत ज़्यादा हैं, मैं क्या करूँगा? अल्लाह तआला फ़रमा रहा है कि अगर तुम नेक काम करते हो, तो अल्लाह उन्हें कबूल करता है — और तुम्हारी बुराइयों को माफ कर देता है। यह अल्लाह की रहमत का समंदर है! वह चाहता है कि उसके बंदे उसकी तरफ़ रुजू करें, निराश न हों। जो लोग अपने माँ-बाप के साथ भलाई करते हैं, अल्लाह की इबादत में जुड़े रहते हैं, और अपनी ज़िंदगी को सुधारते हैं — उनके लिए अल्लाह ने जन्नत का पक्का वादा किया है। यह वादा सच्चा है, इसमें कोई शक नहीं। तो आइए, हम भी अपने कर्मों को सुधारें, अल्लाह से तौबा करें, और उसकी रहमत के इस दरवाज़े का फ़ायदा उठाएँ — क्योंकि अल्लाह का दरवाज़ा हमेशा खुला है, और उसकी माफ़ी हर गुनाह से बड़ी है।



📜 आयत 14-18 — अल-अहकाफ

14أُولَٰئِكَ أَصْحَابُ الْجَنَّةِ خَالِدِينَ فِيهَا جَزَاءً بِمَا كَانُوا يَعْمَلُونَ
यही तो अहले जन्नत हैं कि हमेशा उसमें रहेंगे (ये) उसका सिला है जो ये लोग (दुनिया में) किया करते थे
15وَوَصَّيْنَا الْإِنسَانَ بِوَالِدَيْهِ إِحْسَانًا ۖ حَمَلَتْهُ أُمُّهُ كُرْهًا وَوَضَعَتْهُ كُرْهًا ۖ وَحَمْلُهُ وَفِصَالُهُ ثَلَاثُونَ شَهْرًا ۚ حَتَّىٰ إِذَا بَلَغَ أَشُدَّهُ وَبَلَغَ أَرْبَعِينَ سَنَةً قَالَ رَبِّ أَوْزِعْنِي أَنْ أَشْكُرَ نِعْمَتَكَ الَّتِي أَنْعَمْتَ عَلَيَّ وَعَلَىٰ وَالِدَيَّ وَأَنْ أَعْمَلَ صَالِحًا تَرْضَاهُ وَأَصْلِحْ لِي فِي ذُرِّيَّتِي ۖ إِنِّي تُبْتُ إِلَيْكَ وَإِنِّي مِنَ الْمُسْلِمِينَ
और हमने इन्सान को अपने माँ बाप के साथ भलाई करने का हुक्म दिया (क्यों कि) उसकी माँ ने रंज ही की हालत में उसको पेट में रखा और रंज ही से उसको जना और उसका पेट में रहना और उसको दूध बढ़ाई के तीस महीने हुए यहाँ तक कि जब अपनी पूरी जवानी को पहुँचता और चालीस बरस (के सिन) को पहुँचता है तो (ख़ुदा से) अर्ज़ करता है परवरदिगार तो मुझे तौफ़ीक़ अता फरमा कि तूने जो एहसानात मुझ पर और मेरे वालदैन पर किये हैं मैं उन एहसानों का शुक्रिया अदा करूँ और ये (भी तौफीक दे) कि मैं ऐसा नेक काम करूँ जिसे तू पसन्द करे और मेरे लिए मेरी औलाद में सुलाह व तक़वा पैदा करे तेरी तरफ रूजू करता हूँ और मैं यक़ीनन फरमाबरदारो में हूँ
16أُولَٰئِكَ الَّذِينَ نَتَقَبَّلُ عَنْهُمْ أَحْسَنَ مَا عَمِلُوا وَنَتَجَاوَزُ عَن سَيِّئَاتِهِمْ فِي أَصْحَابِ الْجَنَّةِ ۖ وَعْدَ الصِّدْقِ الَّذِي كَانُوا يُوعَدُونَ
यही वह लोग हैं जिनके नेक अमल हम क़ुबूल फरमाएँगे और बेहिश्त (के जाने) वालों में उनके गुनाहों से दरग़ुज़र करेंगे (ये वह) सच्चा वायदा है जो उन से किया जाता था
17وَالَّذِي قَالَ لِوَالِدَيْهِ أُفٍّ لَّكُمَا أَتَعِدَانِنِي أَنْ أُخْرَجَ وَقَدْ خَلَتِ الْقُرُونُ مِن قَبْلِي وَهُمَا يَسْتَغِيثَانِ اللَّهَ وَيْلَكَ آمِنْ إِنَّ وَعْدَ اللَّهِ حَقٌّ فَيَقُولُ مَا هَٰذَا إِلَّا أَسَاطِيرُ الْأَوَّلِينَ
और जिसने अपने माँ बाप से कहा कि तुम्हारा बुरा हो, क्या तुम मुझे धमकी देते हो कि मैं दोबारा (कब्र से) निकाला जाऊँगा हालॉकि बहुत से लोग मुझसे पहले गुज़र चुके (और कोई ज़िन्दा न हुआ) और दोनों फ़रियाद कर रहे थे कि तुझ पर वाए हो ईमान ले आ ख़ुदा का वायदा ज़रूर सच्चा है तो वह बोल उठा कि ये तो बस अगले लोगों के अफ़साने हैं
18أُولَٰئِكَ الَّذِينَ حَقَّ عَلَيْهِمُ الْقَوْلُ فِي أُمَمٍ قَدْ خَلَتْ مِن قَبْلِهِم مِّنَ الْجِنِّ وَالْإِنسِ ۖ إِنَّهُمْ كَانُوا خَاسِرِينَ
ये वही लोग हैं कि जिन्नात और आदमियों की (दूसरी) उम्मतें जो उनसे पहले गुज़र चुकी हैं उन ही के शुमूल में उन पर भी अज़ाब का वायदा मुस्तहक़ हो चुका है ये लोग बेशक घाटा उठाने वाले थे
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अनुवाद — अल-अहकाफ 16

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Tuesday, August 18, 2026

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