मुहम्मद · 16/38
अनुवाद उच्चारण — मुहम्मद
وَمِنْهُم مَّن يَسْتَمِعُ إِلَيْكَ حَتَّىٰ إِذَا خَرَجُوا مِنْ عِندِكَ قَالُوا لِلَّذِينَ أُوتُوا الْعِلْمَ مَاذَا قَالَ آنِفًا ۚ أُولَٰئِكَ الَّذِينَ طَبَعَ اللَّهُ عَلَىٰ قُلُوبِهِمْ وَاتَّبَعُوا أَهْوَاءَهُمْ ۝١٦
Wa minhum mai yastami` ilaika hattaaa izaa kharajoo min `indika qaaloo lillazeena ootul `ilma maazaa qaala aanifaa; ulaaa`ikal lazeena taba`al laahu `alaa quloobihim wattaba`ooo ahwaaa`ahum
📖 हिंदी अर्थ
और (ऐ रसूल) उनमें से बाज़ ऐसे भी हैं जो तुम्हारी तरफ कान लगाए रहते हैं यहाँ तक कि सब सुना कर जब तुम्हारे पास से निकलते हैं तो जिन लोगों को इल्म (कुरान) दिया गया है उनसे कहते हैं (क्यों भई) अभी उस शख़्श ने क्या कहा था ये वही लोग हैं जिनके दिलों पर ख़ुदा ने (कुफ़्र की) अलामत मुक़र्रर कर दी है और ये अपनी नफसियानी ख्वाहिशों पर चल रहे हैं
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • آنِفًا: अभी-अभी, इसी समय
  • طَبَعَ اللَّهُ عَلَىٰ قُلُوبِهِمْ: अल्लाह ने उनके दिलों पर मुहर लगा दी (यानी सत्य को समझने की क्षमता ही समाप्त कर दी)
  • أَهْوَاءَهُمْ: अपनी इच्छाओं और मनमानी की پیروی

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला मुनाफ़िक़ीन (दिखावटी मुसलमानों) की एक और बुरी आदत का ज़िक्र कर रहे हैं। ये वो लोग हैं जो आप (ﷺ) की महफ़िल में आते हैं और आपकी बातें सुनते भी हैं, लेकिन उनके दिलों में न तो सच्चाई को क़बूल करने की नीयत होती है और न ही समझने की ख्वाहिश। वे सिर्फ़ दिखावे के लिए आते हैं, उपहास और मज़ाक़ के इरादे से।

जब वे आपकी महफ़िल से निकलते हैं, तो उन लोगों से जिन्हें अल्लाह ने इल्म (ज्ञान) दिया होता है — यानी सहाबा-ए-किराम (रज़ियल्लाहु अन्हुम) से — पूछते हैं: "अभी-अभी मुहम्मद (ﷺ) ने क्या कहा था?" यह सवाल वे इसलिए करते हैं क्योंकि उन्होंने कुछ सुना ही नहीं, या सुनकर भी उसे गंभीरता से नहीं लिया। उनका यह पूछना वास्तव में उपहास और मज़ाक़ की ग़र्ज़ से होता है, न कि जानने और समझने की चाहत से।

अल्लाह तआला फ़रमाते हैं कि ये वही लोग हैं जिनके दिलों पर अल्लाह ने मुहर लगा दी है — यानी उनके दिल सत्य को ग्रहण करने की क्षमता से वंचित हो गए हैं — और उन्होंने अपनी इच्छाओं और मनमानी की پیروی की है। जब इंसान अपनी इच्छाओं को अपना रब बना लेता है, तो अल्लाह की हिदायत उसके दिल तक नहीं पहुँचती।


दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):

यह आयत हमें एक बहुत बड़ा सबक़ देती है: जब हम क़ुरआन और सुन्नत की बातें सुनें, तो उन्हें सिर्फ़ कानों से नहीं, बल्कि दिल से सुनें। अल्लाह की बातें उन्हीं दिलों में असर करती हैं जो खाली और सच्चाई की तलाश में होते हैं। जो लोग उपहास और घमंड के साथ सुनते हैं, वे सबसे बड़े नुक़सान में रहते हैं — उनके दिल बंद हो जाते हैं और वे सीधे रास्ते से भटक जाते हैं।

आओ, हम अपने दिलों को अल्लाह के कलाम के लिए खोलें, उसे समझने की कोशिश करें और उस पर अमल करें। याद रखें, क़ुरआन सुनने का मक़सद सिर्फ़ सुनना नहीं, बल्कि समझना, मानना और उसके अनुसार जीवन बदलना है। अल्लाह उन्हीं को हिदायत देता है जो सच्चे दिल से उसकी तरफ़ रुजू करते हैं।

🎧 सुनें

📜 आयत 14-18 — मुहम्मद

14أَفَمَن كَانَ عَلَىٰ بَيِّنَةٍ مِّن رَّبِّهِ كَمَن زُيِّنَ لَهُ سُوءُ عَمَلِهِ وَاتَّبَعُوا أَهْوَاءَهُم
क्या जो शख़्श अपने परवरदिगार की तरफ से रौशन दलील पर हो उस शख़्श के बराबर हो सकता है जिसकी बदकारियाँ उसे भली कर दिखायीं गयीं हों वह अपनी नफ़सियानी ख्वाहिशों पर चलते हैं
15مَّثَلُ الْجَنَّةِ الَّتِي وُعِدَ الْمُتَّقُونَ ۖ فِيهَا أَنْهَارٌ مِّن مَّاءٍ غَيْرِ آسِنٍ وَأَنْهَارٌ مِّن لَّبَنٍ لَّمْ يَتَغَيَّرْ طَعْمُهُ وَأَنْهَارٌ مِّنْ خَمْرٍ لَّذَّةٍ لِّلشَّارِبِينَ وَأَنْهَارٌ مِّنْ عَسَلٍ مُّصَفًّى ۖ وَلَهُمْ فِيهَا مِن كُلِّ الثَّمَرَاتِ وَمَغْفِرَةٌ مِّن رَّبِّهِمْ ۖ كَمَنْ هُوَ خَالِدٌ فِي النَّارِ وَسُقُوا مَاءً حَمِيمًا فَقَطَّعَ أَمْعَاءَهُمْ
जिस बेहिश्त का परहेज़गारों से वायदा किया जाता है उसकी सिफत ये है कि उसमें पानी की नहरें जिनमें ज़रा बू नहीं और दूध की नहरें हैं जिनका मज़ा तक नहीं बदला और शराब की नहरें हैं जो पीने वालों के लिए (सरासर) लज्ज़त है और साफ़ शफ्फ़ाफ़ यहद की नहरें हैं और वहाँ उनके लिए हर किस्म के मेवे हैं और उनके परवरदिगार की तरफ से बख़्शिस है (भला ये लोग) उनके बराबर हो सकते हैं जो हमेशा दोज़ख़ में रहेंगे और उनको खौलता हुआ पानी पिलाया जाएगा तो वह ऑंतों के टुकड़े टुकड़े कर डालेगा
16وَمِنْهُم مَّن يَسْتَمِعُ إِلَيْكَ حَتَّىٰ إِذَا خَرَجُوا مِنْ عِندِكَ قَالُوا لِلَّذِينَ أُوتُوا الْعِلْمَ مَاذَا قَالَ آنِفًا ۚ أُولَٰئِكَ الَّذِينَ طَبَعَ اللَّهُ عَلَىٰ قُلُوبِهِمْ وَاتَّبَعُوا أَهْوَاءَهُمْ
और (ऐ रसूल) उनमें से बाज़ ऐसे भी हैं जो तुम्हारी तरफ कान लगाए रहते हैं यहाँ तक कि सब सुना कर जब तुम्हारे पास से निकलते हैं तो जिन लोगों को इल्म (कुरान) दिया गया है उनसे कहते हैं (क्यों भई) अभी उस शख़्श ने क्या कहा था ये वही लोग हैं जिनके दिलों पर ख़ुदा ने (कुफ़्र की) अलामत मुक़र्रर कर दी है और ये अपनी नफसियानी ख्वाहिशों पर चल रहे हैं
17وَالَّذِينَ اهْتَدَوْا زَادَهُمْ هُدًى وَآتَاهُمْ تَقْوَاهُمْ
और जो लोग हिदायत याफ़ता हैं उनको ख़ुदा (क़ुरान के ज़रिए से) मज़ीद हिदायत करता है और उनको परहेज़गारी अता फरमाता है
18فَهَلْ يَنظُرُونَ إِلَّا السَّاعَةَ أَن تَأْتِيَهُم بَغْتَةً ۖ فَقَدْ جَاءَ أَشْرَاطُهَا ۚ فَأَنَّىٰ لَهُمْ إِذَا جَاءَتْهُمْ ذِكْرَاهُمْ
तो क्या ये लोग बस क़यामत ही के मुनतज़िर हैं कि उन पर एक बारगी आ जाए तो उसकी निशानियाँ आ चुकी हैं तो जिस वक्त क़यामत उन (के सर) पर आ पहुँचेगी फिर उन्हें नसीहत कहाँ मुफीद हो सकती है
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अनुवाद — मुहम्मद 16

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Tuesday, August 18, 2026

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