मुहम्मद · 17/38
अनुवाद उच्चारण — मुहम्मद
وَالَّذِينَ اهْتَدَوْا زَادَهُمْ هُدًى وَآتَاهُمْ تَقْوَاهُمْ ۝١٧
Wallazeenah tadaw zaadahum hudanw wa aataahum taqwaahum
📖 हिंदी अर्थ
और जो लोग हिदायत याफ़ता हैं उनको ख़ुदा (क़ुरान के ज़रिए से) मज़ीद हिदायत करता है और उनको परहेज़गारी अता फरमाता है

🎧 सुनें
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • اهْتَدَوْا: हिदायत पाने वाले, सत्य मार्ग अपनाने वाले।
  • زَادَهُمْ هُدًى: अल्लाह ने उनकी हिदायत में और अधिक वृद्धि की।
  • آتَاهُمْ تَقْوَاهُمْ: उन्हें तक़्वा (परहेज़गारी) प्रदान की, यानी उनके दिलों में अल्लाह का डर और नेक अमल की तौफ़ीक़ दी।

विस्तृत तफ़सीर:

यह आयत उन खुशनसीब लोगों का ज़िक्र करती है जिन्होंने सत्य को पहचाना और उसे अपनाया। जब कोई इंसान हिदायत के रास्ते पर चलता है, तो अल्लाह उसे और अधिक हिदायत देता है। यह अल्लाह का बड़ा फज़ल है कि वह अपने बंदे के अच्छे इरादे को देखकर उसके दिल में रोशनी बढ़ा देता है, उसकी समझ को खोल देता है और उसे सही रास्ते पर चलने की तौफ़ीक़ देता है।

जो लोग क़ुरआन और रसूलुल्लाह ﷺ की शिक्षाओं पर अमल करते हैं, अल्लाह उन्हें तक़्वा अता करता है — यानी उन्हें वह शक्ति और इरादा देता है जिससे वे गुनाहों से बचें, अल्लाह के आदेशों का पालन करें और उस चीज़ से दूर रहें जो उसे नापसंद है। तक़्वा ही वह चीज़ है जो इंसान को जहन्नम की आग से बचाती है और जन्नत के रास्ते पर ले जाती है।

इस आयत में एक बहुत बड़ी खुशखबरी है: अल्लाह हिदायत पाने वालों को कभी अकेला नहीं छोड़ता। वह उनके कदमों को मज़बूत करता है, उनके दिलों को सुकून देता है और उन्हें अमल करने की तौफ़ीक़ देता है। यह अल्लाह की सुन्नत (क़ानून) है — जो उसकी तरफ बढ़ता है, अल्लाह उसकी तरफ और तेज़ी से दौड़ता है।

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें बताती है कि हिदायत का रास्ता कोई मुश्किल रास्ता नहीं है, बल्कि यह रहमत और नूर का रास्ता है। जब हम क़ुरआन पढ़ते हैं, नमाज़ पढ़ते हैं, अच्छे काम करते हैं, तो अल्लाह हमारे दिल में और रोशनी डालता है। हर नेक काम के बाद हमें एक नई ताकत मिलती है। यही वह चीज़ है जो हमें दुनिया में सुकून देती है और आख़िरत में कामयाबी दिलाती है।

आइए हम इस आयत से सबक लें कि हम अपनी हिदायत को बढ़ाने की कोशिश करें — इल्म हासिल करें, अमल करें और दूसरों को भी इस रास्ते पर बुलाएँ। अल्लाह वादा करता है कि जो उसके रास्ते पर चलेगा, वह उसे कभी निराश नहीं करेगा। यही असली कामयाबी है — दुनिया में हिदायत और आख़िरत में जन्नत।



📜 आयत 15-19 — मुहम्मद

15مَّثَلُ الْجَنَّةِ الَّتِي وُعِدَ الْمُتَّقُونَ ۖ فِيهَا أَنْهَارٌ مِّن مَّاءٍ غَيْرِ آسِنٍ وَأَنْهَارٌ مِّن لَّبَنٍ لَّمْ يَتَغَيَّرْ طَعْمُهُ وَأَنْهَارٌ مِّنْ خَمْرٍ لَّذَّةٍ لِّلشَّارِبِينَ وَأَنْهَارٌ مِّنْ عَسَلٍ مُّصَفًّى ۖ وَلَهُمْ فِيهَا مِن كُلِّ الثَّمَرَاتِ وَمَغْفِرَةٌ مِّن رَّبِّهِمْ ۖ كَمَنْ هُوَ خَالِدٌ فِي النَّارِ وَسُقُوا مَاءً حَمِيمًا فَقَطَّعَ أَمْعَاءَهُمْ
जिस बेहिश्त का परहेज़गारों से वायदा किया जाता है उसकी सिफत ये है कि उसमें पानी की नहरें जिनमें ज़रा बू नहीं और दूध की नहरें हैं जिनका मज़ा तक नहीं बदला और शराब की नहरें हैं जो पीने वालों के लिए (सरासर) लज्ज़त है और साफ़ शफ्फ़ाफ़ यहद की नहरें हैं और वहाँ उनके लिए हर किस्म के मेवे हैं और उनके परवरदिगार की तरफ से बख़्शिस है (भला ये लोग) उनके बराबर हो सकते हैं जो हमेशा दोज़ख़ में रहेंगे और उनको खौलता हुआ पानी पिलाया जाएगा तो वह ऑंतों के टुकड़े टुकड़े कर डालेगा
16وَمِنْهُم مَّن يَسْتَمِعُ إِلَيْكَ حَتَّىٰ إِذَا خَرَجُوا مِنْ عِندِكَ قَالُوا لِلَّذِينَ أُوتُوا الْعِلْمَ مَاذَا قَالَ آنِفًا ۚ أُولَٰئِكَ الَّذِينَ طَبَعَ اللَّهُ عَلَىٰ قُلُوبِهِمْ وَاتَّبَعُوا أَهْوَاءَهُمْ
और (ऐ रसूल) उनमें से बाज़ ऐसे भी हैं जो तुम्हारी तरफ कान लगाए रहते हैं यहाँ तक कि सब सुना कर जब तुम्हारे पास से निकलते हैं तो जिन लोगों को इल्म (कुरान) दिया गया है उनसे कहते हैं (क्यों भई) अभी उस शख़्श ने क्या कहा था ये वही लोग हैं जिनके दिलों पर ख़ुदा ने (कुफ़्र की) अलामत मुक़र्रर कर दी है और ये अपनी नफसियानी ख्वाहिशों पर चल रहे हैं
17وَالَّذِينَ اهْتَدَوْا زَادَهُمْ هُدًى وَآتَاهُمْ تَقْوَاهُمْ
और जो लोग हिदायत याफ़ता हैं उनको ख़ुदा (क़ुरान के ज़रिए से) मज़ीद हिदायत करता है और उनको परहेज़गारी अता फरमाता है
18فَهَلْ يَنظُرُونَ إِلَّا السَّاعَةَ أَن تَأْتِيَهُم بَغْتَةً ۖ فَقَدْ جَاءَ أَشْرَاطُهَا ۚ فَأَنَّىٰ لَهُمْ إِذَا جَاءَتْهُمْ ذِكْرَاهُمْ
तो क्या ये लोग बस क़यामत ही के मुनतज़िर हैं कि उन पर एक बारगी आ जाए तो उसकी निशानियाँ आ चुकी हैं तो जिस वक्त क़यामत उन (के सर) पर आ पहुँचेगी फिर उन्हें नसीहत कहाँ मुफीद हो सकती है
19فَاعْلَمْ أَنَّهُ لَا إِلَٰهَ إِلَّا اللَّهُ وَاسْتَغْفِرْ لِذَنبِكَ وَلِلْمُؤْمِنِينَ وَالْمُؤْمِنَاتِ ۗ وَاللَّهُ يَعْلَمُ مُتَقَلَّبَكُمْ وَمَثْوَاكُمْ
तो फिर समझ लो कि ख़ुदा के सिवा कोई माबूद नहीं और (हम से) अपने और ईमानदार मर्दों और ईमानदार औरतों के गुनाहों की माफ़ी मांगते रहो और ख़ुदा तुम्हारे चलने फिरने और ठहरने से (ख़ूब) वाक़िफ़ है
मुहम्मदकुरान सूची
38आयत
मदनीRevelation
17आयत

अनुवाद — मुहम्मद 17

सूरा मुहम्मद आयत 17 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जो लोग हिदायत याफ़ता हैं उनको ख़ुदा (क़ुरान के…

सूरा आयत 17/38 — मुहम्मद محمد (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: मुहम्मद सुनें, मुहम्मद अनुवाद, मुहम्मद mp3, मुहम्मद pdf. आयत 15–19. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए