अल-हुजुरात · 6/18
अनुवाद उच्चारण — अल-हुजुरात
يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا إِن جَاءَكُمْ فَاسِقٌ بِنَبَإٍ فَتَبَيَّنُوا أَن تُصِيبُوا قَوْمًا بِجَهَالَةٍ فَتُصْبِحُوا عَلَىٰ مَا فَعَلْتُمْ نَادِمِينَ ۝٦
Yaaa ayyuhal lazeena aamanoo in jaaa`akum faasqum binaba in fatabaiyanooo an tuseeboo qawmam bijahalatin fatusbihoo `alaa maa fa`altum naadimeen
📖 हिंदी अर्थ
ऐ ईमानदारों अगर कोई बदकिरदार तुम्हारे पास कोई ख़बर लेकर आए तो ख़ूब तहक़ीक़ कर लिया करो (ऐसा न हो) कि तुम किसी क़ौम को नादानी से नुक़सान पहुँचाओ फिर अपने किए पर नादिम हो

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • फ़ासिक़ (فَاسِقٌ): आज्ञा का उल्लंघन करने वाला, बड़े गुनाह करने वाला, जिसकी बात पर भरोसा न किया जा सके।
  • नबअ (نَبَإٍ): खबर, समाचार।
  • फ़तबय्यनू (فَتَبَيَّنُوا): जाँच-पड़ताल करो, सत्यता की छानबीन करो, प्रमाणित करो।
  • जहालत (جَهَالَةٍ): अज्ञानता, बिना जानकारी के, नासमझी से।
  • नादिमीन (نَادِمِينَ): पछताने वाले, शर्मिंदा और दुखी।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ ईमान वालो! जब कोई फ़ासिक (दुष्ट और अविश्वसनीय) व्यक्ति तुम्हारे पास कोई खबर लेकर आए, तो उसे तुरंत सच न मान लो और न ही उस पर अमल करने में जल्दबाज़ी करो। बल्कि पहले उसकी अच्छी तरह जाँच-पड़ताल करो, उसके सच और झूठ को परखो। यह इसलिए कि कहीं तुम किसी बेगुनाह क़ौम या लोगों को नुकसान न पहुँचा दो, जबकि तुम्हें उनकी वास्तविक स्थिति का पता न हो। अगर तुमने बिना जाँचे-परखे उस फ़ासिक की बात पर भरोसा कर लिया और किसी मासूम लोगों को तकलीफ़ पहुँचा दी, तो जब सच्चाई सामने आएगी तो तुम्हें अपने किए पर बहुत पछतावा होगा और यह पछतावा तुम्हें रात-दिन चैन नहीं लेने देगा।

यह आयत हमें सिखाती है कि इस्लाम में खबर और बात को प्रमाणित करना कितना महत्वपूर्ण है। एक झूठी खबर किसी व्यक्ति, परिवार या पूरी क़ौम की बदनामी, आपसी दुश्मनी और यहाँ तक कि खून-खराबे का कारण बन सकती है। इसलिए अल्लाह तआला ने मोमिनों को आदेश दिया है कि वे किसी भी खबर को बिना सत्यापन के आगे न बढ़ाएँ, न उस पर यक़ीन करें और न ही उसके आधार पर कोई कदम उठाएँ।

यह आदेश हमारे समाज में अफवाहों और झूठी खबरों के इस दौर में और भी अधिक प्रासंगिक है। आज सोशल मीडिया पर एक झूठी खबर पल भर में हज़ारों लोगों तक पहुँच जाती है और कितने ही बेगुनाह लोगों की ज़िंदगी तबाह कर देती है। यह आयत हमें सिखाती है कि हमें अपनी ज़ुबान और अपने हाथों को काबू में रखना चाहिए, और किसी भी बात को सच मानने से पहले उसकी तहक़ीक़ात करनी चाहिए।

अल्लाह तआला हमें इस आदेश के ज़रिए समाज में अमन, भाईचारा और आपसी विश्वास क़ायम करना सिखाता है। जब हम जाँच-पड़ताल करेंगे, तो निर्दोष लोगों पर ज़ुल्म नहीं होगा, और हमारे दिलों में पछतावे का दर्द नहीं होगा। यही ईमान की निशानी है कि इंसान जल्दबाज़ी न करे, बल्कि सब्र और हिकमत से काम ले। आओ, हम इस आयत पर अमल करें और अपने समाज को अफवाहों और झूठ से पाक करें, ताकि हम अल्लाह की रहमत के हक़दार बनें और दुनिया और आख़िरत में कामयाब हों।



📜 आयत 4-8 — अल-हुजुरात

4إِنَّ الَّذِينَ يُنَادُونَكَ مِن وَرَاءِ الْحُجُرَاتِ أَكْثَرُهُمْ لَا يَعْقِلُونَ
(ऐ रसूल) जो लोग तुमको हुजरों के बाहर से आवाज़ देते हैं उनमें के अक्सर बे अक्ल हैं
5وَلَوْ أَنَّهُمْ صَبَرُوا حَتَّىٰ تَخْرُجَ إِلَيْهِمْ لَكَانَ خَيْرًا لَّهُمْ ۚ وَاللَّهُ غَفُورٌ رَّحِيمٌ
और अगर ये लोग इतना ताम्मुल करते कि तुम ख़ुद निकल कर उनके पास आ जाते (तब बात करते) तो ये उनके लिए बेहतर था और ख़ुदा तो बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
6يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا إِن جَاءَكُمْ فَاسِقٌ بِنَبَإٍ فَتَبَيَّنُوا أَن تُصِيبُوا قَوْمًا بِجَهَالَةٍ فَتُصْبِحُوا عَلَىٰ مَا فَعَلْتُمْ نَادِمِينَ
ऐ ईमानदारों अगर कोई बदकिरदार तुम्हारे पास कोई ख़बर लेकर आए तो ख़ूब तहक़ीक़ कर लिया करो (ऐसा न हो) कि तुम किसी क़ौम को नादानी से नुक़सान पहुँचाओ फिर अपने किए पर नादिम हो
7وَاعْلَمُوا أَنَّ فِيكُمْ رَسُولَ اللَّهِ ۚ لَوْ يُطِيعُكُمْ فِي كَثِيرٍ مِّنَ الْأَمْرِ لَعَنِتُّمْ وَلَٰكِنَّ اللَّهَ حَبَّبَ إِلَيْكُمُ الْإِيمَانَ وَزَيَّنَهُ فِي قُلُوبِكُمْ وَكَرَّهَ إِلَيْكُمُ الْكُفْرَ وَالْفُسُوقَ وَالْعِصْيَانَ ۚ أُولَٰئِكَ هُمُ الرَّاشِدُونَ
और जान रखो कि तुम में ख़ुदा के पैग़म्बर (मौजूद) हैं बहुत सी बातें ऐसी हैं कि अगर रसूल उनमें तुम्हारा कहा मान लिया करें तो (उलटे) तुम ही मुश्किल में पड़ जाओ लेकिन ख़ुदा ने तुम्हें ईमान की मोहब्बत दे दी है और उसको तुम्हारे दिलों में उमदा कर दिखाया है और कुफ़्र और बदकारी और नाफ़रमानी से तुमको बेज़ार कर दिया है यही लोग ख़ुदा के फ़ज़ल व एहसान से राहे हिदायत पर हैं
8فَضْلًا مِّنَ اللَّهِ وَنِعْمَةً ۚ وَاللَّهُ عَلِيمٌ حَكِيمٌ
और ख़ुदा तो बड़ा वाक़िफ़कार और हिकमत वाला है
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अनुवाद — अल-हुजुरात 6

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Tuesday, August 18, 2026

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