अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- फ़ासिक़ (فَاسِقٌ): आज्ञा का उल्लंघन करने वाला, बड़े गुनाह करने वाला, जिसकी बात पर भरोसा न किया जा सके।
- नबअ (نَبَإٍ): खबर, समाचार।
- फ़तबय्यनू (فَتَبَيَّنُوا): जाँच-पड़ताल करो, सत्यता की छानबीन करो, प्रमाणित करो।
- जहालत (جَهَالَةٍ): अज्ञानता, बिना जानकारी के, नासमझी से।
- नादिमीन (نَادِمِينَ): पछताने वाले, शर्मिंदा और दुखी।
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ ईमान वालो! जब कोई फ़ासिक (दुष्ट और अविश्वसनीय) व्यक्ति तुम्हारे पास कोई खबर लेकर आए, तो उसे तुरंत सच न मान लो और न ही उस पर अमल करने में जल्दबाज़ी करो। बल्कि पहले उसकी अच्छी तरह जाँच-पड़ताल करो, उसके सच और झूठ को परखो। यह इसलिए कि कहीं तुम किसी बेगुनाह क़ौम या लोगों को नुकसान न पहुँचा दो, जबकि तुम्हें उनकी वास्तविक स्थिति का पता न हो। अगर तुमने बिना जाँचे-परखे उस फ़ासिक की बात पर भरोसा कर लिया और किसी मासूम लोगों को तकलीफ़ पहुँचा दी, तो जब सच्चाई सामने आएगी तो तुम्हें अपने किए पर बहुत पछतावा होगा और यह पछतावा तुम्हें रात-दिन चैन नहीं लेने देगा।
यह आयत हमें सिखाती है कि इस्लाम में खबर और बात को प्रमाणित करना कितना महत्वपूर्ण है। एक झूठी खबर किसी व्यक्ति, परिवार या पूरी क़ौम की बदनामी, आपसी दुश्मनी और यहाँ तक कि खून-खराबे का कारण बन सकती है। इसलिए अल्लाह तआला ने मोमिनों को आदेश दिया है कि वे किसी भी खबर को बिना सत्यापन के आगे न बढ़ाएँ, न उस पर यक़ीन करें और न ही उसके आधार पर कोई कदम उठाएँ।
यह आदेश हमारे समाज में अफवाहों और झूठी खबरों के इस दौर में और भी अधिक प्रासंगिक है। आज सोशल मीडिया पर एक झूठी खबर पल भर में हज़ारों लोगों तक पहुँच जाती है और कितने ही बेगुनाह लोगों की ज़िंदगी तबाह कर देती है। यह आयत हमें सिखाती है कि हमें अपनी ज़ुबान और अपने हाथों को काबू में रखना चाहिए, और किसी भी बात को सच मानने से पहले उसकी तहक़ीक़ात करनी चाहिए।
अल्लाह तआला हमें इस आदेश के ज़रिए समाज में अमन, भाईचारा और आपसी विश्वास क़ायम करना सिखाता है। जब हम जाँच-पड़ताल करेंगे, तो निर्दोष लोगों पर ज़ुल्म नहीं होगा, और हमारे दिलों में पछतावे का दर्द नहीं होगा। यही ईमान की निशानी है कि इंसान जल्दबाज़ी न करे, बल्कि सब्र और हिकमत से काम ले। आओ, हम इस आयत पर अमल करें और अपने समाज को अफवाहों और झूठ से पाक करें, ताकि हम अल्लाह की रहमत के हक़दार बनें और दुनिया और आख़िरत में कामयाब हों।
📜 आयत 4-8 — अल-हुजुरात
अनुवाद — अल-हुजुरात 6
सूरा अल-हुजुरात आयत 6 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ऐ ईमानदारों अगर कोई बदकिरदार तुम्हारे पास कोई ख़बर लेकर…सूरा आयत 6/18 — अल-हुजुरात الحجرات (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-हुजुरात सुनें, अल-हुजुरात अनुवाद, अल-हुजुरात mp3, अल-हुजुरात pdf. आयत 4–8. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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