अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- صَبَرُوا (सब्र करते): अपने आप को रोके रखते, धैर्य दिखाते।
- تَخْرُجَ إِلَيْهِمْ (आप उनके पास निकल कर आते): जब तक आप (नबी) स्वयं उनके पास न आ जाएँ।
- خَيْرًا (बेहतर): उनके लिए अधिक अच्छा और फायदेमंद।
- غَفُورٌ رَّحِيمٌ (क्षमाशील, दयावान): अल्लाह अपने बंदों की गलतियों को माफ करने वाला और उन पर दया करने वाला है।
तफसीर (व्याख्या):
यह आयत उन लोगों के बारे में है जो नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के घर के पीछे से ऊँची आवाज़ में आपको पुकारते थे, जबकि आप अपने कमरे में होते थे। अल्लाह तआला उन्हें सिखाता है कि अगर वे थोड़ा सा सब्र करते और आपके बाहर निकलने का इंतज़ार करते, तो यह उनके लिए कहीं बेहतर होता। क्योंकि इसमें आप (नबी) का सम्मान और अदब (शिष्टाचार) था। अल्लाह ने उन्हें यह तरीका सिखाया कि वे आपको पुकारने के बजाय आपके सामने आकर धीमी आवाज़ में बात करें।
यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह के नबी और उनके बाद उनके उत्तराधिकारियों (उलमा, हुक्काम) के साथ अदब और इज़्ज़त का व्यवहार करना चाहिए। जल्दबाज़ी और बेअदबी से बात करना अच्छा नहीं है। सब्र और तहज़ीब (शिष्टाचार) इंसान को अल्लाह के करीब लाते हैं।
अल्लाह तआला ने इस आयत के अंत में अपनी दो खूबियाँ बताईं: "ग़फूर" (बहुत क्षमा करने वाला) और "रहीम" (बहुत दयावान)। यानी उन लोगों ने जो जल्दबाज़ी और बेअदबी की थी, अगर वे तौबा कर लें, तो अल्लाह उन्हें माफ कर देगा। अल्लाह की रहमत बहुत वसी (व्यापक) है, वह अपने बंदों की गलतियों पर उन्हें तुरंत पकड़ नहीं लेता, बल्कि उन्हें सुधरने का मौका देता है।
इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि हमें अपने दीन के रहनुमाओं और बुज़ुर्गों के साथ अदब से पेश आना चाहिए। जल्दबाज़ी में की गई बातें अक्सर पछतावे का कारण बनती हैं, जबकि सब्र और तहज़ीब से इंसान दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाब होता है। अल्लाह अपने बंदों से बहुत प्यार करता है और उनकी भूलों को माफ करने के लिए तैयार रहता है, बशर्ते वे सच्चे दिल से तौबा करें।
📜 आयत 3-7 — अल-हुजुरात
अनुवाद — अल-हुजुरात 5
सूरा अल-हुजुरात आयत 5 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और अगर ये लोग इतना ताम्मुल करते कि तुम ख़ुद…सूरा आयत 5/18 — अल-हुजुरात الحجرات (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-हुजुरात सुनें, अल-हुजुरात अनुवाद, अल-हुजुरात mp3, अल-हुजुरात pdf. आयत 3–7. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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