अल-हुजुरात · 5/18
अनुवाद उच्चारण — अल-हुजुरात
وَلَوْ أَنَّهُمْ صَبَرُوا حَتَّىٰ تَخْرُجَ إِلَيْهِمْ لَكَانَ خَيْرًا لَّهُمْ ۚ وَاللَّهُ غَفُورٌ رَّحِيمٌ ۝٥
Wa law annahum sabaroo hatta takhruja ilaihim lakaana khairal lahum; wallaahu Ghafoorur Raheem
📖 हिंदी अर्थ
और अगर ये लोग इतना ताम्मुल करते कि तुम ख़ुद निकल कर उनके पास आ जाते (तब बात करते) तो ये उनके लिए बेहतर था और ख़ुदा तो बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • صَبَرُوا (सब्र करते): अपने आप को रोके रखते, धैर्य दिखाते।
  • تَخْرُجَ إِلَيْهِمْ (आप उनके पास निकल कर आते): जब तक आप (नबी) स्वयं उनके पास न आ जाएँ।
  • خَيْرًا (बेहतर): उनके लिए अधिक अच्छा और फायदेमंद।
  • غَفُورٌ رَّحِيمٌ (क्षमाशील, दयावान): अल्लाह अपने बंदों की गलतियों को माफ करने वाला और उन पर दया करने वाला है।

तफसीर (व्याख्या):

यह आयत उन लोगों के बारे में है जो नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के घर के पीछे से ऊँची आवाज़ में आपको पुकारते थे, जबकि आप अपने कमरे में होते थे। अल्लाह तआला उन्हें सिखाता है कि अगर वे थोड़ा सा सब्र करते और आपके बाहर निकलने का इंतज़ार करते, तो यह उनके लिए कहीं बेहतर होता। क्योंकि इसमें आप (नबी) का सम्मान और अदब (शिष्टाचार) था। अल्लाह ने उन्हें यह तरीका सिखाया कि वे आपको पुकारने के बजाय आपके सामने आकर धीमी आवाज़ में बात करें।

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह के नबी और उनके बाद उनके उत्तराधिकारियों (उलमा, हुक्काम) के साथ अदब और इज़्ज़त का व्यवहार करना चाहिए। जल्दबाज़ी और बेअदबी से बात करना अच्छा नहीं है। सब्र और तहज़ीब (शिष्टाचार) इंसान को अल्लाह के करीब लाते हैं।

अल्लाह तआला ने इस आयत के अंत में अपनी दो खूबियाँ बताईं: "ग़फूर" (बहुत क्षमा करने वाला) और "रहीम" (बहुत दयावान)। यानी उन लोगों ने जो जल्दबाज़ी और बेअदबी की थी, अगर वे तौबा कर लें, तो अल्लाह उन्हें माफ कर देगा। अल्लाह की रहमत बहुत वसी (व्यापक) है, वह अपने बंदों की गलतियों पर उन्हें तुरंत पकड़ नहीं लेता, बल्कि उन्हें सुधरने का मौका देता है।

इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि हमें अपने दीन के रहनुमाओं और बुज़ुर्गों के साथ अदब से पेश आना चाहिए। जल्दबाज़ी में की गई बातें अक्सर पछतावे का कारण बनती हैं, जबकि सब्र और तहज़ीब से इंसान दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाब होता है। अल्लाह अपने बंदों से बहुत प्यार करता है और उनकी भूलों को माफ करने के लिए तैयार रहता है, बशर्ते वे सच्चे दिल से तौबा करें।

🎧 सुनें

📜 आयत 3-7 — अल-हुजुरात

3إِنَّ الَّذِينَ يَغُضُّونَ أَصْوَاتَهُمْ عِندَ رَسُولِ اللَّهِ أُولَٰئِكَ الَّذِينَ امْتَحَنَ اللَّهُ قُلُوبَهُمْ لِلتَّقْوَىٰ ۚ لَهُم مَّغْفِرَةٌ وَأَجْرٌ عَظِيمٌ
बेशक जो लोग रसूले ख़ुदा के सामने अपनी आवाज़ें धीमी कर लिया करते हैं यही लोग हैं जिनके दिलों को ख़ुदा ने परहेज़गारी के लिए जाँच लिया है उनके लिए (आख़ेरत में) बख़्शिस और बड़ा अज्र है
4إِنَّ الَّذِينَ يُنَادُونَكَ مِن وَرَاءِ الْحُجُرَاتِ أَكْثَرُهُمْ لَا يَعْقِلُونَ
(ऐ रसूल) जो लोग तुमको हुजरों के बाहर से आवाज़ देते हैं उनमें के अक्सर बे अक्ल हैं
5وَلَوْ أَنَّهُمْ صَبَرُوا حَتَّىٰ تَخْرُجَ إِلَيْهِمْ لَكَانَ خَيْرًا لَّهُمْ ۚ وَاللَّهُ غَفُورٌ رَّحِيمٌ
और अगर ये लोग इतना ताम्मुल करते कि तुम ख़ुद निकल कर उनके पास आ जाते (तब बात करते) तो ये उनके लिए बेहतर था और ख़ुदा तो बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
6يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا إِن جَاءَكُمْ فَاسِقٌ بِنَبَإٍ فَتَبَيَّنُوا أَن تُصِيبُوا قَوْمًا بِجَهَالَةٍ فَتُصْبِحُوا عَلَىٰ مَا فَعَلْتُمْ نَادِمِينَ
ऐ ईमानदारों अगर कोई बदकिरदार तुम्हारे पास कोई ख़बर लेकर आए तो ख़ूब तहक़ीक़ कर लिया करो (ऐसा न हो) कि तुम किसी क़ौम को नादानी से नुक़सान पहुँचाओ फिर अपने किए पर नादिम हो
7وَاعْلَمُوا أَنَّ فِيكُمْ رَسُولَ اللَّهِ ۚ لَوْ يُطِيعُكُمْ فِي كَثِيرٍ مِّنَ الْأَمْرِ لَعَنِتُّمْ وَلَٰكِنَّ اللَّهَ حَبَّبَ إِلَيْكُمُ الْإِيمَانَ وَزَيَّنَهُ فِي قُلُوبِكُمْ وَكَرَّهَ إِلَيْكُمُ الْكُفْرَ وَالْفُسُوقَ وَالْعِصْيَانَ ۚ أُولَٰئِكَ هُمُ الرَّاشِدُونَ
और जान रखो कि तुम में ख़ुदा के पैग़म्बर (मौजूद) हैं बहुत सी बातें ऐसी हैं कि अगर रसूल उनमें तुम्हारा कहा मान लिया करें तो (उलटे) तुम ही मुश्किल में पड़ जाओ लेकिन ख़ुदा ने तुम्हें ईमान की मोहब्बत दे दी है और उसको तुम्हारे दिलों में उमदा कर दिखाया है और कुफ़्र और बदकारी और नाफ़रमानी से तुमको बेज़ार कर दिया है यही लोग ख़ुदा के फ़ज़ल व एहसान से राहे हिदायत पर हैं
अल-हुजुरातकुरान सूची
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5आयत

अनुवाद — अल-हुजुरात 5

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Tuesday, August 18, 2026

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