अल-हुजुरात · 7/18
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-हुजुरात
وَاعْلَمُوا أَنَّ فِيكُمْ رَسُولَ اللَّهِ ۚ لَوْ يُطِيعُكُمْ فِي كَثِيرٍ مِّنَ الْأَمْرِ لَعَنِتُّمْ وَلَٰكِنَّ اللَّهَ حَبَّبَ إِلَيْكُمُ الْإِيمَانَ وَزَيَّنَهُ فِي قُلُوبِكُمْ وَكَرَّهَ إِلَيْكُمُ الْكُفْرَ وَالْفُسُوقَ وَالْعِصْيَانَ ۚ أُولَٰئِكَ هُمُ الرَّاشِدُونَ ۝٧
Wa`lamooo anna feekum Rasoolal laah; law yutee`ukum fee kaseerim minal amrila`anittum wa laakinnal laaha habbaba ilaikumul eemaana wa zaiyanahoo fee quloobikum wa karraha ilaikumul kufra walfusooqa wal`isyaan; ulaaaika humur raashidoon
📖 हिंदी अर्थ
और जान रखो कि तुम में ख़ुदा के पैग़म्बर (मौजूद) हैं बहुत सी बातें ऐसी हैं कि अगर रसूल उनमें तुम्हारा कहा मान लिया करें तो (उलटे) तुम ही मुश्किल में पड़ जाओ लेकिन ख़ुदा ने तुम्हें ईमान की मोहब्बत दे दी है और उसको तुम्हारे दिलों में उमदा कर दिखाया है और कुफ़्र और बदकारी और नाफ़रमानी से तुमको बेज़ार कर दिया है यही लोग ख़ुदा के फ़ज़ल व एहसान से राहे हिदायत पर हैं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • لَعَنِتُّمْ (लअनित्तुम): तुम मुसीबत और कठिनाई में पड़ जाते।
  • الْفُسُوقَ (अल-फ़ुसूक़): आज्ञा का उल्लंघन करना, हुक्म से निकल जाना।
  • الرَّاشِدُونَ (अर-राशिदून): सत्य मार्ग पर चलने वाले, हिदायत पाए हुए लोग।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ ईमान वालों! यह बात हमेशा याद रखो कि तुम्हारे बीच अल्लाह के रसूल ﷺ मौजूद हैं। वह तुम्हारे बारे में तुमसे कहीं ज़्यादा जानते हैं कि तुम्हारी भलाई और बेहतरी किस चीज़ में है। अगर वह तुम्हारी हर बात मान लें और तुम्हारी राय पर चलें, तो बहुत से मामलों में तुम खुद ही मुसीबत में पड़ जाओगे, क्योंकि इंसान की समझ नाकिस होती है और वह अपने लिए वही चुनता है जो उसे फ़ौरन अच्छा लगता है, जबकि उसमें उसका नुक़सान छिपा होता है।

लेकिन अल्लाह ने अपने फज़ल और करम से तुम्हारे दिलों में ईमान की मुहब्बत डाल दी और उसे तुम्हारे लिए खूबसूरत बना दिया, और कुफ्र, गुनाह और नाफ़रमानी को तुम्हारी नज़रों में बुरा और नापसंदीदा कर दिया। यह अल्लाह की बहुत बड़ी मेहरबानी है कि उसने तुम्हें सच्चाई को क़बूल करने की तौफ़ीक़ दी और झूठ से दूर रखा।

जिन लोगों को यह नेमत मिली है, वही सच्चे राह-याफ्ता (हिदायत पाए हुए) हैं, जो सीधे रास्ते पर चल रहे हैं और जिनका अंजाम कामयाबी है।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि जब अल्लाह और उसके रसूल ﷺ की बात आए, तो हमें अपनी राय और अपनी पसंद को पीछे रखना चाहिए। जो इंसान अपने दिल को ईमान की रौशनी से मुनव्वर करता है, अल्लाह उसे हर बुराई से बचाता है और उसके दिल में नेकी की मुहब्बत और गुनाह से नफ़रत पैदा कर देता है। यही सबसे बड़ी कामयाबी है कि इंसान का दिल ईमान से मालामाल हो और वह अल्लाह की राह पर चले। आइए, हम अल्लाह का शुक्र अदा करें कि उसने हमें इस दीन से जोड़ा और हमसे कुफ्र और गुनाह को नफ़रती बनाया, और हमेशा अपने दिलों को इसी नेमत पर क़ायम रखने की दुआ करें।



📜 आयत 5-9 — सूरा अल-हुजुरात

5وَلَوْ أَنَّهُمْ صَبَرُوا حَتَّىٰ تَخْرُجَ إِلَيْهِمْ لَكَانَ خَيْرًا لَّهُمْ ۚ وَاللَّهُ غَفُورٌ رَّحِيمٌ
और अगर ये लोग इतना ताम्मुल करते कि तुम ख़ुद निकल कर उनके पास आ जाते (तब बात करते) तो ये उनके लिए बेहतर था और ख़ुदा तो बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
6يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا إِن جَاءَكُمْ فَاسِقٌ بِنَبَإٍ فَتَبَيَّنُوا أَن تُصِيبُوا قَوْمًا بِجَهَالَةٍ فَتُصْبِحُوا عَلَىٰ مَا فَعَلْتُمْ نَادِمِينَ
ऐ ईमानदारों अगर कोई बदकिरदार तुम्हारे पास कोई ख़बर लेकर आए तो ख़ूब तहक़ीक़ कर लिया करो (ऐसा न हो) कि तुम किसी क़ौम को नादानी से नुक़सान पहुँचाओ फिर अपने किए पर नादिम हो
7وَاعْلَمُوا أَنَّ فِيكُمْ رَسُولَ اللَّهِ ۚ لَوْ يُطِيعُكُمْ فِي كَثِيرٍ مِّنَ الْأَمْرِ لَعَنِتُّمْ وَلَٰكِنَّ اللَّهَ حَبَّبَ إِلَيْكُمُ الْإِيمَانَ وَزَيَّنَهُ فِي قُلُوبِكُمْ وَكَرَّهَ إِلَيْكُمُ الْكُفْرَ وَالْفُسُوقَ وَالْعِصْيَانَ ۚ أُولَٰئِكَ هُمُ الرَّاشِدُونَ
और जान रखो कि तुम में ख़ुदा के पैग़म्बर (मौजूद) हैं बहुत सी बातें ऐसी हैं कि अगर रसूल उनमें तुम्हारा कहा मान लिया करें तो (उलटे) तुम ही मुश्किल में पड़ जाओ लेकिन ख़ुदा ने तुम्हें ईमान की मोहब्बत दे दी है और उसको तुम्हारे दिलों में उमदा कर दिखाया है और कुफ़्र और बदकारी और नाफ़रमानी से तुमको बेज़ार कर दिया है यही लोग ख़ुदा के फ़ज़ल व एहसान से राहे हिदायत पर हैं
8فَضْلًا مِّنَ اللَّهِ وَنِعْمَةً ۚ وَاللَّهُ عَلِيمٌ حَكِيمٌ
और ख़ुदा तो बड़ा वाक़िफ़कार और हिकमत वाला है
9وَإِن طَائِفَتَانِ مِنَ الْمُؤْمِنِينَ اقْتَتَلُوا فَأَصْلِحُوا بَيْنَهُمَا ۖ فَإِن بَغَتْ إِحْدَاهُمَا عَلَى الْأُخْرَىٰ فَقَاتِلُوا الَّتِي تَبْغِي حَتَّىٰ تَفِيءَ إِلَىٰ أَمْرِ اللَّهِ ۚ فَإِن فَاءَتْ فَأَصْلِحُوا بَيْنَهُمَا بِالْعَدْلِ وَأَقْسِطُوا ۖ إِنَّ اللَّهَ يُحِبُّ الْمُقْسِطِينَ
और अगर मोमिनीन में से दो फिरक़े आपस में लड़ पड़े तो उन दोनों में सुलह करा दो फिर अगर उनमें से एक (फ़रीक़) दूसरे पर ज्यादती करे तो जो (फिरक़ा) ज्यादती करे तुम (भी) उससे लड़ो यहाँ तक वह ख़ुदा के हुक्म की तरफ रूझू करे फिर जब रूजू करे तो फरीकैन में मसावात के साथ सुलह करा दो और इन्साफ़ से काम लो बेशक ख़ुदा इन्साफ़ करने वालों को दोस्त रखता है
अल-हुजुरातकुरान सूची
18आयत
मदनीअवतरण स्थान
7आयत

अनुवाद — अल-हुजुरात 7

सूरा अल-हुजुरात आयत 7 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जान रखो कि तुम में ख़ुदा के पैग़म्बर (मौजूद)…

सूरा आयत 7/18 — सूरा अल-हुजुरात الحجرات (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-हुजुरात सुनें, सूरा अल-हुजुरात अनुवाद, सूरा अल-हुजुरात mp3, सूरा अल-हुजुरात pdf. आयत 5–9. हिंदी अर्थ: اردو.





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Wednesday, September 30, 2026

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