अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- لَعَنِتُّمْ (लअनित्तुम): तुम मुसीबत और कठिनाई में पड़ जाते।
- الْفُسُوقَ (अल-फ़ुसूक़): आज्ञा का उल्लंघन करना, हुक्म से निकल जाना।
- الرَّاشِدُونَ (अर-राशिदून): सत्य मार्ग पर चलने वाले, हिदायत पाए हुए लोग।
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ ईमान वालों! यह बात हमेशा याद रखो कि तुम्हारे बीच अल्लाह के रसूल ﷺ मौजूद हैं। वह तुम्हारे बारे में तुमसे कहीं ज़्यादा जानते हैं कि तुम्हारी भलाई और बेहतरी किस चीज़ में है। अगर वह तुम्हारी हर बात मान लें और तुम्हारी राय पर चलें, तो बहुत से मामलों में तुम खुद ही मुसीबत में पड़ जाओगे, क्योंकि इंसान की समझ नाकिस होती है और वह अपने लिए वही चुनता है जो उसे फ़ौरन अच्छा लगता है, जबकि उसमें उसका नुक़सान छिपा होता है।
लेकिन अल्लाह ने अपने फज़ल और करम से तुम्हारे दिलों में ईमान की मुहब्बत डाल दी और उसे तुम्हारे लिए खूबसूरत बना दिया, और कुफ्र, गुनाह और नाफ़रमानी को तुम्हारी नज़रों में बुरा और नापसंदीदा कर दिया। यह अल्लाह की बहुत बड़ी मेहरबानी है कि उसने तुम्हें सच्चाई को क़बूल करने की तौफ़ीक़ दी और झूठ से दूर रखा।
जिन लोगों को यह नेमत मिली है, वही सच्चे राह-याफ्ता (हिदायत पाए हुए) हैं, जो सीधे रास्ते पर चल रहे हैं और जिनका अंजाम कामयाबी है।
दावती पहलू:
यह आयत हमें सिखाती है कि जब अल्लाह और उसके रसूल ﷺ की बात आए, तो हमें अपनी राय और अपनी पसंद को पीछे रखना चाहिए। जो इंसान अपने दिल को ईमान की रौशनी से मुनव्वर करता है, अल्लाह उसे हर बुराई से बचाता है और उसके दिल में नेकी की मुहब्बत और गुनाह से नफ़रत पैदा कर देता है। यही सबसे बड़ी कामयाबी है कि इंसान का दिल ईमान से मालामाल हो और वह अल्लाह की राह पर चले। आइए, हम अल्लाह का शुक्र अदा करें कि उसने हमें इस दीन से जोड़ा और हमसे कुफ्र और गुनाह को नफ़रती बनाया, और हमेशा अपने दिलों को इसी नेमत पर क़ायम रखने की दुआ करें।
📜 आयत 5-9 — अल-हुजुरात
अनुवाद — अल-हुजुरात 7
सूरा अल-हुजुरात आयत 7 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जान रखो कि तुम में ख़ुदा के पैग़म्बर (मौजूद)…सूरा आयत 7/18 — अल-हुजुरात الحجرات (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-हुजुरात सुनें, अल-हुजुरात अनुवाद, अल-हुजुरात mp3, अल-हुजुरात pdf. आयत 5–9. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए








