अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- يُحَارِبُونَ اللَّهَ وَرَسُولَهُ: अल्लाह और उसके रसूल से लड़ाई करना, यानी उनके आदेशों की अवहेलना करना और उनके खिलाफ बगावत करना।
- وَيَسْعَوْنَ فِي الْأَرْضِ فَسَادًا: ज़मीन में फसाद फैलाने की कोशिश करना, जैसे कत्ल करना, लूटपाट करना और रास्ते में दहशत फैलाना।
- أَن يُقَتَّلُوا: उन्हें क़त्ल कर दिया जाए।
- أَوْ يُصَلَّبُوا: या उन्हें सूली पर चढ़ा दिया जाए (यानी लकड़ी या इसी तरह की चीज़ पर टांग दिया जाए)।
- أَوْ تُقَطَّعَ أَيْدِيهِمْ وَأَرْجُلُهُم مِّنْ خِلَافٍ: या उनके हाथ और पैर उल्टे तरीके से काट दिए जाएं (यानी दायाँ हाथ और बायाँ पैर)।
- أَوْ يُنفَوْا مِنَ الْأَرْضِ: या उन्हें ज़मीन से निकाल दिया जाए (यानी देश से बेदखल कर दिया जाए)।
- خِزْيٌ: रुसवाई और ज़िल्लत।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत उन लोगों की सज़ा बयान करती है जो अल्लाह और उसके रसूल ﷺ के खिलाफ लड़ाई छेड़ते हैं और ज़मीन में फसाद फैलाते हैं। ऐसे लोगों का मक़सद होता है कि वे अल्लाह के दीन को कमज़ोर करें, लोगों की जान और माल को नुक़सान पहुँचाएं, और समाज में खौफ़ और बदअमनी फैलाएं। ये वो लोग हैं जो डाका डालते हैं, कत्ल करते हैं, और रास्तों को असुरक्षित बनाते हैं।
अल्लाह ने इनके लिए चार सज़ाएं मुक़र्रर की हैं, और हालात के हिसाब से इनमें से कोई एक सज़ा दी जा सकती है:
- क़त्ल: अगर उन्होंने सिर्फ़ खौफ़ फैलाया हो और किसी को क़त्ल न किया हो, तो उन्हें मौत की सज़ा दी जा सकती है।
- सूली पर चढ़ाना: अगर उन्होंने क़त्ल भी किया हो और माल भी लूटा हो, तो उन्हें सूली पर चढ़ाया जा सकता है, ताकि दूसरों के लिए इबरत हो।
- हाथ-पैर उल्टे काटना: अगर उन्होंने सिर्फ़ माल लूटा हो और क़त्ल न किया हो, तो उनका दायाँ हाथ और बायाँ पैर काटा जा सकता है।
- देश से निकालना: अगर उनका जुर्म इन सब से हल्का हो, तो उन्हें जेल में डालकर या देश से बेदखल करके सज़ा दी जा सकती है।
यह सज़ा उनके लिए दुनिया में रुसवाई और ज़िल्लत का सबब है, और अगर उन्होंने तौबा नहीं की, तो आख़िरत में उनके लिए बहुत बड़ा अज़ाब है। लेकिन अगर वे इस सज़ा से पहले तौबा कर लें, तो अल्लाह तआला माफ़ करने वाला और रहम करने वाला है।
दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):
इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि इस्लाम अमन और सलामती का दीन है। अल्लाह ने उन लोगों के लिए सख्त सज़ा मुक़र्रर की है जो समाज में फसाद फैलाते हैं, क्योंकि फसाद से पूरे समाज को नुक़सान पहुँचता है। यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह की निगाह में इंसान की जान, माल और इज़्ज़त कितनी अहमियत रखती है। इसलिए हमें चाहिए कि हम हमेशा अमन क़ायम रखें, किसी को नुक़सान न पहुँचाएं, और अल्लाह के आदेशों का पालन करें। अगर कोई इंसान गलती कर बैठे, तो उसे चाहिए कि वह तौबा करे, क्योंकि अल्लाह की रहमत बहुत वसीअ है और वह तौबा करने वालों को माफ़ कर देता है। याद रखें, दुनिया की सज़ा चाहे जितनी भी सख्त हो, आख़िरत का अज़ाब उससे कहीं ज़्यादा सख्त है। इसलिए हमेशा अल्लाह के दीन पर चलें और उसकी रहमत के तलबगार रहें।
📜 आयत 31-35 — अल-माइदा
अनुवाद — अल-माइदा 33
सूरा अल-माइदा आयत 33 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : जो लोग ख़ुदा और उसके रसूल से लड़ते भिड़ते हैं…सूरा आयत 33/120 — अल-माइदा المائدة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-माइदा सुनें, अल-माइदा अनुवाद, अल-माइदा mp3, अल-माइदा pdf. आयत 31–35. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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