Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- خَافَ (ख़ाफ़): डरा, भयभीत हुआ
- مَقَامَ رَبِّهِ (मक़ामा रब्बिही): अपने रब के सामने खड़े होने का स्थान, यानी क़यामत के दिन हिसाब के लिए प्रस्तुत होना
- جَنَّتَانِ (जन्नतानि): दो जन्नतें (दो बाग़)
तफ़सीर:
यह आयत उन लोगों के लिए खुशख़बरी लेकर आई है जो अपने रब से डरते हैं। यहाँ "मक़ामे रब" से मुराद वह मुक़ाम है जब बंदा क़यामत के दिन अपने रब के सामने हिसाब के लिए खड़ा होगा। जो व्यक्ति उस दिन के ख़ौफ़ को अपने दिल में रखता है, वही असल में सच्चा मोमिन है। यह ख़ौफ़ सिर्फ़ ज़ुबानी नहीं होता, बल्कि यह अमल में नज़र आता है — वह अल्लाह के हुक्मों की पैरवी करता है, उसकी नाफ़रमानी से बचता है, और अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक़ ढालता है।
इस ख़ौफ़ का नतीजा अल्लाह की तरफ़ से दो जन्नतें हैं। यह दो जन्नतें उस इनाम की अज़मत को बयान करती हैं जो अल्लाह ने अपने डरने वाले बंदों के लिए तैयार की हैं। एक जन्नत उनके अच्छे आमाल का इनाम है, और दूसरी उनके तक़वा और अल्लाह के ख़ौफ़ का। यह अल्लाह का फ़ज़ल है कि वह अपने बंदों को इतनी बड़ी नेअमतों से नवाज़ता है।
प्यारे भाइयो और बहनो! यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह का ख़ौफ़ हमारे लिए बोझ नहीं, बल्कि रहमत है। यह ख़ौफ़ हमें गुनाहों से रोकता है, हमारे दिलों को साफ़ करता है, और हमें उस रास्ते पर चलाता है जो हमें जन्नत तक पहुँचाता है। जिस व्यक्ति के दिल में यह ख़ौफ़ होता है, वह दुनिया की फ़ानी चीज़ों के पीछे नहीं भागता, बल्कि उस आख़िरत की तैयारी में लगा रहता है जो हमेशा रहने वाली है।
अल्लाह तआला ने इस आयत में "जन्नतैन" (दो जन्नतें) का ज़िक्र करके हमें बताया है कि उसका इनाम कितना बड़ा है। यह उसकी रहमत और करम की निशानी है कि वह अपने बंदों को इतनी बड़ी नेअमतों की खुशख़बरी देता है। आओ हम सब अपने दिलों में अल्लाह का ख़ौफ़ पैदा करें, उसकी इबादत को अपनी ज़िंदगी का हिस्सा बनाएं, और उस राह पर चलें जो हमें उसकी रज़ा और जन्नत तक पहुँचाए। यही हमारी कामयाबी है, यही हमारी नजात है।
📜 आयत 44-48 — सूरा अर-रहमान
अनुवाद — अर-रहमान 46
सूरा अर-रहमान आयत 46 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जो शख्स अपने परवरदिगार के सामने खड़े होने से…सूरा आयत 46/78 — सूरा अर-रहमान الرحمن (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अर-रहमान सुनें, सूरा अर-रहमान अनुवाद, सूरा अर-रहमान mp3, सूरा अर-रहमान pdf. आयत 44–48. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अर-रहमान
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
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