अर-रहमान · 46/78
अनुवाद उच्चारण — अर-रहमान
وَلِمَنْ خَافَ مَقَامَ رَبِّهِ جَنَّتَانِ ۝٤٦
Wa liman khaafa maqaama rabbihee jannataan
📖 हिंदी अर्थ
और जो शख्स अपने परवरदिगार के सामने खड़े होने से डरता रहा उसके लिए दो दो बाग़ हैं
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • خَافَ (ख़ाफ़): डरा, भयभीत हुआ
  • مَقَامَ رَبِّهِ (मक़ामा रब्बिही): अपने रब के सामने खड़े होने का स्थान, यानी क़यामत के दिन हिसाब के लिए प्रस्तुत होना
  • جَنَّتَانِ (जन्नतानि): दो जन्नतें (दो बाग़)

तफ़सीर:

यह आयत उन लोगों के लिए खुशख़बरी लेकर आई है जो अपने रब से डरते हैं। यहाँ "मक़ामे रब" से मुराद वह मुक़ाम है जब बंदा क़यामत के दिन अपने रब के सामने हिसाब के लिए खड़ा होगा। जो व्यक्ति उस दिन के ख़ौफ़ को अपने दिल में रखता है, वही असल में सच्चा मोमिन है। यह ख़ौफ़ सिर्फ़ ज़ुबानी नहीं होता, बल्कि यह अमल में नज़र आता है — वह अल्लाह के हुक्मों की पैरवी करता है, उसकी नाफ़रमानी से बचता है, और अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक़ ढालता है।

इस ख़ौफ़ का नतीजा अल्लाह की तरफ़ से दो जन्नतें हैं। यह दो जन्नतें उस इनाम की अज़मत को बयान करती हैं जो अल्लाह ने अपने डरने वाले बंदों के लिए तैयार की हैं। एक जन्नत उनके अच्छे आमाल का इनाम है, और दूसरी उनके तक़वा और अल्लाह के ख़ौफ़ का। यह अल्लाह का फ़ज़ल है कि वह अपने बंदों को इतनी बड़ी नेअमतों से नवाज़ता है।

प्यारे भाइयो और बहनो! यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह का ख़ौफ़ हमारे लिए बोझ नहीं, बल्कि रहमत है। यह ख़ौफ़ हमें गुनाहों से रोकता है, हमारे दिलों को साफ़ करता है, और हमें उस रास्ते पर चलाता है जो हमें जन्नत तक पहुँचाता है। जिस व्यक्ति के दिल में यह ख़ौफ़ होता है, वह दुनिया की फ़ानी चीज़ों के पीछे नहीं भागता, बल्कि उस आख़िरत की तैयारी में लगा रहता है जो हमेशा रहने वाली है।

अल्लाह तआला ने इस आयत में "जन्नतैन" (दो जन्नतें) का ज़िक्र करके हमें बताया है कि उसका इनाम कितना बड़ा है। यह उसकी रहमत और करम की निशानी है कि वह अपने बंदों को इतनी बड़ी नेअमतों की खुशख़बरी देता है। आओ हम सब अपने दिलों में अल्लाह का ख़ौफ़ पैदा करें, उसकी इबादत को अपनी ज़िंदगी का हिस्सा बनाएं, और उस राह पर चलें जो हमें उसकी रज़ा और जन्नत तक पहुँचाए। यही हमारी कामयाबी है, यही हमारी नजात है।

🎧 सुनें

📜 आयत 44-48 — अर-रहमान

44يَطُوفُونَ بَيْنَهَا وَبَيْنَ حَمِيمٍ آنٍ
ये लोग दोज़ख़ और हद दरजा खौलते हुए पानी के दरमियान (बेक़रार दौड़ते) चक्कर लगाते फिरेंगे
45فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ
तो तुम दोनों अपने परवरदिगार की किस किस नेअमत को न मानोगे
46وَلِمَنْ خَافَ مَقَامَ رَبِّهِ جَنَّتَانِ
और जो शख्स अपने परवरदिगार के सामने खड़े होने से डरता रहा उसके लिए दो दो बाग़ हैं
47فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ
तो तुम दोनों अपने परवरदिगार की कौन कौन सी नेअमत से इन्कार करोगे
48ذَوَاتَا أَفْنَانٍ
दोनों बाग़ (दरख्तों की) टहनियों से हरे भरे (मेवों से लदे) हुए
अर-रहमानकुरान सूची
78आयत
मदनीRevelation
46आयत

अनुवाद — अर-रहमान 46

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Tuesday, August 18, 2026

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