अर-रहमान · 47/78
अनुवाद उच्चारण — अर-रहमान
فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ۝٤٧
Fabi ayyi aalaaa`i Rabbikumaa tukazzibaan
📖 हिंदी अर्थ
तो तुम दोनों अपने परवरदिगार की कौन कौन सी नेअमत से इन्कार करोगे

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • آلاء: अल्लाह की नेमतें, उपकार और एहसान।
  • تُكَذِّبَانِ: तुम दोनों झुठलाते हो (यहाँ जिन्न और इंसान दोनों को सम्बोधित किया गया है)।

तफ़सीर:

ऐ जिन्न और इंसान की जमात! अल्लाह तआला ने तुम पर जो अनगिनत नेमतें और एहसानात बरसाए हैं, उनमें से कौन-सी नेमत को तुम झुठला सकते हो? यह आयत एक ऐसा सवाल है जो हर इंसान और जिन्न के ज़मीर को झिंझोड़ कर रख देता है। अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त ने अपनी रहमत और कुदरत के जो नमूने पेश किए हैं—आसमान, ज़मीन, सूरज, चाँद, पानी, हवा, रिज़्क़, सेहत, और सबसे बड़ी नेमत ईमान और हिदायत—इन सबके बावजूद क्या तुम्हारे पास इन्हें झुठलाने की कोई वजह है?

यह आयत अपने अन्दर एक गहरा दावती पैग़ाम रखती है। यह हमें सिखाती है कि अल्लाह की नेमतों को पहचानो, उन पर शुक्र अदा करो, और अपनी ज़बान से उसका इक़रार करो। जब हम अपने चारों ओर देखते हैं तो हर तरफ अल्लाह की रहमत के निशान बिखरे पड़े हैं। साँस लेना, खाना-पीना, चलना-फिरना, और यहाँ तक कि सोचने और समझने की ताक़त—यह सब उसी का करम है। क्या यह नेमतें किसी और की देन हैं? हरगिज़ नहीं।

यह आयत हमें उस मोड़ पर लाकर खड़ी करती है जहाँ हमें फैसला करना है—या तो हम अल्लाह की नेमतों का शुक्र अदा करें और उसकी इबादत में जुट जाएँ, या फिर नाशुक्री करके उसके अज़ाब के मुस्तहिक़ बनें। लेकिन अक़्लमन्द वही है जो अपने रब की नेमतों को पहचाने, उन पर ईमान लाए, और अपनी ज़िन्दगी को उसकी रज़ा के मुताबिक़ ढाले। याद रखो, यह नेमतें हमेशा रहने वाली नहीं हैं, एक दिन इनका हिसाब देना होगा। पस आज ही अपने रब का शुक्र अदा करो, उसकी नेमतों को झुठलाने से बचो, और उसकी रहमत के साये में जन्नत की तरफ कदम बढ़ाओ।



📜 आयत 45-49 — अर-रहमान

45فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ
तो तुम दोनों अपने परवरदिगार की किस किस नेअमत को न मानोगे
46وَلِمَنْ خَافَ مَقَامَ رَبِّهِ جَنَّتَانِ
और जो शख्स अपने परवरदिगार के सामने खड़े होने से डरता रहा उसके लिए दो दो बाग़ हैं
47فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ
तो तुम दोनों अपने परवरदिगार की कौन कौन सी नेअमत से इन्कार करोगे
48ذَوَاتَا أَفْنَانٍ
दोनों बाग़ (दरख्तों की) टहनियों से हरे भरे (मेवों से लदे) हुए
49فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ
फिर दोनों अपने सरपरस्त की किस किस नेअमतों को झुठलाओगे
अर-रहमानकुरान सूची
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मदनीRevelation
47आयत

अनुवाद — अर-रहमान 47

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Tuesday, August 18, 2026

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