अल-मुजादिला · 7/22
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-मुजादिला
أَلَمْ تَرَ أَنَّ اللَّهَ يَعْلَمُ مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَمَا فِي الْأَرْضِ ۖ مَا يَكُونُ مِن نَّجْوَىٰ ثَلَاثَةٍ إِلَّا هُوَ رَابِعُهُمْ وَلَا خَمْسَةٍ إِلَّا هُوَ سَادِسُهُمْ وَلَا أَدْنَىٰ مِن ذَٰلِكَ وَلَا أَكْثَرَ إِلَّا هُوَ مَعَهُمْ أَيْنَ مَا كَانُوا ۖ ثُمَّ يُنَبِّئُهُم بِمَا عَمِلُوا يَوْمَ الْقِيَامَةِ ۚ إِنَّ اللَّهَ بِكُلِّ شَيْءٍ عَلِيمٌ ۝٧
Alam tara annal laaha ya`lamu maa fis samaawaati wa maa fil ardi maa yakoonu min najwaa salaasatin illaa Huwa raabi`uhum wa laa khamsatin illaa huwa saadisuhum wa laaa adnaa min zaalika wa laaa aksara illaa huwa ma`ahum ayna, maa kaanoo summa yunabbi`uhum bimaa `amiloo yawmal qiyaamah; innal laaha bikulli shai`in aleem
📖 हिंदी अर्थ
क्या तुमको मालूम नहीं कि जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है (ग़रज़ सब कुछ) ख़ुदा जानता है जब तीन (आदमियों) का ख़ुफिया मशवेरा होता है तो वह (ख़ुद) उनका ज़रूर चौथा है और जब पाँच का मशवेरा होता है तो वह उनका छठा है और उससे कम हो या ज्यादा और चाहे जहाँ कहीं हो वह उनके साथ ज़रूर होता है फिर जो कुछ वह (दुनिया में) करते रहे क़यामत के दिन उनको उससे आगाह कर देगा बेशक ख़ुदा हर चीज़ से ख़ूब वाक़िफ़ है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
0:00
0:00
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • नजवा (نجوى): गुप्त बातचीत, कानाफूसी, सरगोशी।
  • राबिउहुम (رابعهم): उनका चौथा।
  • सादिसुहुम (سادسهم): उनका छठा।
  • युनबीउहुम (ينبئهم): उन्हें सूचित करेगा, बता देगा।

तफसीर (व्याख्या):

ऐ नबी! क्या तुमने नहीं जाना कि अल्लाह तआला आसमानों और ज़मीन की हर चीज़ का पूरा इल्म रखता है? उसके ज्ञान से कोई चीज़ छिपी नहीं है—न छोटी, न बड़ी, न ज़मीन के अंदर, न आसमानों के ऊपर। वह हर पल, हर जगह, हर हाल में मौजूद है।

जब तीन लोग आपस में गुप्त बातचीत करते हैं, तो अल्लाह उनका चौथा होता है—अपने ज्ञान से, अपनी निगरानी से। जब पाँच लोग सरगोशी करते हैं, तो वह उनका छठा होता है। और चाहे उनकी तादाद इससे कम हो या ज़्यादा, वह हर हाल में उनके साथ होता है, चाहे वे किसी भी जगह हों—चाहे पहाड़ों की गुफाओं में, चाहे समुद्र की गहराइयों में, चाहे घरों की चारदीवारी के अंदर। उनकी कोई बात, कोई चाल, कोई साज़िश उससे छिपी नहीं है।

यह बात मोमिन के दिल को कितना सुकून देती है! जब हम अकेले होते हैं, तो अल्लाह हमारे साथ होता है। जब हम गुप्त में कोई अच्छा काम करते हैं, तो वह देखता है। और जब कोई बुराई की साज़िश रचते हैं, तो वह सब जानता है। फिर क़यामत के दिन वह उन्हें बताएगा कि उन्होंने दुनिया में क्या-क्या किया—हर अच्छाई और हर बुराई, हर छोटी और बड़ी बात। वह दिन उनके लिए शर्मिंदगी और पछतावे का दिन होगा, जब उनके राज़ खुल जाएँगे और वे अपने किए का बदला पाएँगे।

अल्लाह हर चीज़ का पूरा ज्ञान रखता है। उसके इल्म से कोई ज़र्रा भी बाहर नहीं है। यही अल्लाह की बड़ाई है—वह हमेशा मौजूद है, हमेशा देखने वाला है, हमेशा सुनने वाला है।

दावत (नसीहत):

ऐ अल्लाह के बंदो! याद रखो, तुम चाहे जितनी गुप्त बातें करो, अल्लाह सब सुनता और देखता है। इसलिए अपनी ज़बान को गुनाह से बचाओ, अपने दिल को साज़िशों से पाक रखो। जब तुम अकेले होते हो, तो यह मत समझो कि कोई तुम्हें नहीं देख रहा—अल्लाह तुम्हारे साथ है। उसकी मौजूदगी का एहसास तुम्हें गुनाह से रोके और नेकी पर उभारे। यही ईमान की मिठास है कि बंदा हर पल यह जाने कि उसका रब उसके साथ है, उसे देख रहा है, और उसकी हर अच्छाई का बदला उसे ज़रूर मिलेगा। अल्लाह से डरो, उससे मुहब्बत करो, और उसकी रज़ा के काम करो—क्योंकि वही सब कुछ जानने वाला है।



📜 आयत 5-9 — सूरा अल-मुजादिला

5إِنَّ الَّذِينَ يُحَادُّونَ اللَّهَ وَرَسُولَهُ كُبِتُوا كَمَا كُبِتَ الَّذِينَ مِن قَبْلِهِمْ ۚ وَقَدْ أَنزَلْنَا آيَاتٍ بَيِّنَاتٍ ۚ وَلِلْكَافِرِينَ عَذَابٌ مُّهِينٌ
बेशक जो लोग ख़ुदा की और उसके रसूल की मुख़ालेफ़त करते हैं वह (उसी तरह) ज़लील किए जाएँगे जिस तरह उनके पहले लोग किए जा चुके हैं और हम तो अपनी साफ़ और सरीही आयतें नाज़िल कर चुके और काफिरों के लिए ज़लील करने वाला अज़ाब है
6يَوْمَ يَبْعَثُهُمُ اللَّهُ جَمِيعًا فَيُنَبِّئُهُم بِمَا عَمِلُوا ۚ أَحْصَاهُ اللَّهُ وَنَسُوهُ ۚ وَاللَّهُ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ شَهِيدٌ
जिस दिन ख़ुदा उन सबको दोबारा उठाएगा तो उनके आमाल से उनको आगाह कर देगा ये लोग (अगरचे) उनको भूल गये हैं मगर ख़ुदा ने उनको याद रखा है और ख़ुदा तो हर चीज़ का गवाह है
7أَلَمْ تَرَ أَنَّ اللَّهَ يَعْلَمُ مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَمَا فِي الْأَرْضِ ۖ مَا يَكُونُ مِن نَّجْوَىٰ ثَلَاثَةٍ إِلَّا هُوَ رَابِعُهُمْ وَلَا خَمْسَةٍ إِلَّا هُوَ سَادِسُهُمْ وَلَا أَدْنَىٰ مِن ذَٰلِكَ وَلَا أَكْثَرَ إِلَّا هُوَ مَعَهُمْ أَيْنَ مَا كَانُوا ۖ ثُمَّ يُنَبِّئُهُم بِمَا عَمِلُوا يَوْمَ الْقِيَامَةِ ۚ إِنَّ اللَّهَ بِكُلِّ شَيْءٍ عَلِيمٌ
क्या तुमको मालूम नहीं कि जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है (ग़रज़ सब कुछ) ख़ुदा जानता है जब तीन (आदमियों) का ख़ुफिया मशवेरा होता है तो वह (ख़ुद) उनका ज़रूर चौथा है और जब पाँच का मशवेरा होता है तो वह उनका छठा है और उससे कम हो या ज्यादा और चाहे जहाँ कहीं हो वह उनके साथ ज़रूर होता है फिर जो कुछ वह (दुनिया में) करते रहे क़यामत के दिन उनको उससे आगाह कर देगा बेशक ख़ुदा हर चीज़ से ख़ूब वाक़िफ़ है
8أَلَمْ تَرَ إِلَى الَّذِينَ نُهُوا عَنِ النَّجْوَىٰ ثُمَّ يَعُودُونَ لِمَا نُهُوا عَنْهُ وَيَتَنَاجَوْنَ بِالْإِثْمِ وَالْعُدْوَانِ وَمَعْصِيَتِ الرَّسُولِ وَإِذَا جَاءُوكَ حَيَّوْكَ بِمَا لَمْ يُحَيِّكَ بِهِ اللَّهُ وَيَقُولُونَ فِي أَنفُسِهِمْ لَوْلَا يُعَذِّبُنَا اللَّهُ بِمَا نَقُولُ ۚ حَسْبُهُمْ جَهَنَّمُ يَصْلَوْنَهَا ۖ فَبِئْسَ الْمَصِيرُ
क्या तुमने उन लोगों को नहीं देखा जिनको सरगोशियाँ करने से मना किया गया ग़रज़ जिस काम की उनको मुमानिअत की गयी थी उसी को फिर करते हैं और (लुत्फ़ तो ये है कि) गुनाह और (बेजा) ज्यादती और रसूल की नाफरमानी की सरगोशियाँ करते हैं और जब तुम्हारे पास आते हैं तो जिन लफ्ज़ों से ख़ुदा ने भी तुम को सलाम नहीं किया उन लफ्ज़ों से सलाम करते हैं और अपने जी में कहते हैं कि (अगर ये वाक़ई पैग़म्बर हैं तो) जो कुछ हम कहते हैं ख़ुदा हमें उसकी सज़ा क्यों नहीं देता (ऐ रसूल) उनको दोज़ख़ ही (की सज़ा) काफी है जिसमें ये दाख़िल होंगे तो वह (क्या) बुरी जगह है
9يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا إِذَا تَنَاجَيْتُمْ فَلَا تَتَنَاجَوْا بِالْإِثْمِ وَالْعُدْوَانِ وَمَعْصِيَتِ الرَّسُولِ وَتَنَاجَوْا بِالْبِرِّ وَالتَّقْوَىٰ ۖ وَاتَّقُوا اللَّهَ الَّذِي إِلَيْهِ تُحْشَرُونَ
ऐ ईमानदारों जब तुम आपस में सरगोशी करो तो गुनाह और ज्यादती और रसूल की नाफरमानी की सरगोशी न करो बल्कि नेकीकारी और परहेज़गारी की सरगोशी करो और ख़ुदा से डरते रहो जिसके सामने (एक दिन) जमा किए जाओगे
अल-मुजादिलाकुरान सूची
22आयत
मदनीअवतरण स्थान
7आयत

अनुवाद — अल-मुजादिला 7

सूरा अल-मुजादिला आयत 7 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : क्या तुमको मालूम नहीं कि जो कुछ आसमानों में है…

सूरा आयत 7/22 — सूरा अल-मुजादिला المجادلة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-मुजादिला सुनें, सूरा अल-मुजादिला अनुवाद, सूरा अल-मुजादिला mp3, सूरा अल-मुजादिला pdf. आयत 5–9. हिंदी अर्थ: اردو.





पवित्र क़ुरआन


Wednesday, September 30, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए