अल-क़लम · 32/52
अनुवाद उच्चारण — अल-क़लम
عَسَىٰ رَبُّنَا أَن يُبْدِلَنَا خَيْرًا مِّنْهَا إِنَّا إِلَىٰ رَبِّنَا رَاغِبُونَ ۝٣٢
Asaa rabbunaaa any yubdilanaa khairam minhaaa innaaa ilaa rabbinaa raaghiboon
📖 हिंदी अर्थ
उम्मीद है कि हमारा परवरदिगार हमें इससे बेहतर बाग़ इनायत फ़रमाए हम अपने परवरदिगार की तरफ रूजू करते हैं
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • عَسَىٰ – आशा है, संभावना है
  • يُبْدِلَنَا – हमें बदल कर दे, इसके स्थान पर दे
  • خَيْرًا مِّنْهَا – इससे बेहतर (बगीचा)
  • رَاغِبُونَ – हम आशा रखने वाले हैं, चाहने वाले हैं, रहमत के चाहने वाले

विस्तृत तफसीर:

जब उन बगीचे वालों ने अपने बगीचे को जला हुआ और तबाह देखा, तो उन्हें गहरा सदमा लगा। पहले तो उन्होंने कहा कि शायद हम रास्ता भूल गए हैं, लेकिन जब उन्होंने ध्यान से देखा तो पहचान लिया कि यह उन्हीं का बगीचा है। तब उन्होंने कहा: "नहीं, हम वंचित कर दिए गए हैं।" यह सब उनके उस बुरे इरादे का नतीजा था जो उन्होंने रात में किया था कि सुबह गरीबों को फल न दें।

जब उनमें से सबसे अच्छे इंसान ने कहा था: "क्या मैंने तुमसे नहीं कहा था कि 'इंशा अल्लाह' कहो?" तो अब उन्हें अपनी गलती का एहसास हुआ। उन्होंने अपने दिलों में तौबा की और कहा: "हमारा रब इससे पाक है कि वह हम पर ज़ुल्म करे, बल्कि हम खुद अपनी जानों पर ज़ुल्म करने वाले थे।" फिर वे एक-दूसरे को मलामत करने लगे और कहा: "हाय हमारा अंजाम! हम सच में हद से बढ़ गए थे, हमने गरीबों का हक़ रोका और अल्लाह के हुक्म की खिलाफ़वाज़ी की।"

फिर उन्होंने अल्लाह से दुआ की: "उम्मीद है कि हमारा रब हमें इससे बेहतर बगीचा दे दे, हम अपने रब की तरफ ही रग़बत रखते हैं।" यानी उन्होंने अपनी गलती का इक़रार किया, तौबा की और अल्लाह से बेहतर चीज़ की उम्मीद की। उन्होंने यह नहीं कहा कि हमें वही बगीचा वापस मिल जाए, बल्कि उन्होंने अल्लाह से बेहतर चीज़ माँगी — यह उनकी तौबा की सच्चाई का सबूत था।

सीख और पाठ:

यह क़िस्सा हमें सिखाता है कि जब इंसान गलती करता है और फिर उसे एहसास होता है, तो उसे निराश नहीं होना चाहिए। अल्लाह की रहमत बहुत बड़ी है। वह चाहे तो तबाह हुए बगीचे की जगह बेहतर बगीचा दे सकता है। जब तक इंसान अल्लाह की तरफ रग़बत रखे, उसकी रहमत से उम्मीद रखे, अल्लाह उसे कभी निराश नहीं करता। यह हमारे लिए बहुत बड़ी खुशखबरी है — चाहे हमसे कितनी ही बड़ी गलती हो जाए, अल्लाह की दरगाह से भागना नहीं चाहिए, बल्कि उसी की तरफ लौटना चाहिए। अल्लाह तौबा करने वालों को प्यार करता है और उनकी गलतियों को नेकियों में बदल देता है।

याद रखिए, यह दुनिया की सज़ा भी अल्लाह की रहमत का एक पहलू है — ताकि इंसान सुधर जाए। लेकिन आख़िरत की सज़ा उससे कहीं बड़ी है। इसलिए हमें हमेशा अल्लाह के हुक्मों का पालन करना चाहिए, गरीबों का हक़ देना चाहिए, और हर काम में "इंशा अल्लाह" कहना चाहिए। अल्लाह हमें सच्ची तौबा करने की तौफ़ीक़ दे और हमें अपनी रहमत से नवाज़े। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 30-34 — अल-क़लम

30فَأَقْبَلَ بَعْضُهُمْ عَلَىٰ بَعْضٍ يَتَلَاوَمُونَ
फिर लगे एक दूसरे के मुँह दर मुँह मलामत करने
31قَالُوا يَا وَيْلَنَا إِنَّا كُنَّا طَاغِينَ
(आख़िर) सबने इक़रार किया कि हाए अफसोस बेशक हम ही ख़ुद सरकश थे
32عَسَىٰ رَبُّنَا أَن يُبْدِلَنَا خَيْرًا مِّنْهَا إِنَّا إِلَىٰ رَبِّنَا رَاغِبُونَ
उम्मीद है कि हमारा परवरदिगार हमें इससे बेहतर बाग़ इनायत फ़रमाए हम अपने परवरदिगार की तरफ रूजू करते हैं
33كَذَٰلِكَ الْعَذَابُ ۖ وَلَعَذَابُ الْآخِرَةِ أَكْبَرُ ۚ لَوْ كَانُوا يَعْلَمُونَ
(देखो) यूँ अज़ाब होता है और आख़ेरत का अज़ाब तो इससे कहीं बढ़ कर है अगर ये लोग समझते हों
34إِنَّ لِلْمُتَّقِينَ عِندَ رَبِّهِمْ جَنَّاتِ النَّعِيمِ
बेशक परहेज़गार लोग अपने परवरदिगार के यहाँ ऐशो आराम के बाग़ों में होंगे
अल-क़लमकुरान सूची
52आयत
मक्कीRevelation
32आयत

अनुवाद — अल-क़लम 32

सूरा अल-क़लम आयत 32 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : उम्मीद है कि हमारा परवरदिगार हमें इससे बेहतर बाग़ इनायत…

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Tuesday, August 18, 2026

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