अल-क़लम · 33/52
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-क़लम
كَذَٰلِكَ الْعَذَابُ ۖ وَلَعَذَابُ الْآخِرَةِ أَكْبَرُ ۚ لَوْ كَانُوا يَعْلَمُونَ ۝٣٣
Kazaalikal azaab, wa la`azaabul aakhirati akbar; law kaanoo ya`lamoon
📖 हिंदी अर्थ
(देखो) यूँ अज़ाब होता है और आख़ेरत का अज़ाब तो इससे कहीं बढ़ कर है अगर ये लोग समझते हों

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
0:00
0:00
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • كَذَٰلِكَ: इसी प्रकार, ऐसा ही।
  • الْعَذَابُ: यातना, अज़ाब।
  • وَلَعَذَابُ الْآخِرَةِ: और आख़िरत (अंतिम जीवन) की यातना।
  • أَكْبَرُ: बहुत बड़ा, अधिक भयानक।
  • لَوْ كَانُوا يَعْلَمُونَ: यदि वे जानते (समझते)।

तफ़सीर (व्याख्या):

जिस प्रकार हमने बाग़ वालों को उनके कुकर्मों और अल्लाह की नाफ़रमानी की सज़ा दी, उन्हें उनकी नेमतों से महरूम कर दिया और उनकी मेहनत को बर्बाद कर दिया, ठीक उसी प्रकार हम उन लोगों को भी सज़ा देते हैं जो अल्लाह के हुक्मों की अवहेलना करते हैं, उसकी नेमतों का शुक्र अदा नहीं करते और दूसरों के हक़ों को दबाते हैं। यह दुनिया की सज़ा है, जो उनके किए का नतीजा है।

लेकिन अफ़सोस! अगर ये लोग जान लें कि आख़िरत (क़ियामत के दिन) की यातना इस दुनिया की यातना से कहीं अधिक बड़ी, भयानक और स्थायी है, तो वे हर उस काम से बचें जो उन्हें उस ओर ले जाता है। दुनिया की सज़ा चाहे जितनी भी सख्त हो, वह अस्थायी है और ख़त्म होने वाली है, लेकिन आख़िरत का अज़ाब हमेशा रहने वाला है, जिसकी शिद्दत और दर्द का अंदाज़ा नहीं लगाया जा सकता।

अल्लाह तआला हमें समझने की तौफ़ीक़ दे और हमें उन लोगों में से न बनाए जो दुनिया की खातिर आख़िरत को भूल जाते हैं। याद रखिए! अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है, लेकिन उसकी रहमत भी असीम है। जो लोग अपनी ग़लतियों से तौबा कर लें और अल्लाह की ओर लौट आएं, उनके लिए माफ़ी और इनाम का वादा है। आइए, हम सब अपने आपको इस दुनिया की आज़माइश में कामयाब बनाएं और आख़िरत की सफलता को अपना असली मक़सद बनाएं।



📜 आयत 31-35 — सूरा अल-क़लम

31قَالُوا يَا وَيْلَنَا إِنَّا كُنَّا طَاغِينَ
(आख़िर) सबने इक़रार किया कि हाए अफसोस बेशक हम ही ख़ुद सरकश थे
32عَسَىٰ رَبُّنَا أَن يُبْدِلَنَا خَيْرًا مِّنْهَا إِنَّا إِلَىٰ رَبِّنَا رَاغِبُونَ
उम्मीद है कि हमारा परवरदिगार हमें इससे बेहतर बाग़ इनायत फ़रमाए हम अपने परवरदिगार की तरफ रूजू करते हैं
33كَذَٰلِكَ الْعَذَابُ ۖ وَلَعَذَابُ الْآخِرَةِ أَكْبَرُ ۚ لَوْ كَانُوا يَعْلَمُونَ
(देखो) यूँ अज़ाब होता है और आख़ेरत का अज़ाब तो इससे कहीं बढ़ कर है अगर ये लोग समझते हों
34إِنَّ لِلْمُتَّقِينَ عِندَ رَبِّهِمْ جَنَّاتِ النَّعِيمِ
बेशक परहेज़गार लोग अपने परवरदिगार के यहाँ ऐशो आराम के बाग़ों में होंगे
35أَفَنَجْعَلُ الْمُسْلِمِينَ كَالْمُجْرِمِينَ
तो क्या हम फरमाबरदारों को नाफ़रमानो के बराबर कर देंगे
अल-क़लमकुरान सूची
52आयत
मक्कीअवतरण स्थान
33आयत

अनुवाद — अल-क़लम 33

सूरा अल-क़लम आयत 33 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (देखो) यूँ अज़ाब होता है और आख़ेरत का अज़ाब तो…

सूरा आयत 33/52 — सूरा अल-क़लम القلم (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-क़लम सुनें, सूरा अल-क़लम अनुवाद, सूरा अल-क़लम mp3, सूरा अल-क़लम pdf. आयत 31–35. हिंदी अर्थ: اردو.





पवित्र क़ुरआन


Thursday, October 1, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए