अल-मुद्दस्सिर · 39/56
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-मुद्दस्सिर
إِلَّا أَصْحَابَ الْيَمِينِ ۝٣٩
Illaaa as haabal yameen
📖 हिंदी अर्थ
मगर दाहिने हाथ (में नामए अमल लेने) वाले

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • अस्हाबुल यमीन: दाहिने हाथ वाले, यानी नेक लोग, जिनका नामाए-आमाल (कर्मों की पुस्तक) दाहिने हाथ में दी जाएगी। ये वे लोग हैं जो ईमान लाए और अच्छे कर्म किए।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला फ़रमाता है कि हर व्यक्ति अपने कर्मों के बदले में गिरवी (रिहन) है, यानी हर आत्मा अपने किए हुए कर्मों के कारण बंधी हुई है और उसे उन कर्मों का हिसाब देना होगा। जिसने बुरे कर्म किए, वह अपने कर्मों के जाल में फंसा रहेगा और उसकी रिहाई नहीं होगी जब तक कि वह अपने कर्मों का पूरा हिसाब न दे दे।

लेकिन अल्लाह तआला ने इस सामान्य नियम से एक समूह को अलग किया है—"अस्हाबुल यमीन" यानी दाहिने हाथ वाले। ये वे लोग हैं जिन्होंने ईमान लाया, अल्लाह के आदेशों का पालन किया, फ़र्ज़ (अनिवार्य) इबादतें अदा कीं, और हराम (वर्जित) चीज़ों से बचे रहे। ये वे लोग हैं जिन्होंने अपनी आत्माओं को अच्छे कर्मों के माध्यम से आज़ाद कर लिया, यानी उन्होंने अपने ईमान और नेक अमल से अपने आपको जहन्नम की आग से बचा लिया।

ये लोग जन्नत में होंगे, जहाँ वे एक-दूसरे से पूछेंगे कि उन काफ़िरों और गुनाहगारों को किस चीज़ ने जहन्नम में डाला? तो वे जवाब देंगे: "हम नमाज़ नहीं पढ़ते थे, हम ग़रीबों और मिस्कीनों को खाना नहीं खिलाते थे, हम बेकार की बातों में लगे रहते थे, और हम रोज़-ए-जज़ा (प्रतिक्षा के दिन) को झुठलाते थे।"

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह का दीन (धर्म) सिर्फ़ ज़बान से ईमान लाने का नाम नहीं है, बल्कि यह अमल (कर्म) का दीन है। जो लोग नमाज़ क़ायम करते हैं, अल्लाह की राह में खर्च करते हैं, और अच्छे कर्म करते हैं, वही असली कामयाब हैं।

दावती पहलू (प्रचारात्मक पहलू):

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह तआला की रहमत बहुत विशाल है। उसने हमें बताया है कि अगर हम ईमान लाएँ और अच्छे कर्म करें, तो हम उन लोगों में से हो सकते हैं जिन्हें जहन्नम से आज़ादी मिलेगी और जो जन्नत में दाखिल होंगे। अल्लाह ने हमें मौका दिया है कि हम अपनी ज़िंदगी को सुधारें, नमाज़ पढ़ें, अच्छे काम करें और बुराइयों से बचें। यही वह रास्ता है जो हमें दाहिने हाथ वालों में शामिल करेगा। आइए, हम सब मिलकर इस रास्ते पर चलने की कोशिश करें, ताकि अल्लाह की रहमत और जन्नत हमारा हिस्सा बने। अल्लाह हम सबको तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 37-41 — सूरा अल-मुद्दस्सिर

37لِمَن شَاءَ مِنكُمْ أَن يَتَقَدَّمَ أَوْ يَتَأَخَّرَ
(सबके लिए नहीें बल्कि) तुममें से वह जो शख़्श (नेकी की तरफ़) आगे बढ़ना
38كُلُّ نَفْسٍ بِمَا كَسَبَتْ رَهِينَةٌ
और (बुराई से) पीछे हटना चाहे हर शख़्श अपने आमाल के बदले गिर्द है
39إِلَّا أَصْحَابَ الْيَمِينِ
मगर दाहिने हाथ (में नामए अमल लेने) वाले
40فِي جَنَّاتٍ يَتَسَاءَلُونَ
(बेहिश्त के) बाग़ों में गुनेहगारों से बाहम पूछ रहे होंगे
41عَنِ الْمُجْرِمِينَ
कि आख़िर तुम्हें दोज़ख़ में कौन सी चीज़ (घसीट) लायी
अल-मुद्दस्सिरकुरान सूची
56आयत
मक्कीअवतरण स्थान
39आयत

अनुवाद — अल-मुद्दस्सिर 39

सूरा अल-मुद्दस्सिर आयत 39 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : मगर दाहिने हाथ (में नामए अमल लेने) वाले

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Thursday, October 1, 2026

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