Mishary Rashid Alafasy
✓
Mahmoud Khalil Al-Husary
✓
Abdurrahman As-Sudais
✓
Mohamed Siddiq Al-Minshawi
✓
Abdul Basit Abdul Samad
✓
Ali Al-Hudhaify
✓
Ahmed ibn Ali al-Ajamy
✓
Abu Bakr Ash-Shaatree
✓
Muhammad Ayyoub
✓
Abdullah Basfar
✓
Abdullah Al-Juhani
✓
Maher Al Muaiqly
✓
अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- كُلُّ نَفْسٍ: प्रत्येक प्राणी, हर आत्मा
- بِمَا كَسَبَتْ: अपने किए हुए कर्मों के बदले, जो उसने कमाया
- رَهِينَةٌ: बंधक, गिरवी, ज़िम्मेदार
व्याख्या:
अल्लाह तआला इस आयत में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और गंभीर सत्य बयान कर रहे हैं कि प्रत्येक आत्मा अपने कर्मों के बदले बंधक है। यानी हर इंसान अपने अच्छे या बुरे कर्मों की ज़िम्मेदारी से बच नहीं सकता। जैसे कोई वस्तु गिरवी रखी जाए तो वह तब तक मुक्त नहीं होती जब तक उसका बदला अदा न किया जाए, उसी प्रकार हर आत्मा अपने कर्मों के साथ बंधी हुई है।
यदि किसी व्यक्ति ने अच्छे कर्म किए हैं, तो उसके ये अच्छे कर्म उसे मुक्ति दिलाएँगे और उसे सफलता की ओर ले जाएँगे। और यदि उसने बुरे कर्म किए हैं, तो उसके बुरे कर्म उसे विनाश की ओर ले जाएँगे और वह उनके कारण पकड़ा जाएगा। यह अल्लाह का न्यायपूर्ण नियम है कि कोई आत्मा किसी दूसरे का बोझ नहीं उठाएगी, और न ही कोई किसी दूसरे के कर्मों से लाभ या हानि उठा सकता है।
यह आयत हमें यह शिक्षा देती है कि हमें अपने जीवन में हर पल यह ध्यान रखना चाहिए कि हमारे हर कर्म का हिसाब होगा। हमारी नमाज़, हमारा रोज़ा, हमारी ज़कात, हमारा अच्छा व्यवहार, हमारी ईमानदारी — यह सब वे चीज़ें हैं जो हमें इस बंधन से मुक्त करेंगी। और हमारे बुरे कर्म, हमारी लापरवाही, हमारा अत्याचार — यह सब वे चीज़ें हैं जो हमें इस बंधन में और जकड़ देंगी।
प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें जागरूक करती है कि हम अपने जीवन को व्यर्थ न बिताएँ। हर पल हमारे पास एक अनमोल अवसर है — अच्छे कर्म करने का, अल्लाह की इबादत करने का, और अपनी आत्मा को उस बंधन से मुक्त कराने का। अल्लाह ने हमें यह दुनिया इसलिए नहीं दी कि हम केवल खाएँ-पीएँ और मौज-मस्ती करें, बल्कि इसलिए दी है कि हम उसकी इबादत करें, उसके बताए रास्ते पर चलें, और अपने लिए ऐसा सामान इकट्ठा करें जो आख़िरत में हमारे काम आए।
याद रखिए! जिस दिन हम अल्लाह के सामने खड़े होंगे, उस दिन न तो हमारा धन काम आएगा, न हमारी संतान, न हमारी हैसियत। केवल हमारे कर्म ही हमारे साथ होंगे। इसलिए आज ही से अपने कर्मों को सुधारें, और उस दिन की तैयारी करें जब हर आत्मा को उसके कर्मों का फल मिलेगा। अल्लाह हम सभी को सच्चे दिल से अच्छे कर्म करने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 36-40 — सूरा अल-मुद्दस्सिर
अनुवाद — अल-मुद्दस्सिर 38
सूरा अल-मुद्दस्सिर आयत 38 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (बुराई से) पीछे हटना चाहे हर शख़्श अपने आमाल…सूरा आयत 38/56 — सूरा अल-मुद्दस्सिर المدثر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-मुद्दस्सिर सुनें, सूरा अल-मुद्दस्सिर अनुवाद, सूरा अल-मुद्दस्सिर mp3, सूरा अल-मुद्दस्सिर pdf. आयत 36–40. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-मुद्दस्सिर
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


