सूरा अल-मुद्दस्सिर अरबी और हिंदी
सूरा अल-मुद्दस्सिर को पूरे हिंदी अनुवाद, उच्चारण और ऑडियो तिलावत के साथ पढ़ें। आयत-दर-आयत हिंदी अर्थ। (56 आयत — مكية). अल-मुद्दस्सिर सुनें, अल-मुद्दस्सिर अनुवाद, अल-मुद्दस्सिर mp3, अल-मुद्दस्सिर pdf.सूरा अल-मुद्दस्सिर पढ़ें और सुनें
🎧 आयत
M
Mishary Rashid Alafasy
✓
Mishary Rashid Alafasy
✓
M
Mahmoud Khalil Al-Husary
✓
Mahmoud Khalil Al-Husary
✓
A
Abdurrahman As-Sudais
✓
Abdurrahman As-Sudais
✓
M
Mohamed Siddiq Al-Minshawi
✓
Mohamed Siddiq Al-Minshawi
✓
A
Abdul Basit Abdul Samad
✓
Abdul Basit Abdul Samad
✓
A
Ali Al-Hudhaify
✓
Ali Al-Hudhaify
✓
A
Ahmed ibn Ali al-Ajamy
✓
Ahmed ibn Ali al-Ajamy
✓
A
Abu Bakr Ash-Shaatree
✓
Abu Bakr Ash-Shaatree
✓
M
Muhammad Ayyoub
✓
Muhammad Ayyoub
✓
A
Abdullah Basfar
✓
Abdullah Basfar
✓
A
Abdullah Al-Juhani
✓
Abdullah Al-Juhani
✓
M
Maher Al Muaiqly
✓
Maher Al Muaiqly
✓
—
x1
ذَرْنِي وَمَنْ خَلَقْتُ وَحِيدًا ١١
📖 अनुवाद
आयत 11
(ऐ रसूल) मुझे और उस शख़्श को छोड़ दो जिसे मैने अकेला पैदा किया
كَلَّا ۖ إِنَّهُ كَانَ لِآيَاتِنَا عَنِيدًا ١٦
📖 अनुवाद
आयत 16
ये हरगिज़ न होगा ये तो मेरी आयतों का दुश्मन था
فَقَالَ إِنْ هَٰذَا إِلَّا سِحْرٌ يُؤْثَرُ ٢٤
📖 अनुवाद
आयत 24
फिर कहने लगा ये बस जादू है जो (अगलों से) चला आता है
وَمَا جَعَلْنَا أَصْحَابَ النَّارِ إِلَّا مَلَائِكَةً ۙ وَمَا جَعَلْنَا عِدَّتَهُمْ إِلَّا فِتْنَةً لِّلَّذِينَ كَفَرُوا لِيَسْتَيْقِنَ الَّذِينَ أُوتُوا الْكِتَابَ وَيَزْدَادَ الَّذِينَ آمَنُوا إِيمَانًا ۙ وَلَا يَرْتَابَ الَّذِينَ أُوتُوا الْكِتَابَ وَالْمُؤْمِنُونَ ۙ وَلِيَقُولَ الَّذِينَ فِي قُلُوبِهِم مَّرَضٌ وَالْكَافِرُونَ مَاذَا أَرَادَ اللَّهُ بِهَٰذَا مَثَلًا ۚ كَذَٰلِكَ يُضِلُّ اللَّهُ مَن يَشَاءُ وَيَهْدِي مَن يَشَاءُ ۚ وَمَا يَعْلَمُ جُنُودَ رَبِّكَ إِلَّا هُوَ ۚ وَمَا هِيَ إِلَّا ذِكْرَىٰ لِلْبَشَرِ ٣١
📖 अनुवाद
आयत 31
और हमने जहन्नुम का निगेहबान तो बस फरिश्तों को बनाया है और उनका ये शुमार भी काफिरों की आज़माइश के लिए मुक़र्रर किया ताकि अहले किताब (फौरन) यक़ीन कर लें और मोमिनो का ईमान और ज्यादा हो और अहले किताब और मोमिनीन (किसी तरह) शक़ न करें और जिन लोगों के दिल में (निफ़ाक का) मर्ज़ है (वह) और काफिर लोग कह बैठे कि इस मसल (के बयान करने) से ख़ुदा का क्या मतलब है यूँ ख़ुदा जिसे चाहता है गुमराही में छोड़ देता है और जिसे चाहता है हिदायत करता है और तुम्हारे परवरदिगार के लशकरों को उसके सिवा कोई नहीं जानता और ये तो आदमियों के लिए बस नसीहत है
لِمَن شَاءَ مِنكُمْ أَن يَتَقَدَّمَ أَوْ يَتَأَخَّرَ ٣٧
📖 अनुवाद
आयत 37
(सबके लिए नहीें बल्कि) तुममें से वह जो शख़्श (नेकी की तरफ़) आगे बढ़ना
كُلُّ نَفْسٍ بِمَا كَسَبَتْ رَهِينَةٌ ٣٨
📖 अनुवाद
आयत 38
और (बुराई से) पीछे हटना चाहे हर शख़्श अपने आमाल के बदले गिर्द है
فِي جَنَّاتٍ يَتَسَاءَلُونَ ٤٠
📖 अनुवाद
आयत 40
(बेहिश्त के) बाग़ों में गुनेहगारों से बाहम पूछ रहे होंगे
وَكُنَّا نَخُوضُ مَعَ الْخَائِضِينَ ٤٥
📖 अनुवाद
आयत 45
और अहले बातिल के साथ हम भी बड़े काम में घुस पड़ते थे
وَكُنَّا نُكَذِّبُ بِيَوْمِ الدِّينِ ٤٦
📖 अनुवाद
आयत 46
और रोज़ जज़ा को झुठलाया करते थे (और यूँ ही रहे)
فَمَا تَنفَعُهُمْ شَفَاعَةُ الشَّافِعِينَ ٤٨
📖 अनुवाद
आयत 48
तो (उस वक्त) उन्हें सिफ़ारिश करने वालों की सिफ़ारिश कुछ काम न आएगी
فَمَا لَهُمْ عَنِ التَّذْكِرَةِ مُعْرِضِينَ ٤٩
📖 अनुवाद
आयत 49
और उन्हें क्या हो गया है कि नसीहत से मुँह मोड़े हुए हैं
بَلْ يُرِيدُ كُلُّ امْرِئٍ مِّنْهُمْ أَن يُؤْتَىٰ صُحُفًا مُّنَشَّرَةً ٥٢
📖 अनुवाद
आयत 52
असल ये है कि उनमें से हर शख़्श इसका मुतमइनी है कि उसे खुली हुई (आसमानी) किताबें अता की जाएँ
كَلَّا ۖ بَل لَّا يَخَافُونَ الْآخِرَةَ ٥٣
📖 अनुवाद
आयत 53
ये तो हरगिज़ न होगा बल्कि ये तो आख़ेरत ही से नहीं डरते
وَمَا يَذْكُرُونَ إِلَّا أَن يَشَاءَ اللَّهُ ۚ هُوَ أَهْلُ التَّقْوَىٰ وَأَهْلُ الْمَغْفِرَةِ ٥٦
📖 अनुवाद
आयत 56
और ख़ुदा की मशीयत के बग़ैर ये लोग याद रखने वाले नहीं वही (बन्दों के) डराने के क़ाबिल और बख्यिश का मालिक है
पढ़ें सूरा अल-मुद्दस्सिर हिंदी अनुवाद – अरबी पाठ और ऑडियो
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए

