सूरा अल-मुद्दस्सिर अरबी और हिंदी

सूरा अल-मुद्दस्सिर को पूरे हिंदी अनुवाद, उच्चारण और ऑडियो तिलावत के साथ पढ़ें। आयत-दर-आयत हिंदी अर्थ। (56 आयत — مكية). अल-मुद्दस्सिर सुनें, अल-मुद्दस्सिर अनुवाद, अल-मुद्दस्सिर mp3, अल-मुद्दस्सिर pdf.

सूरा अल-मुद्दस्सिर पढ़ें और सुनें

🎧 आयत
M Mishary Rashid Alafasy
M Mahmoud Khalil Al-Husary
A Abdurrahman As-Sudais
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi
A Abdul Basit Abdul Samad
A Ali Al-Hudhaify
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy
A Abu Bakr Ash-Shaatree
M Muhammad Ayyoub
A Abdullah Basfar
A Abdullah Al-Juhani
M Maher Al Muaiqly
x1
يَا أَيُّهَا الْمُدَّثِّرُ ۝١
📖 अनुवाद आयत 1
ऐ (मेरे) कपड़ा ओढ़ने वाले (रसूल) उठो
قُمْ فَأَنذِرْ ۝٢
📖 अनुवाद आयत 2
और लोगों को (अज़ाब से) डराओ
وَرَبَّكَ فَكَبِّرْ ۝٣
📖 अनुवाद आयत 3
और अपने परवरदिगार की बड़ाई करो
وَثِيَابَكَ فَطَهِّرْ ۝٤
📖 अनुवाद आयत 4
और अपने कपड़े पाक रखो
وَالرُّجْزَ فَاهْجُرْ ۝٥
📖 अनुवाद आयत 5
और गन्दगी से अलग रहो
وَلَا تَمْنُن تَسْتَكْثِرُ ۝٦
📖 अनुवाद आयत 6
और इसी तरह एहसान न करो कि ज्यादा के ख़ास्तगार बनो
وَلِرَبِّكَ فَاصْبِرْ ۝٧
📖 अनुवाद आयत 7
और अपने परवरदिगार के लिए सब्र करो
فَإِذَا نُقِرَ فِي النَّاقُورِ ۝٨
📖 अनुवाद आयत 8
फिर जब सूर फूँका जाएगा
فَذَٰلِكَ يَوْمَئِذٍ يَوْمٌ عَسِيرٌ ۝٩
📖 अनुवाद आयत 9
तो वह दिन काफ़िरों पर सख्त दिन होगा
عَلَى الْكَافِرِينَ غَيْرُ يَسِيرٍ ۝١٠
📖 अनुवाद आयत 10
आसान नहीं होगा
ذَرْنِي وَمَنْ خَلَقْتُ وَحِيدًا ۝١١
📖 अनुवाद आयत 11
(ऐ रसूल) मुझे और उस शख़्श को छोड़ दो जिसे मैने अकेला पैदा किया
وَجَعَلْتُ لَهُ مَالًا مَّمْدُودًا ۝١٢
📖 अनुवाद आयत 12
और उसे बहुत सा माल दिया
وَبَنِينَ شُهُودًا ۝١٣
📖 अनुवाद आयत 13
और नज़र के सामने रहने वाले बेटे (दिए)
وَمَهَّدتُّ لَهُ تَمْهِيدًا ۝١٤
📖 अनुवाद आयत 14
और उसे हर तरह के सामान से वुसअत दी
ثُمَّ يَطْمَعُ أَنْ أَزِيدَ ۝١٥
📖 अनुवाद आयत 15
फिर उस पर भी वह तमाअ रखता है कि मैं और बढ़ाऊँ
كَلَّا ۖ إِنَّهُ كَانَ لِآيَاتِنَا عَنِيدًا ۝١٦
📖 अनुवाद आयत 16
ये हरगिज़ न होगा ये तो मेरी आयतों का दुश्मन था
سَأُرْهِقُهُ صَعُودًا ۝١٧
📖 अनुवाद आयत 17
तो मैं अनक़रीब उस सख्त अज़ाब में मुब्तिला करूँगा
إِنَّهُ فَكَّرَ وَقَدَّرَ ۝١٨
📖 अनुवाद आयत 18
उसने फिक्र की और ये तजवीज़ की
فَقُتِلَ كَيْفَ قَدَّرَ ۝١٩
📖 अनुवाद आयत 19
तो ये (कम्बख्त) मार डाला जाए
ثُمَّ قُتِلَ كَيْفَ قَدَّرَ ۝٢٠
📖 अनुवाद आयत 20
उसने क्यों कर तजवीज़ की
ثُمَّ نَظَرَ ۝٢١
📖 अनुवाद आयत 21
फिर ग़ौर किया
ثُمَّ عَبَسَ وَبَسَرَ ۝٢٢
📖 अनुवाद आयत 22
फिर त्योरी चढ़ाई और मुँह बना लिया
ثُمَّ أَدْبَرَ وَاسْتَكْبَرَ ۝٢٣
📖 अनुवाद आयत 23
फिर पीठ फेर कर चला गया और अकड़ बैठा
فَقَالَ إِنْ هَٰذَا إِلَّا سِحْرٌ يُؤْثَرُ ۝٢٤
📖 अनुवाद आयत 24
फिर कहने लगा ये बस जादू है जो (अगलों से) चला आता है
إِنْ هَٰذَا إِلَّا قَوْلُ الْبَشَرِ ۝٢٥
📖 अनुवाद आयत 25
ये तो बस आदमी का कलाम है
سَأُصْلِيهِ سَقَرَ ۝٢٦
📖 अनुवाद आयत 26
(ख़ुदा का नहीं) मैं उसे अनक़रीब जहन्नुम में झोंक दूँगा
وَمَا أَدْرَاكَ مَا سَقَرُ ۝٢٧
📖 अनुवाद आयत 27
और तुम क्या जानों कि जहन्नुम क्या है
لَا تُبْقِي وَلَا تَذَرُ ۝٢٨
📖 अनुवाद आयत 28
वह न बाक़ी रखेगी न छोड़ देगी
لَوَّاحَةٌ لِّلْبَشَرِ ۝٢٩
📖 अनुवाद आयत 29
और बदन को जला कर सियाह कर देगी
عَلَيْهَا تِسْعَةَ عَشَرَ ۝٣٠
📖 अनुवाद आयत 30
उस पर उन्नीस (फ़रिश्ते मुअय्यन) हैं
وَمَا جَعَلْنَا أَصْحَابَ النَّارِ إِلَّا مَلَائِكَةً ۙ وَمَا جَعَلْنَا عِدَّتَهُمْ إِلَّا فِتْنَةً لِّلَّذِينَ كَفَرُوا لِيَسْتَيْقِنَ الَّذِينَ أُوتُوا الْكِتَابَ وَيَزْدَادَ الَّذِينَ آمَنُوا إِيمَانًا ۙ وَلَا يَرْتَابَ الَّذِينَ أُوتُوا الْكِتَابَ وَالْمُؤْمِنُونَ ۙ وَلِيَقُولَ الَّذِينَ فِي قُلُوبِهِم مَّرَضٌ وَالْكَافِرُونَ مَاذَا أَرَادَ اللَّهُ بِهَٰذَا مَثَلًا ۚ كَذَٰلِكَ يُضِلُّ اللَّهُ مَن يَشَاءُ وَيَهْدِي مَن يَشَاءُ ۚ وَمَا يَعْلَمُ جُنُودَ رَبِّكَ إِلَّا هُوَ ۚ وَمَا هِيَ إِلَّا ذِكْرَىٰ لِلْبَشَرِ ۝٣١
📖 अनुवाद आयत 31
और हमने जहन्नुम का निगेहबान तो बस फरिश्तों को बनाया है और उनका ये शुमार भी काफिरों की आज़माइश के लिए मुक़र्रर किया ताकि अहले किताब (फौरन) यक़ीन कर लें और मोमिनो का ईमान और ज्यादा हो और अहले किताब और मोमिनीन (किसी तरह) शक़ न करें और जिन लोगों के दिल में (निफ़ाक का) मर्ज़ है (वह) और काफिर लोग कह बैठे कि इस मसल (के बयान करने) से ख़ुदा का क्या मतलब है यूँ ख़ुदा जिसे चाहता है गुमराही में छोड़ देता है और जिसे चाहता है हिदायत करता है और तुम्हारे परवरदिगार के लशकरों को उसके सिवा कोई नहीं जानता और ये तो आदमियों के लिए बस नसीहत है
كَلَّا وَالْقَمَرِ ۝٣٢
📖 अनुवाद आयत 32
सुन रखो (हमें) चाँद की क़सम
وَاللَّيْلِ إِذْ أَدْبَرَ ۝٣٣
📖 अनुवाद आयत 33
और रात की जब जाने लगे
وَالصُّبْحِ إِذَا أَسْفَرَ ۝٣٤
📖 अनुवाद आयत 34
और सुबह की जब रौशन हो जाए
إِنَّهَا لَإِحْدَى الْكُبَرِ ۝٣٥
📖 अनुवाद आयत 35
कि वह (जहन्नुम) भी एक बहुत बड़ी (आफ़त) है
نَذِيرًا لِّلْبَشَرِ ۝٣٦
📖 अनुवाद आयत 36
(और) लोगों के डराने वाली है
لِمَن شَاءَ مِنكُمْ أَن يَتَقَدَّمَ أَوْ يَتَأَخَّرَ ۝٣٧
📖 अनुवाद आयत 37
(सबके लिए नहीें बल्कि) तुममें से वह जो शख़्श (नेकी की तरफ़) आगे बढ़ना
كُلُّ نَفْسٍ بِمَا كَسَبَتْ رَهِينَةٌ ۝٣٨
📖 अनुवाद आयत 38
और (बुराई से) पीछे हटना चाहे हर शख़्श अपने आमाल के बदले गिर्द है
إِلَّا أَصْحَابَ الْيَمِينِ ۝٣٩
📖 अनुवाद आयत 39
मगर दाहिने हाथ (में नामए अमल लेने) वाले
فِي جَنَّاتٍ يَتَسَاءَلُونَ ۝٤٠
📖 अनुवाद आयत 40
(बेहिश्त के) बाग़ों में गुनेहगारों से बाहम पूछ रहे होंगे
عَنِ الْمُجْرِمِينَ ۝٤١
📖 अनुवाद आयत 41
कि आख़िर तुम्हें दोज़ख़ में कौन सी चीज़ (घसीट) लायी
مَا سَلَكَكُمْ فِي سَقَرَ ۝٤٢
📖 अनुवाद आयत 42
वह लोग कहेंगे
قَالُوا لَمْ نَكُ مِنَ الْمُصَلِّينَ ۝٤٣
📖 अनुवाद आयत 43
कि हम न तो नमाज़ पढ़ा करते थे
وَلَمْ نَكُ نُطْعِمُ الْمِسْكِينَ ۝٤٤
📖 अनुवाद आयत 44
और न मोहताजों को खाना खिलाते थे
وَكُنَّا نَخُوضُ مَعَ الْخَائِضِينَ ۝٤٥
📖 अनुवाद आयत 45
और अहले बातिल के साथ हम भी बड़े काम में घुस पड़ते थे
وَكُنَّا نُكَذِّبُ بِيَوْمِ الدِّينِ ۝٤٦
📖 अनुवाद आयत 46
और रोज़ जज़ा को झुठलाया करते थे (और यूँ ही रहे)
حَتَّىٰ أَتَانَا الْيَقِينُ ۝٤٧
📖 अनुवाद आयत 47
यहाँ तक कि हमें मौत आ गयी
فَمَا تَنفَعُهُمْ شَفَاعَةُ الشَّافِعِينَ ۝٤٨
📖 अनुवाद आयत 48
तो (उस वक्त) उन्हें सिफ़ारिश करने वालों की सिफ़ारिश कुछ काम न आएगी
فَمَا لَهُمْ عَنِ التَّذْكِرَةِ مُعْرِضِينَ ۝٤٩
📖 अनुवाद आयत 49
और उन्हें क्या हो गया है कि नसीहत से मुँह मोड़े हुए हैं
كَأَنَّهُمْ حُمُرٌ مُّسْتَنفِرَةٌ ۝٥٠
📖 अनुवाद आयत 50
गोया वह वहशी गधे हैं
فَرَّتْ مِن قَسْوَرَةٍ ۝٥١
📖 अनुवाद आयत 51
कि येर से (दुम दबा कर) भागते हैं
بَلْ يُرِيدُ كُلُّ امْرِئٍ مِّنْهُمْ أَن يُؤْتَىٰ صُحُفًا مُّنَشَّرَةً ۝٥٢
📖 अनुवाद आयत 52
असल ये है कि उनमें से हर शख़्श इसका मुतमइनी है कि उसे खुली हुई (आसमानी) किताबें अता की जाएँ
كَلَّا ۖ بَل لَّا يَخَافُونَ الْآخِرَةَ ۝٥٣
📖 अनुवाद आयत 53
ये तो हरगिज़ न होगा बल्कि ये तो आख़ेरत ही से नहीं डरते
كَلَّا إِنَّهُ تَذْكِرَةٌ ۝٥٤
📖 अनुवाद आयत 54
हाँ हाँ बेशक ये (क़ुरान सरा सर) नसीहत है
فَمَن شَاءَ ذَكَرَهُ ۝٥٥
📖 अनुवाद आयत 55
तो जो चाहे उसे याद रखे
وَمَا يَذْكُرُونَ إِلَّا أَن يَشَاءَ اللَّهُ ۚ هُوَ أَهْلُ التَّقْوَىٰ وَأَهْلُ الْمَغْفِرَةِ ۝٥٦
📖 अनुवाद आयत 56
और ख़ुदा की मशीयत के बग़ैर ये लोग याद रखने वाले नहीं वही (बन्दों के) डराने के क़ाबिल और बख्यिश का मालिक है
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74المدثر Al-Muddaththir 📚 56 आयत مكية

आयत-दर-आयत – सूरा अल-मुद्दस्सिर — 56 आयत




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए