Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- جَنَّاتٍ (जन्नात): बाग़, स्वर्ग के उद्यान।
- يَتَسَاءَلُونَ (यतसाअलून): एक-दूसरे से पूछना, आपस में सवाल-जवाब करना।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत उन मोमिनों (ईमानवालों) के हाल का वर्णन कर रही है जिन्होंने अपने ईमान और नेक अमलों के ज़रिए अपनी रिहाई (मुक्ति) हासिल कर ली। ये लोग क़यामत के दिन उन लोगों से अलग होंगे जो अपने गुनाहों में फँसे हुए हैं। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि ये नेक लोग जन्नत के ऐसे बाग़ों में होंगे जिनका कोई अंदाज़ा नहीं लगाया जा सकता, और वे वहाँ एक-दूसरे से बातचीत करेंगे, आपस में सवाल-जवाब करेंगे।
यह पूछताछ किस बारे में होगी? आगे की आयतों में बताया गया है कि वे उन गुनाहगारों के बारे में पूछेंगे जिन्होंने दुनिया में अपने ऊपर ज़ुल्म किया और जहन्नम में डाले गए। वे पूछेंगे: "तुम्हें जहन्नम की आग में किस चीज़ ने डाला?" और वे जवाब देंगे: "हम नमाज़ नहीं पढ़ते थे, ग़रीबों को खाना नहीं खिलाते थे, बेकार की बातों में पड़े रहते थे, और रोज़े जज़ा (हिसाब के दिन) को झुठलाते थे।"
यह दृश्य बताता है कि जन्नत वालों की ज़िंदगी कितनी खुशहाल और पुरसुकून होगी—वहाँ न कोई डर होगा, न ग़म, और वे एक-दूसरे से उन लोगों के हाल पूछेंगे जिन्होंने अल्लाह की नाफ़रमानी की। यह उनके लिए अल्लाह की तरफ से एक इनाम और सम्मान होगा कि वे जन्नत की नेअमतों के बीच बैठे हुए उन लोगों के अंजाम पर ग़ौर करेंगे जिन्होंने दुनिया में गुमराही का रास्ता अपनाया।
दावती पहलू:
यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह तआला अपने नेक बंदों को कितनी बड़ी इज़्ज़त देगा—वे जन्नत में होंगे, और उनकी बातचीत भी इबरत (नसीहत) और हिकमत से भरी होगी। यह हमारे लिए एक बहुत बड़ी खुशखबरी है कि अगर हम दुनिया में अल्लाह की इबादत करें, नमाज़ पढ़ें, ग़रीबों की मदद करें, और सच्चाई पर चलें, तो हम भी उन लोगों में शामिल हो सकते हैं जिन्हें जन्नत की नेअमतें मिलेंगी। यह आयत हमें अमल की तरफ उभारती है—कि आज का हर अच्छा काम, हर नेकी, हर नमाज़, हर सदक़ा हमारे लिए उस दिन की कामयाबी का ज़रिया बनेगा। अल्लाह से दुआ है कि वह हमें जन्नत की राह पर चलने की तौफ़ीक़ दे और हमें उन लोगों में शामिल करे जो जन्नत में एक-दूसरे से मुबारकबाद के साथ मिलेंगे। आमीन।
📜 आयत 38-42 — सूरा अल-मुद्दस्सिर
अनुवाद — अल-मुद्दस्सिर 40
सूरा अल-मुद्दस्सिर आयत 40 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (बेहिश्त के) बाग़ों में गुनेहगारों से बाहम पूछ रहे होंगेसूरा आयत 40/56 — सूरा अल-मुद्दस्सिर المدثر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-मुद्दस्सिर सुनें, सूरा अल-मुद्दस्सिर अनुवाद, सूरा अल-मुद्दस्सिर mp3, सूरा अल-मुद्दस्सिर pdf. आयत 38–42. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-मुद्दस्सिर
पवित्र क़ुरआन
Wednesday, September 30, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


