अन-नहल · 2/128
अनुवाद उच्चारण — सूरा अन-नहल
يُنَزِّلُ الْمَلَائِكَةَ بِالرُّوحِ مِنْ أَمْرِهِ عَلَىٰ مَن يَشَاءُ مِنْ عِبَادِهِ أَنْ أَنذِرُوا أَنَّهُ لَا إِلَٰهَ إِلَّا أَنَا فَاتَّقُونِ ۝٢
Yunazzilul malaaa `ikata birroohi min amrihee `alaa mai yashaaa`u min `ibaadiheee an anzirooo annahoo laaa ilaaha illaaa ana fattaqoon
📖 हिंदी अर्थ
वही अपने हुक्म से अपने बन्दों में से जिसके पास चाहता है 'वहीं' देकर फ़रिश्तों को भेजता है कि लोगों को इस बात से आगाह कर दें कि मेरे सिवा कोई माबूद नहीं तो मुझी से डरते रहो

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
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A Abdullah Al-Juhani ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • الْمَلَائِكَةَ: फ़रिश्ते।
  • بِالرُّوحِ: वह वही (प्रकाशना) जो दिलों को ज़िंदगी देती है, यानी क़ुरआन और दिव्य संदेश।
  • مِنْ أَمْرِهِ: अपने आदेश और फ़रमान से।
  • أَنْ أَنذِرُوا: यह कि डराओ और सावधान करो।
  • فَاتَّقُونِ: तो मुझसे डरो और मेरी अवज्ञा से बचो।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला अपनी बेपनाह रहमत और हिक्मत से अपने बंदों में से जिसे चाहता है—जो उसके पैग़म्बर और रसूल होते हैं—पर फ़रिश्तों को उतारता है, और उनके साथ वह "रूह" (वही और दिव्य संदेश) भेजता है जो मुर्दा दिलों को ज़िंदगी देती है और जहालत के अंधेरों से निकालकर हिदायत की रोशनी तक पहुँचाती है। यह सब उसी के हुक्म और इच्छा से होता है। फ़रिश्तों के ज़रिए पैग़म्बरों को यह निर्देश दिया जाता है कि वे लोगों को शिर्क से डराएँ और उन्हें साफ़-साफ़ बता दें कि अल्लाह के सिवा कोई सच्चा माबूद (पूज्य) नहीं है। हर वह चीज़ जिसकी लोग पूजा करते हैं—चाहे वह मूर्ति हो, सितारे हों या इंसान—सब बातिल है। सिर्फ़ अल्लाह ही इबादत के लायक़ है। इसलिए लोगों को चाहिए कि वे उसके अहकाम (आदेशों) की पालना करें, उसकी मनाही से बचें, और उसी से डरें। यही तक़वा है—अपने अंदर अल्लाह का खौफ़ पैदा करना और उसकी रज़ा के मुताबिक़ ज़िंदगी गुज़ारना।

फ़ायदे (सबक़ और नसीहतें):

  1. अल्लाह का अपने बंदों पर सबसे बड़ा एहसान यह है कि उसने रसूलों और किताबों के ज़रिए हिदायत का रास्ता दिखाया, ताकि इंसान गुमराही से बचे।
  2. तौहीद (अल्लाह की एकता) हर दिव्य संदेश का मूल संदेश है—हर पैग़म्बर की दावत यही थी कि सिर्फ़ अल्लाह की इबादत करो।
  3. पैग़म्बरों का काम सिर्फ़ ख़ुशख़बरी देना नहीं, बल्कि लोगों को अल्लाह के अज़ाब से डराना भी है, ताकि वे अपनी ज़िंदगी संभाल लें।
  4. तक़वा (अल्लाह का डर) ही वह चीज़ है जो इंसान को गुनाहों से रोकती है और उसे अच्छे कामों की तरफ़ ले जाती है—यही कामयाबी की कुंजी है।
  5. यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की रहमत का दरवाज़ा हमेशा खुला है; वह जिसे चाहता है हिदायत देता है, और हमें उसकी इस रहमत के लिए शुक्रगुज़ार होना चाहिए।


📜 आयत 1-4 — सूरा अन-नहल

1أَتَىٰ أَمْرُ اللَّهِ فَلَا تَسْتَعْجِلُوهُ ۚ سُبْحَانَهُ وَتَعَالَىٰ عَمَّا يُشْرِكُونَ
ऐ कुफ्फ़ारे मक्का (ख़ुदा का हुक्म (क़यामत गोया) आ पहुँचा तो (ऐ काफिरों बे फायदे) तुम इसकी जल्दी न मचाओ जिस चीज़ को ये लोग शरीक क़रार देते हैं उससे वह ख़ुदा पाक व पाकीज़ा और बरतर है
2يُنَزِّلُ الْمَلَائِكَةَ بِالرُّوحِ مِنْ أَمْرِهِ عَلَىٰ مَن يَشَاءُ مِنْ عِبَادِهِ أَنْ أَنذِرُوا أَنَّهُ لَا إِلَٰهَ إِلَّا أَنَا فَاتَّقُونِ
वही अपने हुक्म से अपने बन्दों में से जिसके पास चाहता है 'वहीं' देकर फ़रिश्तों को भेजता है कि लोगों को इस बात से आगाह कर दें कि मेरे सिवा कोई माबूद नहीं तो मुझी से डरते रहो
3خَلَقَ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ بِالْحَقِّ ۚ تَعَالَىٰ عَمَّا يُشْرِكُونَ
उसी ने सारे आसमान और ज़मीन मसलहत व हिकमत से पैदा किए तो ये लोग जिसको उसका यशरीक बनाते हैं उससे कहीं बरतर है
4خَلَقَ الْإِنسَانَ مِن نُّطْفَةٍ فَإِذَا هُوَ خَصِيمٌ مُّبِينٌ
उसने इन्सान को नुत्फे से पैदा किया फिर वह यकायक (हम ही से) खुल्लम खुल्ला झगड़ने वाला हो गया
अन-नहलकुरान सूची
128आयत
मक्कीअवतरण स्थान
2आयत

अनुवाद — अन-नहल 2

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Tuesday, September 29, 2026

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