Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- الْمَلَائِكَةَ: फ़रिश्ते।
- بِالرُّوحِ: वह वही (प्रकाशना) जो दिलों को ज़िंदगी देती है, यानी क़ुरआन और दिव्य संदेश।
- مِنْ أَمْرِهِ: अपने आदेश और फ़रमान से।
- أَنْ أَنذِرُوا: यह कि डराओ और सावधान करो।
- فَاتَّقُونِ: तो मुझसे डरो और मेरी अवज्ञा से बचो।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला अपनी बेपनाह रहमत और हिक्मत से अपने बंदों में से जिसे चाहता है—जो उसके पैग़म्बर और रसूल होते हैं—पर फ़रिश्तों को उतारता है, और उनके साथ वह "रूह" (वही और दिव्य संदेश) भेजता है जो मुर्दा दिलों को ज़िंदगी देती है और जहालत के अंधेरों से निकालकर हिदायत की रोशनी तक पहुँचाती है। यह सब उसी के हुक्म और इच्छा से होता है। फ़रिश्तों के ज़रिए पैग़म्बरों को यह निर्देश दिया जाता है कि वे लोगों को शिर्क से डराएँ और उन्हें साफ़-साफ़ बता दें कि अल्लाह के सिवा कोई सच्चा माबूद (पूज्य) नहीं है। हर वह चीज़ जिसकी लोग पूजा करते हैं—चाहे वह मूर्ति हो, सितारे हों या इंसान—सब बातिल है। सिर्फ़ अल्लाह ही इबादत के लायक़ है। इसलिए लोगों को चाहिए कि वे उसके अहकाम (आदेशों) की पालना करें, उसकी मनाही से बचें, और उसी से डरें। यही तक़वा है—अपने अंदर अल्लाह का खौफ़ पैदा करना और उसकी रज़ा के मुताबिक़ ज़िंदगी गुज़ारना।
फ़ायदे (सबक़ और नसीहतें):
- अल्लाह का अपने बंदों पर सबसे बड़ा एहसान यह है कि उसने रसूलों और किताबों के ज़रिए हिदायत का रास्ता दिखाया, ताकि इंसान गुमराही से बचे।
- तौहीद (अल्लाह की एकता) हर दिव्य संदेश का मूल संदेश है—हर पैग़म्बर की दावत यही थी कि सिर्फ़ अल्लाह की इबादत करो।
- पैग़म्बरों का काम सिर्फ़ ख़ुशख़बरी देना नहीं, बल्कि लोगों को अल्लाह के अज़ाब से डराना भी है, ताकि वे अपनी ज़िंदगी संभाल लें।
- तक़वा (अल्लाह का डर) ही वह चीज़ है जो इंसान को गुनाहों से रोकती है और उसे अच्छे कामों की तरफ़ ले जाती है—यही कामयाबी की कुंजी है।
- यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की रहमत का दरवाज़ा हमेशा खुला है; वह जिसे चाहता है हिदायत देता है, और हमें उसकी इस रहमत के लिए शुक्रगुज़ार होना चाहिए।
📜 आयत 1-4 — सूरा अन-नहल
अनुवाद — अन-नहल 2
सूरा अन-नहल आयत 2 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : वही अपने हुक्म से अपने बन्दों में से जिसके पास…सूरा आयत 2/128 — सूरा अन-नहल النحل (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अन-नहल सुनें, सूरा अन-नहल अनुवाद, सूरा अन-नहल mp3, सूरा अन-नहल pdf. आयत 1–4. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, September 29, 2026
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