अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- أَتَى: निकट आ गया, आ पहुँचा।
- أَمْرُ اللَّهِ: अल्लाह का फ़ैसला, यानी उसका अज़ाब (प्रकोप) और क़ियामत।
- فَلَا تَسْتَعْجِلُوهُ: तो उसे जल्दी न माँगो, उसके आने में जल्दबाज़ी न करो।
- سُبْحَانَهُ: वह पाक है, हर कमी से मुक्त है।
- تَعَالَىٰ: वह बुलंद और ऊँचा है।
- عَمَّا يُشْرِكُونَ: उस चीज़ से जो वे (मुशरिकीन) उसका साझी ठहराते हैं।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला फ़रमाता है कि उसका फ़ैसला और उसका अज़ाब (जो उसने काफ़िरों के लिए मुक़र्रर किया है) बहुत निकट आ चुका है। यह वही चीज़ है जिसकी ख़बर रसूलुल्लाह ﷺ ने दी थी। मगर काफ़िर लोग इस वायदे का मज़ाक़ उड़ाते थे और कहते थे: "यह अज़ाब कब आएगा?" वे उसे जल्दी माँगते थे। अल्लाह तआला उन्हें फ़रमाता है: उसे जल्दी न माँगो, क्योंकि जब वह आ जाएगा, तो वह टलने वाला नहीं। यह अज़ाब क़ियामत के दिन या दुनिया में ही आने वाली सज़ा की शक्ल में हो सकता है।
फिर अल्लाह तआला अपनी पाकी बयान करता है कि वह हर उस चीज़ से पाक और बुलंद है जो मुशरिकीन उसके साथ साझी ठहराते हैं। वे पत्थरों, मूर्तियों और दूसरी मख़लूक़ात को अल्लाह का शरीक बनाते हैं, जबकि अल्लाह इन सब से बेनियाज़ और पाक है। जब यह आयत उतरी, तो नबी ﷺ खड़े हो गए और लोगों को क़ियामत के क़रीब आने से डराया, यहाँ तक कि अल्लाह ने यह आयत उतारी: "فَلَا تَسْتَعْجِلُوهُ" यानी उसे जल्दी न माँगो, बल्कि उसकी तैयारी करो।
फ़ायदे (उपदेश):
- अल्लाह का वायदा सच्चा है और उसका अज़ाब या इनाम किसी भी वक़्त आ सकता है, इसलिए इंसान को हमेशा चौकन्ना रहना चाहिए और अच्छे कर्म करते रहना चाहिए।
- अल्लाह से जल्दबाज़ी नहीं करनी चाहिए। हर चीज़ उसके मुक़र्रर किए हुए वक़्त पर आती है। इंसान को सब्र और भरोसे के साथ अल्लाह के फ़ैसले का इंतज़ार करना चाहिए।
- अल्लाह हर कमी, हर बुराई और हर शरीक से पाक है। यह आयत हमें तौहीद (एकेश्वरवाद) की तालीम देती है कि अल्लाह के साथ किसी को साझी न बनाएं, क्योंकि वह अकेला ही इबादत के लायक़ है।
- क़ियामत का ख़ौफ़ इंसान को गुनाहों से रोकता है और नेक कामों की तरफ़ रग़बत दिलाता है। यही वह चीज़ है जो इंसान को दुनिया की बेहूदा मशग़ूलियों से निकालकर आख़िरत की तैयारी की तरफ़ ले जाती है।
- मुशरिकीन का अंजाम बुरा है, और अल्लाह का दीन (इस्लाम) ही सच्चा दीन है। इसलिए हमें अपने दिल को शिर्क से पाक रखना चाहिए और ख़ालिस अल्लाह की इबादत करनी चाहिए।
📜 आयत 1-3 — अन-नहल
अनुवाद — अन-नहल 1
सूरा अन-नहल आयत 1 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ऐ कुफ्फ़ारे मक्का (ख़ुदा का हुक्म (क़यामत गोया) आ पहुँचा…सूरा आयत 1/128 — अन-नहल النحل (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अन-नहल सुनें, अन-नहल अनुवाद, अन-नहल mp3, अन-नहल pdf. आयत 1–3. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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