अन-नहल · 3/128
अनुवाद उच्चारण — अन-नहल
خَلَقَ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ بِالْحَقِّ ۚ تَعَالَىٰ عَمَّا يُشْرِكُونَ ۝٣
Khalaqas samaawaati wal arda bilhaqq; Ta`aalaa `ammaa yushrikoon
📖 हिंदी अर्थ
उसी ने सारे आसमान और ज़मीन मसलहत व हिकमत से पैदा किए तो ये लोग जिसको उसका यशरीक बनाते हैं उससे कहीं बरतर है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • بِالْحَقِّ: सत्य के साथ, उचित और यथोचित उद्देश्य के साथ, बिना किसी भूल या व्यर्थता के।
  • تَعَالَىٰ: वह बहुत ऊँचा और पवित्र है, हर दोष और कमी से परे है।
  • عَمَّا يُشْرِكُونَ: उस चीज़ से (पवित्र है) जो लोग उसका साझीदार ठहराते हैं।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने आसमानों और ज़मीन को सत्य के साथ पैदा किया — यानी यह सृष्टि कोई खिलवाड़ या बेकार चीज़ नहीं है, न ही इसे बिना किसी उद्देश्य के बनाया गया है। बल्कि इसे एक गंभीर और यथोचित उद्देश्य के लिए रचा गया है, ताकि लोग इन अद्भुत रचनाओं को देखकर अपने रचयिता की महानता, शक्ति और ज्ञान को पहचानें, और यह समझें कि केवल वही इबादत (पूजा) के योग्य है। ये आसमान और ज़मीन अपनी बनावट, अपने नियमों और अपनी व्यवस्था से इस बात की गवाही देते हैं कि इन्हें बनाने वाला एक ही है, जो सर्वशक्तिमान और सर्वज्ञ है।

फिर अल्लाह ने अपनी पवित्रता का ऐलान किया कि वह उन सब चीज़ों से बिल्कुल पाक और ऊँचा है, जिन्हें लोग उसका साझीदार बनाते हैं — चाहे वे मूर्तियाँ हों, पत्थर हों, पेड़ हों, सितारे हों, या कोई और मख़लूक़ (प्राणी)। क्योंकि जब यह विशाल और व्यवस्थित ब्रह्मांड किसी एक सर्वशक्तिमान रचयिता की देन है, तो उसके साथ किसी और को साझीदार ठहराना पूरी तरह से बेतुका और अन्यायपूर्ण है। अल्लाह इन सबसे बहुत ऊँचा और महान है।


फ़ायदे (लाभ और शिक्षाएँ):

  1. सृष्टि पर चिंतन ईमान की निशानी है: यह आयत हमें सिखाती है कि आसमान और ज़मीन को देखकर ग़ौर-ओ-फ़िक्र करना इबादत है। जो व्यक्ति इन अद्भुत रचनाओं पर विचार करता है, वह अपने रब की महानता को और अधिक पहचानता है और उसका ईमान मज़बूत होता है।
  2. जीवन बेकार नहीं है: इस आयत से हमें यह समझ मिलती है कि हमारा जीवन और यह पूरी दुनिया किसी खेल या मज़ाक के लिए नहीं बनाई गई है। हर चीज़ का एक उद्देश्य है, और हमारा सबसे बड़ा उद्देश्य अल्लाह की इबादत और उसकी मरज़ी के मुताबिक जीवन जीना है।
  3. शिर्क से बचने की सीख: यह आयत हमें शिर्क (अल्लाह के साथ किसी को साझीदार ठहराने) से सख़्त परहेज़ करने की तालीम देती है। जब पूरी कायनात एक ही ख़ुदा की बनाई हुई है, तो उसके सिवा किसी और की इबादत करना कितनी बड़ी नादानी है। यह हमें तौहीद (एकेश्वरवाद) की ओर बुलाती है, जो इस्लाम की सबसे बुनियादी शिक्षा है।
  4. अल्लाह की पवित्रता का एहसास: "تَعَالَىٰ" का ज़िक्र हमें सिखाता है कि अल्लाह हर उस चीज़ से पाक है जो उसके लिए ठीक नहीं है। यह हमारे दिलों में अल्लाह के लिए अदब (सम्मान) और मुहब्बत पैदा करता है, और हमें उसके साथ अपने रिश्ते को साफ़ और सच्चा रखने की प्रेरणा देता है।


📜 आयत 1-5 — अन-नहल

1أَتَىٰ أَمْرُ اللَّهِ فَلَا تَسْتَعْجِلُوهُ ۚ سُبْحَانَهُ وَتَعَالَىٰ عَمَّا يُشْرِكُونَ
ऐ कुफ्फ़ारे मक्का (ख़ुदा का हुक्म (क़यामत गोया) आ पहुँचा तो (ऐ काफिरों बे फायदे) तुम इसकी जल्दी न मचाओ जिस चीज़ को ये लोग शरीक क़रार देते हैं उससे वह ख़ुदा पाक व पाकीज़ा और बरतर है
2يُنَزِّلُ الْمَلَائِكَةَ بِالرُّوحِ مِنْ أَمْرِهِ عَلَىٰ مَن يَشَاءُ مِنْ عِبَادِهِ أَنْ أَنذِرُوا أَنَّهُ لَا إِلَٰهَ إِلَّا أَنَا فَاتَّقُونِ
वही अपने हुक्म से अपने बन्दों में से जिसके पास चाहता है 'वहीं' देकर फ़रिश्तों को भेजता है कि लोगों को इस बात से आगाह कर दें कि मेरे सिवा कोई माबूद नहीं तो मुझी से डरते रहो
3خَلَقَ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ بِالْحَقِّ ۚ تَعَالَىٰ عَمَّا يُشْرِكُونَ
उसी ने सारे आसमान और ज़मीन मसलहत व हिकमत से पैदा किए तो ये लोग जिसको उसका यशरीक बनाते हैं उससे कहीं बरतर है
4خَلَقَ الْإِنسَانَ مِن نُّطْفَةٍ فَإِذَا هُوَ خَصِيمٌ مُّبِينٌ
उसने इन्सान को नुत्फे से पैदा किया फिर वह यकायक (हम ही से) खुल्लम खुल्ला झगड़ने वाला हो गया
5وَالْأَنْعَامَ خَلَقَهَا ۗ لَكُمْ فِيهَا دِفْءٌ وَمَنَافِعُ وَمِنْهَا تَأْكُلُونَ
उसी ने चरपायों को भी पैदा किया कि तुम्हारे लिए ऊन (ऊन की खाल और ऊन) से जाडे क़ा सामान है
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अनुवाद — अन-नहल 3

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Tuesday, August 18, 2026

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