Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- कन्ज़: खज़ाना, गड़ा हुआ धन।
- अशुद्ध: परिपक्वता की आयु, समझदारी और ताकत की पूर्णता।
- तावील: असली मतलब, वास्तविक व्याख्या।
- तस्त: सहन करना, धैर्य रखना।
तफसीर (व्याख्या):
फिर ख़िज़र (अलैहिस्सलाम) ने मूसा (अलैहिस्सलाम) को उस दीवार के बारे में बताया जिसे उन्होंने बिना किसी मेहनताने के सीधा कर दिया था। वह दीवार उस शहर के दो अनाथ बच्चों की थी, जिनके पिता का देहांत हो चुका था। उस दीवार के नीचे उन दोनों के लिए एक खज़ाना दफ़न था — सोना और चाँदी। उनके पिता एक नेक और पवित्र इंसान थे, और अल्लाह ने उनकी नेकी की बरकत से उनकी औलाद की हिफ़ाज़त का इंतज़ाम किया।
अल्लाह ने चाहा कि ये दोनों बच्चे अपनी जवानी और समझदारी की पूरी उम्र तक पहुँचें, और फिर अपना खज़ाना अपनी मेहनत और हक़ के साथ निकालें। यह आपके रब की ओर से उन दोनों पर रहमत थी। अगर वह दीवार उस वक़्त गिर जाती, तो खज़ाना ज़ाहिर हो जाता और लोग उसे छीन लेते, या बच्चे उसे सँभाल नहीं पाते। इसलिए अल्लाह ने उसे महफ़ूज़ रखने के लिए यह इंतज़ाम किया।
फिर ख़िज़र (अलैहिस्सलाम) ने साफ़ कहा: "मूसा! मैंने यह सब कुछ अपनी मर्ज़ी या अपनी राय से नहीं किया, बल्कि अल्लाह के हुक्म और उसकी तरफ़ से दिए गए इल्म के अनुसार किया। यही उन सारी बातों की असली तावील (व्याख्या) है जिन पर आप सब्र नहीं कर सके।"
दावती पहलू:
इस आयत से हमें कई अहम सबक़ मिलते हैं:
- नेकी की बरकत: एक नेक बाप की नेकी उसकी औलाद के लिए ढाल बनती है। अल्लाह ने उन बच्चों को उनके पिता की नेकी की वजह से महफ़ूज़ रखा। यह हमें सिखाता है कि अपनी नेकी से हम सिर्फ़ अपना ही नहीं, बल्कि अपनी आने वाली नस्लों का भी भला कर सकते हैं।
- अल्लाह का इंतज़ाम: अल्लाह जो करता है, उसमें भलाई होती है, चाहे हमें वह पल भर में समझ न आए। कभी-कभी जो बात बुरी लगती है, वही दरअसल हमारे लिए बेहतर होती है।
- इल्म और अमल: ख़िज़र (अलैहिस्सलाम) ने अल्लाह के हुक्म से काम किया, और मूसा (अलैहिस्सलाम) ने सब्र का सबक़ सीखा। यह हमें सिखाता है कि इल्म के साथ सब्र ज़रूरी है, और अल्लाह के फ़ैसलों पर भरोसा रखना चाहिए।
- यतीमों की हिफ़ाज़त: इस्लाम यतीमों की देखभाल और उनके हक़ों की हिफ़ाज़त पर बहुत ज़ोर देता है। यहाँ अल्लाह ने खुद दो यतीमों की मदद के लिए एक नबी को वसीला बनाया।
यह क़िस्सा हमें बताता है कि अल्लाह का इल्म असीमित है और उसकी रहमत उसके बंदों पर हर पल नाज़िल होती है। हमें चाहिए कि हम उस पर पूरा भरोसा रखें, उसके हुक्मों पर अमल करें, और हर हाल में सब्र और शुक्र का दामन न छोड़ें।
📜 आयत 80-84 — सूरा अल-कहफ
अनुवाद — अल-कहफ 82
सूरा अल-कहफ आयत 82 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और वह जो दीवार थी (जिसे मैंने खड़ा कर दिया)…सूरा आयत 82/110 — सूरा अल-कहफ الكهف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-कहफ सुनें, सूरा अल-कहफ अनुवाद, सूरा अल-कहफ mp3, सूरा अल-कहफ pdf. आयत 80–84. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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