अल-बकरा · 124/286
अनुवाद उच्चारण — अल-बकरा
۞ وَإِذِ ابْتَلَىٰ إِبْرَاهِيمَ رَبُّهُ بِكَلِمَاتٍ فَأَتَمَّهُنَّ ۖ قَالَ إِنِّي جَاعِلُكَ لِلنَّاسِ إِمَامًا ۖ قَالَ وَمِن ذُرِّيَّتِي ۖ قَالَ لَا يَنَالُ عَهْدِي الظَّالِمِينَ ۝١٢٤
Wa izib talaaa Ibraaheema Rabbuho bi Kalimaatin fa atammahunna qaala Innee jaa`iluka linnaasi Imaaman qaala wa min zurriyyatee qaala laa yanaalu `ahdiz zaalimeen
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल) बनी इसराईल को वह वक्त भी याद दिलाओ जब इबराहीम को उनके परवरदिगार ने चन्द बातों में आज़माया और उन्होंने पूरा कर दिया तो खुदा ने फरमाया मैं तुमको (लोगों का) पेशवा बनाने वाला हूँ (हज़रत इबराहीम ने) अर्ज़ की और मेरी औलाद में से फरमाया (हाँ मगर) मेरे इस अहद पर ज़ालिमों में से कोई शख्स फ़ायज़ नहीं हो सकता
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • ابْتَلَى: परीक्षण किया, आज़माया।
  • بِكَلِمَاتٍ: कुछ आदेशों और वचनों से, जो अल्लाह की ओर से परीक्षा के रूप में थे।
  • فَأَتَمَّهُنَّ: उन्होंने उन सभी आदेशों को पूरा किया और उन पर अमल किया।
  • إِمَامًا: नेता, पेशवा, जिसकी लोग अनुसरण करें।
  • ذُرِّيَّتِي: मेरी संतान, मेरी औलाद।
  • عَهْدِي: मेरा वादा, मेरा अनुबंध, जिसमें इमामत और नबुव्वत शामिल है।
  • الظَّالِمِينَ: अत्याचारी, जो अपने ऊपर या दूसरों पर ज़ुल्म करें।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! उस समय को याद करो जब अल्लाह ने हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) को कुछ आदेशों और परीक्षाओं के माध्यम से आज़माया। ये आदेश इस्लामी शरिया के मूल सिद्धांत थे, जैसे अल्लाह की इबादत, उसके प्रति समर्पण, और विभिन्न आज्ञाओं का पालन। हज़रत इब्राहीम ने इन सभी परीक्षाओं को पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ पार किया और हर आदेश को बखूबी अंजाम दिया। यह उनके ईमान और अल्लाह के प्रति प्रेम का प्रमाण था।

जब उन्होंने यह साबित कर दिया कि वे हर हाल में अल्लाह के आज्ञाकारी हैं, तो अल्लाह ने उन्हें सम्मानित करते हुए कहा: "मैं तुम्हें सभी लोगों के लिए इमाम (नेता) बना रहा हूँ।" यानी तुम्हारी ज़िंदगी, तुम्हारे कर्म और तुम्हारा चरित्र लोगों के लिए आदर्श होंगे, और लोग तुम्हारा अनुसरण करेंगे। यह एक बहुत बड़ा सम्मान था, जो अल्लाह ने अपने प्यारे नबी को प्रदान किया।

इस पर हज़रत इब्राहीम ने अल्लाह से प्रार्थना की: "ऐ मेरे रब! क्या मेरी संतान में से भी कुछ लोगों को तू यह इमामत प्रदान करेगा?" यह उनकी संतान के प्रति प्रेम और उनकी भलाई की चिंता को दर्शाता है। उन्होंने यह दुआ की कि उनकी औलाद में से भी ऐसे नेता हों जो लोगों को सही रास्ता दिखाएँ।

अल्लाह ने उत्तर दिया: "मेरा वादा (इमामत और नबुव्वत) अत्याचारियों को नहीं मिलेगा।" यानी जो लोग ज़ुल्म करेंगे—चाहे वे खुद पर ज़ुल्म करें (गुनाह करके) या दूसरों पर—वे इस उच्च पद के योग्य नहीं होंगे। यह एक स्पष्ट सिद्धांत है कि अल्लाह की ओर से नेतृत्व और धार्मिक अधिकार केवल उन्हीं को मिलता है जो न्याय, ईमान और अच्छे कर्मों में सच्चे हों। ज़ुल्म और अत्याचार इस पद को पाने में सबसे बड़ी बाधा है।

इस आयत से हमें यह शिक्षा मिलती है कि अल्लाह की नज़र में सबसे बड़ा सम्मान उसकी आज्ञा का पालन करने और उसके प्रति समर्पण में है। हज़रत इब्राहीम की तरह हमें भी अपने जीवन को अल्लाह के आदेशों के अनुसार ढालना चाहिए। साथ ही, हमें यह भी समझना चाहिए कि नेतृत्व और धार्मिक पद केवल उन्हीं को मिलते हैं जो न्याय और ईमान पर स्थिर रहते हैं। अल्लाह हमें सच्चे ईमान और अच्छे कर्मों की तौफ़ीक़ दे, और हमें उन लोगों में शामिल करे जो उसके प्यारे और नेक बंदे हैं। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 122-126 — अल-बकरा

122يَا بَنِي إِسْرَائِيلَ اذْكُرُوا نِعْمَتِيَ الَّتِي أَنْعَمْتُ عَلَيْكُمْ وَأَنِّي فَضَّلْتُكُمْ عَلَى الْعَالَمِينَ
बनी इसराईल मेरी उन नेअमतों को याद करो जो मैंनं तुम को दी हैं और ये कि मैंने तुमको सारे जहाँन पर फज़ीलत दी
123وَاتَّقُوا يَوْمًا لَّا تَجْزِي نَفْسٌ عَن نَّفْسٍ شَيْئًا وَلَا يُقْبَلُ مِنْهَا عَدْلٌ وَلَا تَنفَعُهَا شَفَاعَةٌ وَلَا هُمْ يُنصَرُونَ
और उस दिन से डरो जिस दिन कोई शख्स किसी की तरफ से न फिदया हो सकेगा और न उसकी तरफ से कोई मुआवेज़ा क़ुबूल किया जाएगा और न कोई सिफारिश ही फायदा पहुचाँ सकेगी, और न लोग मदद दिए जाएँगे
124۞ وَإِذِ ابْتَلَىٰ إِبْرَاهِيمَ رَبُّهُ بِكَلِمَاتٍ فَأَتَمَّهُنَّ ۖ قَالَ إِنِّي جَاعِلُكَ لِلنَّاسِ إِمَامًا ۖ قَالَ وَمِن ذُرِّيَّتِي ۖ قَالَ لَا يَنَالُ عَهْدِي الظَّالِمِينَ
(ऐ रसूल) बनी इसराईल को वह वक्त भी याद दिलाओ जब इबराहीम को उनके परवरदिगार ने चन्द बातों में आज़माया और उन्होंने पूरा कर दिया तो खुदा ने फरमाया मैं तुमको (लोगों का) पेशवा बनाने वाला हूँ (हज़रत इबराहीम ने) अर्ज़ की और मेरी औलाद में से फरमाया (हाँ मगर) मेरे इस अहद पर ज़ालिमों में से कोई शख्स फ़ायज़ नहीं हो सकता
125وَإِذْ جَعَلْنَا الْبَيْتَ مَثَابَةً لِّلنَّاسِ وَأَمْنًا وَاتَّخِذُوا مِن مَّقَامِ إِبْرَاهِيمَ مُصَلًّى ۖ وَعَهِدْنَا إِلَىٰ إِبْرَاهِيمَ وَإِسْمَاعِيلَ أَن طَهِّرَا بَيْتِيَ لِلطَّائِفِينَ وَالْعَاكِفِينَ وَالرُّكَّعِ السُّجُودِ
(ऐ रसूल वह वक्त भी याद दिलाओ) जब हमने ख़ानए काबा को लोगों के सवाब और पनाह की जगह क़रार दी और हुक्म दिया गया कि इबराहीम की (इस) जगह को नमाज़ की जगह बनाओ और इबराहीम व इसमाइल से अहद व पैमान लिया कि मेरे (उस) घर को तवाफ़ और एतक़ाफ़ और रूकू और सजदा करने वालों के वास्ते साफ सुथरा रखो
126وَإِذْ قَالَ إِبْرَاهِيمُ رَبِّ اجْعَلْ هَٰذَا بَلَدًا آمِنًا وَارْزُقْ أَهْلَهُ مِنَ الثَّمَرَاتِ مَنْ آمَنَ مِنْهُم بِاللَّهِ وَالْيَوْمِ الْآخِرِ ۖ قَالَ وَمَن كَفَرَ فَأُمَتِّعُهُ قَلِيلًا ثُمَّ أَضْطَرُّهُ إِلَىٰ عَذَابِ النَّارِ ۖ وَبِئْسَ الْمَصِيرُ
और (ऐ रसूल वह वक्त भी याद दिलाओ) जब इबराहीम ने दुआ माँगी कि ऐ मेरे परवरदिगार इस (शहर) को पनाह व अमन का शहर बना, और उसके रहने वालों में से जो खुदा और रोज़े आख़िरत पर ईमान लाए उसको तरह-तरह के फल खाने को दें खुदा ने फरमाया (अच्छा मगर) वो कुफ्र इख़तेयार करेगा उसकी दुनिया में चन्द रोज़ (उन चीज़ो से) फायदा उठाने दूँगा फिर (आख़ेरत में) उसको मजबूर करके दोज़ख़ की तरफ खींच ले जाऊँगा और वह बहुत बुरा ठिकाना है
अल-बकराकुरान सूची
286आयत
मदनीRevelation
124आयत

अनुवाद — अल-बकरा 124

सूरा अल-बकरा आयत 124 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल) बनी इसराईल को वह वक्त भी याद दिलाओ…

सूरा आयत 124/286 — अल-बकरा البقرة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-बकरा सुनें, अल-बकरा अनुवाद, अल-बकरा mp3, अल-बकरा pdf. आयत 122–126. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए