Mishary Rashid Alafasy
✓
Mahmoud Khalil Al-Husary
✓
Abdurrahman As-Sudais
✓
Mohamed Siddiq Al-Minshawi
✓
Abdul Basit Abdul Samad
✓
Ali Al-Hudhaify
✓
Ahmed ibn Ali al-Ajamy
✓
Abu Bakr Ash-Shaatree
✓
Muhammad Ayyoub
✓
Abdullah Basfar
✓
Abdullah Al-Juhani
✓
Maher Al Muaiqly
✓
अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- ابْتَلَى: परीक्षण किया, आज़माया।
- بِكَلِمَاتٍ: कुछ आदेशों और वचनों से, जो अल्लाह की ओर से परीक्षा के रूप में थे।
- فَأَتَمَّهُنَّ: उन्होंने उन सभी आदेशों को पूरा किया और उन पर अमल किया।
- إِمَامًا: नेता, पेशवा, जिसकी लोग अनुसरण करें।
- ذُرِّيَّتِي: मेरी संतान, मेरी औलाद।
- عَهْدِي: मेरा वादा, मेरा अनुबंध, जिसमें इमामत और नबुव्वत शामिल है।
- الظَّالِمِينَ: अत्याचारी, जो अपने ऊपर या दूसरों पर ज़ुल्म करें।
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ नबी! उस समय को याद करो जब अल्लाह ने हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) को कुछ आदेशों और परीक्षाओं के माध्यम से आज़माया। ये आदेश इस्लामी शरिया के मूल सिद्धांत थे, जैसे अल्लाह की इबादत, उसके प्रति समर्पण, और विभिन्न आज्ञाओं का पालन। हज़रत इब्राहीम ने इन सभी परीक्षाओं को पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ पार किया और हर आदेश को बखूबी अंजाम दिया। यह उनके ईमान और अल्लाह के प्रति प्रेम का प्रमाण था।
जब उन्होंने यह साबित कर दिया कि वे हर हाल में अल्लाह के आज्ञाकारी हैं, तो अल्लाह ने उन्हें सम्मानित करते हुए कहा: "मैं तुम्हें सभी लोगों के लिए इमाम (नेता) बना रहा हूँ।" यानी तुम्हारी ज़िंदगी, तुम्हारे कर्म और तुम्हारा चरित्र लोगों के लिए आदर्श होंगे, और लोग तुम्हारा अनुसरण करेंगे। यह एक बहुत बड़ा सम्मान था, जो अल्लाह ने अपने प्यारे नबी को प्रदान किया।
इस पर हज़रत इब्राहीम ने अल्लाह से प्रार्थना की: "ऐ मेरे रब! क्या मेरी संतान में से भी कुछ लोगों को तू यह इमामत प्रदान करेगा?" यह उनकी संतान के प्रति प्रेम और उनकी भलाई की चिंता को दर्शाता है। उन्होंने यह दुआ की कि उनकी औलाद में से भी ऐसे नेता हों जो लोगों को सही रास्ता दिखाएँ।
अल्लाह ने उत्तर दिया: "मेरा वादा (इमामत और नबुव्वत) अत्याचारियों को नहीं मिलेगा।" यानी जो लोग ज़ुल्म करेंगे—चाहे वे खुद पर ज़ुल्म करें (गुनाह करके) या दूसरों पर—वे इस उच्च पद के योग्य नहीं होंगे। यह एक स्पष्ट सिद्धांत है कि अल्लाह की ओर से नेतृत्व और धार्मिक अधिकार केवल उन्हीं को मिलता है जो न्याय, ईमान और अच्छे कर्मों में सच्चे हों। ज़ुल्म और अत्याचार इस पद को पाने में सबसे बड़ी बाधा है।
इस आयत से हमें यह शिक्षा मिलती है कि अल्लाह की नज़र में सबसे बड़ा सम्मान उसकी आज्ञा का पालन करने और उसके प्रति समर्पण में है। हज़रत इब्राहीम की तरह हमें भी अपने जीवन को अल्लाह के आदेशों के अनुसार ढालना चाहिए। साथ ही, हमें यह भी समझना चाहिए कि नेतृत्व और धार्मिक पद केवल उन्हीं को मिलते हैं जो न्याय और ईमान पर स्थिर रहते हैं। अल्लाह हमें सच्चे ईमान और अच्छे कर्मों की तौफ़ीक़ दे, और हमें उन लोगों में शामिल करे जो उसके प्यारे और नेक बंदे हैं। आमीन।
📜 आयत 122-126 — सूरा अल-बकरा
अनुवाद — अल-बकरा 124
सूरा अल-बकरा आयत 124 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल) बनी इसराईल को वह वक्त भी याद दिलाओ…सूरा आयत 124/286 — सूरा अल-बकरा البقرة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-बकरा सुनें, सूरा अल-बकरा अनुवाद, सूरा अल-बकरा mp3, सूरा अल-बकरा pdf. आयत 122–126. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


