Mishary Rashid Alafasy
✓
Mahmoud Khalil Al-Husary
✓
Abdurrahman As-Sudais
✓
Mohamed Siddiq Al-Minshawi
✓
Abdul Basit Abdul Samad
✓
Ali Al-Hudhaify
✓
Ahmed ibn Ali al-Ajamy
✓
Abu Bakr Ash-Shaatree
✓
Muhammad Ayyoub
✓
Abdullah Basfar
✓
Abdullah Al-Juhani
✓
Maher Al Muaiqly
✓
अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- خَافَ: यहाँ इसका अर्थ है 'जान लेना' या 'डर महसूस करना'।
- جَنَفًا: सत्य से हटकर अन्याय या पक्षपात करना, इरादतन या भूल से।
- إِثْمًا: जानबूझकर किया गया पाप या ज़ुल्म।
- فَأَصْلَحَ: सुधार करना, आपस में मेल-मिलाप कराना।
तफसीर (व्याख्या):
यह आयत वसीयत (इच्छा-पत्र) के मामले में न्याय और सुधार का मार्गदर्शन देती है। जब कोई व्यक्ति वसीयत करते समय सत्य से भटक जाए—चाहे वह भूल से हो या जानबूझकर—और किसी वारिस को नुकसान पहुँचाने या किसी को अनुचित लाभ देने की कोशिश करे, तो जो व्यक्ति इस अन्याय को भाँप लेता है, उसे चुप नहीं रहना चाहिए। उसका कर्तव्य है कि वह वसीयत करने वाले को नसीहत करके सही रास्ते पर लाए, और यदि वसीयत हो चुकी हो, तो वारिसों और वसीयत पाने वालों के बीच सुधार करे, वसीयत को न्याय और शरिया के अनुरूप ढाल दे। ऐसा करने पर उस पर कोई पाप नहीं है, बल्कि वह अल्लाह के यहाँ अज्र (पुण्य) का हकदार है। अल्लाह ने अपने बंदों पर बड़ी मेहरबानी और रहमत रखी है—वह उन लोगों को माफ कर देता है जो सुधार के इरादे से कदम उठाते हैं, और उन पर दया करता है। यह आयत उन लोगों के लिए एक खुशखबरी है जो नेकनीयती से लोगों के बीच सुलह कराते हैं, क्योंकि अल्लाह उनके इस अच्छे काम को कभी बेकार नहीं जाने देता।
फ़ायदे (सीख):
- इस्लाम न्याय और इंसाफ का इतना पाबंद है कि मरने के बाद की वसीयत में भी किसी को नुकसान पहुँचाने की इजाज़त नहीं देता, और यह सिखाता है कि हर हाल में हक़ अदा होना चाहिए।
- एक मुसलमान का फर्ज़ सिर्फ अपनी भलाई नहीं, बल्कि दूसरों के बीच सुधार और सुलह कराना भी है—यह एक बड़ी नेकी है।
- अल्लाह की रहमत और माफी का दामन बहुत विस्तृत है; जो लोग नेक इरादे से सुधार करते हैं, उन्हें अल्लाह की पनाह और उसकी मेहरबानी हासिल होती है।
- यह आयत हमें सिखाती है कि किसी गलती को देखकर चुप रहना और उसे बढ़ने देना ठीक नहीं, बल्कि हिम्मत करके सच्चाई और न्याय के लिए आवाज़ उठानी चाहिए।
📜 आयत 180-184 — सूरा अल-बकरा
अनुवाद — अल-बकरा 182
सूरा अल-बकरा आयत 182 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (हाँ अलबत्ता) जो शख्स वसीयत करने वाले से बेजा तरफ़दारी…सूरा आयत 182/286 — सूरा अल-बकरा البقرة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-बकरा सुनें, सूरा अल-बकरा अनुवाद, सूरा अल-बकरा mp3, सूरा अल-बकरा pdf. आयत 180–184. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


