ताहा · 24/135
अनुवाद उच्चारण — ताहा
اذْهَبْ إِلَىٰ فِرْعَوْنَ إِنَّهُ طَغَىٰ ۝٢٤
Izhab ilaa Fir`awna innahoo taghaa
📖 हिंदी अर्थ
अब तुम फिरऔन के पास जाओ उसने बहुत सर उठाया है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • इध-हब (اذْهَبْ): जाओ, चलो।
  • फ़िरऔन (فِرْعَوْنَ): मिस्र का शासक जो अत्याचारी और सिरकश था।
  • तग़ा (طَغَى): सरकशी की, हद से बढ़ गया, अत्याचार और कुफ्र में चरम सीमा को पार कर गया।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) को एक महान और ऐतिहासिक मिशन पर भेजा। यह आदेश केवल एक व्यक्ति को संदेश देने का नहीं था, बल्कि यह सत्य और असत्य के बीच एक निर्णायक मोड़ था। अल्लाह ने फ़रमाया: "जाओ फ़िरऔन के पास, क्योंकि उसने बहुत सरकशी की है।"

फ़िरऔन वह शासक था जिसने स्वयं को "रब्ब-ए-आला" (सबसे बड़ा रब) कहा था। उसने अल्लाह की नाफ़रमानी में हद से तजावुज़ कर दिया था। वह न केवल खुद गुमराह था, बल्कि उसने बनी इसराईल को भी अत्याचारों की ज़ंजीरों में जकड़ रखा था। उसका घमंड, उसका ज़ुल्म और उसका कुफ्र उसे हद से बाहर ले गया था।

इस आयत में अल्लाह तआला हज़रत मूसा को एक ऐसे शासक के पास भेज रहा है जो अपनी ताकत और सल्तनत के नशे में चूर था। लेकिन अल्लाह का हुक्म है कि तुम उसके पास जाओ और उसे सच्चाई की तरफ बुलाओ। यह दिखाता है कि अल्लाह की रहमत कितनी वसीअ है—वह अपने बंदों को हिदायत की तरफ बुलाता है, चाहे वे कितने ही गुनाहगार क्यों न हों।

इस आयत से हमें सीख मिलती है कि दावत-ए-दीन का काम कभी मत छोड़ो, चाहे सामने वाला कितना ही बड़ा ज़ालिम या सरकश क्यों न हो। अल्लाह के दीन की पहुँच हर इंसान तक होनी चाहिए। हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) को अकेले फ़िरऔन जैसे ज़ालिम के सामने जाने का हुक्म दिया गया, और उन्होंने अल्लाह पर भरोसा करके यह किया। यह हमारे लिए सबक़ है कि हक़ बात कहने में किसी से न डरें, क्योंकि अल्लाह ही सबसे बड़ा है और वही अपने नबियों और दीन की मदद करता है।

यह आयत हमें यह भी बताती है कि अल्लाह का दीन किसी भी इंसान के लिए बंद नहीं है—चाहे वह बादशाह हो या ग़रीब। दावत का पैग़ाम हर किसी तक पहुँचना चाहिए। और जब हम अल्लाह के हुक्म पर चलते हैं, तो अल्लाह हमें कामयाबी देता है, जैसे उसने मूसा (अलैहिस्सलाम) को फ़िरऔन के मुक़ाबले में फ़तह अता की।

आज हमें भी अपने समाज में फैले ज़ुल्म, कुफ्र और गुमराही के खिलाफ़ आवाज़ उठानी चाहिए, और अल्लाह के दीन की तरफ लोगों को बुलाना चाहिए। यही वह रास्ता है जो हमें दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाबी देगा। अल्लाह हमें अपने दीन पर साबित-क़दम रखे और हमें अपने कलाम को समझने और उस पर अमल करने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 22-26 — ताहा

22وَاضْمُمْ يَدَكَ إِلَىٰ جَنَاحِكَ تَخْرُجْ بَيْضَاءَ مِنْ غَيْرِ سُوءٍ آيَةً أُخْرَىٰ
और अपने हाथ को समेंट कर अपने बग़ल में तो कर लो (फिर देखो कि) वह बग़ैर किसी बीमारी के सफेद चमकता दमकता हुआ निकलेगा ये दूसरा मौजिज़ा है
23لِنُرِيَكَ مِنْ آيَاتِنَا الْكُبْرَى
(ये) ताकि हम तुमको अपनी (कुदरत की) बड़ी-बड़ी निशानियाँ दिखाएँ
24اذْهَبْ إِلَىٰ فِرْعَوْنَ إِنَّهُ طَغَىٰ
अब तुम फिरऔन के पास जाओ उसने बहुत सर उठाया है
25قَالَ رَبِّ اشْرَحْ لِي صَدْرِي
मूसा ने अर्ज़ की परवरदिगार (मैं जाता तो हूँ)
26وَيَسِّرْ لِي أَمْرِي
मगर तू मेरे लिए मेरे सीने को कुशादा फरमा
ताहाकुरान सूची
135आयत
मक्कीRevelation
24आयत

अनुवाद — ताहा 24

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सूरा आयत 24/135 — ताहा طه (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: ताहा सुनें, ताहा अनुवाद, ताहा mp3, ताहा pdf. आयत 22–26. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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