ताहा · 25/135
अनुवाद उच्चारण — ताहा
قَالَ رَبِّ اشْرَحْ لِي صَدْرِي ۝٢٥
Qaala Rabbish rah lee sadree
📖 हिंदी अर्थ
मूसा ने अर्ज़ की परवरदिगार (मैं जाता तो हूँ)

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • رَبِّ (रब्बी): मेरे पालनहार
  • اشْرَحْ (इशरह): खोल दे, विस्तृत कर दे
  • صَدْرِي (सद्री): मेरा सीना (हृदय)

विस्तृत तफ़सीर:

हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) को जब अल्लाह तआला ने फ़िरऔन के पास जाने का आदेश दिया, तो यह एक अत्यंत कठिन और ज़िम्मेदारी भरा कार्य था। फ़िरऔन अपने समय का सबसे ज़ालिम और सरकश हुक्मरान था, जो खुद को ख़ुदा कहता था। ऐसे में हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) ने अल्लाह से एक बहुत ही प्यारी और अदब भरी दुआ की।

उन्होंने कहा: "मेरे पालनहार! मेरा सीना खोल दे।" यानी मेरे दिल को विस्तृत कर दे, मेरे सीने को इतना कुशादा (खुला) कर दे कि मैं हर मुश्किल को सहन कर सकूँ, हर बोझ उठा सकूँ, और हर सख्ती को बर्दाश्त कर सकूँ।

यह दुआ सिखाती है कि जब इंसान किसी बड़े काम के लिए निकले, तो सबसे पहले उसे अपने दिल की सफाई और कुशादगी (खुलापन) की दुआ करनी चाहिए। क्योंकि जब दिल में गुंजाइश होती है, तो हर मुश्किल आसान लगती है, हर बात को सहन करने की ताकत आती है, और अल्लाह की मदद भी नाज़िल होती है।

हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) ने यह दुआ सिर्फ अपने लिए नहीं मांगी, बल्कि यह दुआ उन्होंने उस काम की अहमियत को समझते हुए मांगी जो उनके सामने था — यानी फ़िरऔन के सामने जाकर सच्चाई का पैग़ाम पहुँचाना। उन्होंने अल्लाह से दिल की कुशादगी मांगी ताकि वे फ़िरऔन की बुरी अख़लाक़ और सख्ती को बर्दाश्त कर सकें, और हक़ (सच्चाई) पर क़ायम रह सकें।

दावती पहलू:

यह दुआ हम सबके लिए बहुत बड़ी नसीहत है। जब भी हम किसी मुश्किल काम का सामना करें, किसी बड़ी ज़िम्मेदारी को उठाने वाले हों, या किसी ज़ालिम या मुश्किल इंसान के सामने सच बोलना हो, तो हमें चाहिए कि पहले अल्लाह से दिल की कुशादगी मांगें। जब दिल खुला होगा, तो ज़ुबान भी खुली होगी, और अल्लाह की मदद भी हमारे साथ होगी।

याद रखिए, अल्लाह तआला अपने बंदे की दुआ सुनता है और उसे वह ताकत देता है जो किसी और से नहीं मिल सकती। हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) जैसे नबी ने भी अल्लाह से मदद मांगी, तो हमें भी चाहिए कि हर काम में अल्लाह से मदद मांगें और अपने दिल को साफ़ और कुशादा रखें। यही सच्ची कामयाबी का रास्ता है।



📜 आयत 23-27 — ताहा

23لِنُرِيَكَ مِنْ آيَاتِنَا الْكُبْرَى
(ये) ताकि हम तुमको अपनी (कुदरत की) बड़ी-बड़ी निशानियाँ दिखाएँ
24اذْهَبْ إِلَىٰ فِرْعَوْنَ إِنَّهُ طَغَىٰ
अब तुम फिरऔन के पास जाओ उसने बहुत सर उठाया है
25قَالَ رَبِّ اشْرَحْ لِي صَدْرِي
मूसा ने अर्ज़ की परवरदिगार (मैं जाता तो हूँ)
26وَيَسِّرْ لِي أَمْرِي
मगर तू मेरे लिए मेरे सीने को कुशादा फरमा
27وَاحْلُلْ عُقْدَةً مِّن لِّسَانِي
और दिलेर बना और मेरा काम मेरे लिए आसान कर दे और मेरी ज़बान से लुक़नत की गिरह खोल दे
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अनुवाद — ताहा 25

सूरा ताहा आयत 25 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : मूसा ने अर्ज़ की परवरदिगार (मैं जाता तो हूँ)

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Tuesday, August 18, 2026

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