ताहा · 8/135
अनुवाद उच्चारण — सूरा ताहा
اللَّهُ لَا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ ۖ لَهُ الْأَسْمَاءُ الْحُسْنَىٰ ۝٨
Allaahu laaa ilasha illaa Huwa lahul Asmaaa`ul Husnaa
📖 हिंदी अर्थ
अल्लाह (वह माबूद है कि) उसके सिवा कोइ माबूद नहीं है (अच्छे-अच्छे) उसी के नाम हैं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • اللَّهُ: अल्लाह, जो सृष्टि का रचयिता, पालनहार और स्वामी है।
  • لَا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ: उसके सिवा कोई सच्चा पूज्य नहीं।
  • الْأَسْمَاءُ الْحُسْنَىٰ: सबसे सुंदर और उत्तम नाम।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत तौहीद (एकेश्वरवाद) का सबसे स्पष्ट और पवित्र उद्घोष है। अल्लाह तआला ने अपनी ज़ात की गवाही खुद दी है कि वही एक सच्चा माबूद (पूज्य) है, और उसके सिवा जितनी भी चीज़ों की पूजा की जाती है—चाहे वे मूर्तियाँ हों, सितारे हों, इंसान हों या कोई और मख़लूक़—वे सब बातिल हैं। सिर्फ़ अल्लाह ही है जो इबादत के लायक़ है, क्योंकि वही पैदा करने वाला, रिज़्क़ देने वाला, ज़िंदगी और मौत का मालिक और पूरी कायनात का प्रबंधक है।

फिर अल्लाह ने फ़रमाया: "उसी के लिए हैं सबसे सुंदर नाम" — यानी अल्लाह के नामों में कोई कमी नहीं, कोई बुराई नहीं, कोई ऐब नहीं। उसके हर नाम से एक बेहतरीन सिफ़त (गुण) ज़ाहिर होती है, जैसे: अर-रहमान (बेहद मेहरबान), अर-रहीम (बहुत दयालु), अल-अलीम (सब कुछ जानने वाला), अल-क़ादिर (सब पर क़ुदरत रखने वाला), अल-हकीम (बेहद हिकमत वाला), अल-ग़फ़ूर (बहुत क्षमा करने वाला)। ये नाम हमें बताते हैं कि अल्लाह कितना महान, कितना दयालु और कितना पवित्र है।

इस आयत में हमारे लिए सबसे बड़ी शिक्षा यह है कि हम अपनी ज़िंदगी में सिर्फ़ अल्लाह को ही अपना मालिक और माबूद मानें। उसी से मदद माँगें, उसी से डरें, उसी से प्यार करें और उसी की इबादत करें। जब हम अल्लाह के सुंदर नामों को पढ़ते और समझते हैं, तो हमारा दिल उसकी मोहब्बत से भर जाता है और हमें यक़ीन होता है कि अल्लाह हमारी हर ज़रूरत को पूरा करने वाला है, हमारी हर गलती को माफ़ करने वाला है और हमें कभी अकेला नहीं छोड़ता।

यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि हम अल्लाह से उसी के प्यारे नामों के ज़रिए दुआ करें, क्योंकि वह अपने नामों की बरकत से दुआएँ क़बूल करता है। रसूलुल्लाह ﷺ ने हमें सिखाया है कि जो बंदा अल्लाह के नामों को याद करता है और उनके मानी समझता है, वह जन्नत में दाख़िल होगा। तो आओ, हम अपनी ज़िंदगी को अल्लाह के नामों की रोशनी में ढालें, उसकी रहमत के साये में जिएँ और उसी की इबादत में अपनी कामयाबी तलाश करें। यही सबसे बड़ी सच्चाई है, और यही हमारी नजात (मुक्ति) का रास्ता है।



📜 आयत 6-10 — सूरा ताहा

6لَهُ مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَمَا فِي الْأَرْضِ وَمَا بَيْنَهُمَا وَمَا تَحْتَ الثَّرَىٰ
जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है और जो कुछ दोनों के बीच में है और जो कुछ ज़मीन के नीचे है (ग़रज़ सब कुछ) उसी का है
7وَإِن تَجْهَرْ بِالْقَوْلِ فَإِنَّهُ يَعْلَمُ السِّرَّ وَأَخْفَى
और अगर तू पुकार कर बात करे (तो भी आहिस्ता करे तो भी) वह यक़ीनन भेद और उससे ज्यादा पोशीदा चीज़ को जानता है
8اللَّهُ لَا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ ۖ لَهُ الْأَسْمَاءُ الْحُسْنَىٰ
अल्लाह (वह माबूद है कि) उसके सिवा कोइ माबूद नहीं है (अच्छे-अच्छे) उसी के नाम हैं
9وَهَلْ أَتَاكَ حَدِيثُ مُوسَىٰ
और (ऐ रसूल) क्या तुम तक मूसा की ख़बर पहुँची है कि जब उन्होंने दूर से आग देखी
10إِذْ رَأَىٰ نَارًا فَقَالَ لِأَهْلِهِ امْكُثُوا إِنِّي آنَسْتُ نَارًا لَّعَلِّي آتِيكُم مِّنْهَا بِقَبَسٍ أَوْ أَجِدُ عَلَى النَّارِ هُدًى
तो अपने घर के लोगों से कहने लगे कि तुम लोग (ज़रा यहीं) ठहरो मैंने आग देखी है क्या अजब है कि मैं वहाँ (जाकर) उसमें से एक अंगारा तुम्हारे पास ले आऊँ या आग के पास किसी राह का पता पा जाऊँ
ताहाकुरान सूची
135आयत
मक्कीअवतरण स्थान
8आयत

अनुवाद — ताहा 8

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Sunday, October 11, 2026

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