ताहा · 7/135
अनुवाद उच्चारण — सूरा ताहा
وَإِن تَجْهَرْ بِالْقَوْلِ فَإِنَّهُ يَعْلَمُ السِّرَّ وَأَخْفَى ۝٧
Wa in tajhar bilqawli fainnahoo ya`lamus sirra wa akhfaa
📖 हिंदी अर्थ
और अगर तू पुकार कर बात करे (तो भी आहिस्ता करे तो भी) वह यक़ीनन भेद और उससे ज्यादा पोशीदा चीज़ को जानता है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
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A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • تَجْهَرْ: ऊँची आवाज़ में कहना, प्रकट करना।
  • السِّرّ: वह बात जो इंसान किसी दूसरे से छिपकर कहे।
  • وَأَخْفَى: उससे भी अधिक छिपी हुई चीज़, अर्थात वह बात जो इंसान अपने दिल में सोचता है और किसी को नहीं बताता।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! चाहे आप अपनी बात को ऊँची आवाज़ से कहें या उसे छिपाकर रखें, दोनों ही स्थितियाँ अल्लाह के लिए बराबर हैं। अल्लाह तआला को हर चीज़ का पूर्ण ज्ञान है—वह उन राज़ों को जानता है जो लोग एक-दूसरे से छिपाकर कहते हैं, और उससे भी बढ़कर वह उन ख़यालात और इरादों को जानता है जो इंसान के दिल में गुज़रते हैं, जिन्हें वह खुद अपनी ज़बान से भी नहीं कहता। अल्लाह के इल्म से कोई चीज़ छिपी नहीं है—ना ज़मीन की गहराइयों में, ना दिलों के राज़ में, ना उन बातों में जो अभी पैदा भी नहीं हुईं।

यह आयत हमें अल्लाह की अज़मत और उसके असीम ज्ञान का एहसास कराती है। जब हमें यक़ीन हो जाए कि अल्लाह हमारे दिल की हर बात, हर नीयत और हर ख़याल से वाक़िफ़ है, तो हमारी ज़िंदगी में एक अजीब सी पाकीज़गी आ जाती है। हम अकेले में भी उन कामों से बचते हैं जो अल्लाह को नापसंद हैं, क्योंकि हम जानते हैं कि अल्लाह हमें देख रहा है और सुन रहा है। यही वह ईमान है जो इंसान को बिना किसी निगरानी के भी नेक बनाता है।

और क्या ही खूबसूरत बात है कि हमारा रब हमारी हर दुआ को सुनता है—चाहे हम उसे ज़बान से कहें या दिल ही दिल में माँगें। वह हमारी हर ज़रूरत को जानता है, हमारी हर तकलीफ़ को समझता है। तो आओ, हम अपने रब पर भरोसा रखें, उससे बातें करें, और उसकी निगरानी का एहसास अपने दिलों में जगाएँ। यही वह रास्ता है जो हमें दुनिया में सुकून और आख़िरत में कामयाबी तक पहुँचाता है।



📜 आयत 5-9 — सूरा ताहा

5الرَّحْمَٰنُ عَلَى الْعَرْشِ اسْتَوَىٰ
वही रहमान है जो अर्श पर (हुक्मरानी के लिए) आमादा व मुस्तईद है
6لَهُ مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَمَا فِي الْأَرْضِ وَمَا بَيْنَهُمَا وَمَا تَحْتَ الثَّرَىٰ
जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है और जो कुछ दोनों के बीच में है और जो कुछ ज़मीन के नीचे है (ग़रज़ सब कुछ) उसी का है
7وَإِن تَجْهَرْ بِالْقَوْلِ فَإِنَّهُ يَعْلَمُ السِّرَّ وَأَخْفَى
और अगर तू पुकार कर बात करे (तो भी आहिस्ता करे तो भी) वह यक़ीनन भेद और उससे ज्यादा पोशीदा चीज़ को जानता है
8اللَّهُ لَا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ ۖ لَهُ الْأَسْمَاءُ الْحُسْنَىٰ
अल्लाह (वह माबूद है कि) उसके सिवा कोइ माबूद नहीं है (अच्छे-अच्छे) उसी के नाम हैं
9وَهَلْ أَتَاكَ حَدِيثُ مُوسَىٰ
और (ऐ रसूल) क्या तुम तक मूसा की ख़बर पहुँची है कि जब उन्होंने दूर से आग देखी
ताहाकुरान सूची
135आयत
मक्कीअवतरण स्थान
7आयत

अनुवाद — ताहा 7

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Wednesday, September 30, 2026

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