अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- فَلَكٍ: तारों का मार्ग या कक्षा, जिसमें वे चलते हैं।
- يَسْبَحُونَ: वे तैरते हैं, अर्थात अपनी कक्षा में तेज़ी से चलते हैं।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला ही वह ज़ात है जिसने रात और दिन को बनाया—रात को इसलिए ताकि लोग उसमें सुकून और आराम पाएँ, और दिन को इसलिए ताकि लोग अपनी रोज़ी-रोज़गार की तलाश करें। उसी ने सूरज को दिन की रोशनी का ज़रिया बनाया और चाँद को रात की रोशनी का। ये सारे जिस्म अपनी-अपनी निश्चित कक्षा (मदार) में इस तरह चल रहे हैं जैसे पानी में तैरता हुआ कोई चीज़ चलती है—न तो सूरज अपने रास्ते से भटकता है, न चाँद अपनी मंज़िल से हटता है। यह नियम और यह व्यवस्था किसी और की नहीं, बल्कि अकेले अल्लाह की बनाई हुई है।
यह आयत हमें उस महान शक्ति की याद दिलाती है जिसने इस पूरे ब्रह्मांड को इस तरह सजाया है कि हर चीज़ अपनी जगह पर क़ायम है। जिस रात को हम आराम के लिए पाते हैं और जिस दिन को हम काम के लिए देखते हैं, यह सब उसी रहमान की देन है। सूरज और चाँद की यह सैर—जो अरबों सालों से जारी है और एक पल के लिए भी नहीं रुकती—हमें बताती है कि इस कायनात का मालिक कितना क़ादिर (सर्वशक्तिमान) है।
क्या हमें उस पर ईमान नहीं लाना चाहिए जिसने यह सब बनाया? क्या हमें उसकी इबादत नहीं करनी चाहिए जिसने हमारे लिए रात को पर्दा और दिन को रोशनी बनाया? यह सृष्टि हमें बुला रही है कि हम अपने रब की तरफ़ लौटें, उसकी नेमतों का शुक्र अदा करें और उसी की राह पर चलें। जो इन निशानियों पर ग़ौर करेगा, उसका दिल ईमान की रोशनी से भर जाएगा और वह समझ जाएगा कि यह सब कुछ बेकार नहीं बनाया गया—बल्कि हर चीज़ में हिकमत है और हर चीज़ हमें अपने ख़ालिक़ की तरफ़ इशारा कर रही है।
📜 आयत 31-35 — सूरा अल-अंबिया
अनुवाद — अल-अंबिया 33
सूरा अल-अंबिया आयत 33 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और वही वह (क़ादिरे मुत्तलिक़) है जिसने रात और दिन…सूरा आयत 33/112 — सूरा अल-अंबिया الأنبياء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-अंबिया सुनें, सूरा अल-अंबिया अनुवाद, सूरा अल-अंबिया mp3, सूरा अल-अंबिया pdf. आयत 31–35. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, September 8, 2026
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